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गर्मी और बरसात के मौसम में घर के अंदर चिपचिपी नमी यानी ह्यूमिडिटी से हम सभी परेशान रहते हैं. इससे राहत पाने के लिए हम घंटों AC, कूलर चलाकर लोग रखते हैं, जिससे बिजली का बिल भी भारी-भरकम आता है. लेकिन जरा सोचिए कि अगर यही नमी आपके सिरदर्द बनने के बजाय घर के गैजेट्स को चार्ज करने लगे तो? सुनने में भले ही यह चौंकाने वाला लगे, लेकिन अब यह सच होने जा रहा है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा वॉलपेपर तैयार कर लिया है, जो हवा में मौजूद नमी को सोखखर उससे बिजली बनाएगा. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे...
अमेरिका की बिंघमटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक ऐसा ही खास वॉलपेपर तैयार किया है, जो हवा में मौजूद नमी से बिजली पैदा कर सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए धूप की जरूरत नहीं होती है. रिसर्चर्स के अनुसार यह तकनीक घर के अंदर मौजूद नमी को सोखकर बहुत कम मात्रा में लगातार बिजली पैदा करती है. इसका इस्तेमाल स्मार्ट होम में लगे छोटे डिवाइस जैसे वायरलेस कीबोर्ड, तापमान सेंसर और स्मार्ट थर्मोस्टेट को चलाने में किया जा सकता है.
इस वॉलपेपर में छोटे-छोटे मॉइस्ट-इलेक्ट्रिक जनरेटर यानी MEGs लगाए गए हैं. ये हवा में मौजूद पानी की भाप को सोखते हैं. जब नमी इस खास मटेरियल में पहुंचती है तो उसके अंदर मौजूद आयन अलग होने लगते हैं. इससे मटेरियल के दोनों हिस्सों के बीच वोल्टेज पैदा होता है और बिजली बनने लगती है.
इस तकनीक की खास बात यह है कि यह सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं है. घर के अंदर नमी का स्तर आम तौर पर काफी स्थिर रहता है. खाना बनाने, नहाने और यहां तक कि सांस लेने से भी कमरे की हवा में नमी बढ़ती है. यही नमी इस वॉलपेपर के लिए बिजली बनाने का काम करती है.
इस तकनीक को सस्ता और इस्तेमाल में आसान बनाने के लिए रिसर्चर्स ने पेपरट्रॉनिक्स का इस्तेमाल किया है. इसमें कागज पर ही इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार किए जाते हैं.
वॉलपेपर के किनारों पर ग्लिसरॉल की एक परत लगाई गई है. यह हवा से पानी के अणुओं को सोखने का काम करती है. बीच में एक खास पॉलिमर लेयर बनाई गई है, जिस पर वैक्स का पैटर्न तैयार किया गया है. यह हिस्सा नमी के फैलाव और वाष्पीकरण को कंट्रोल करता है. इस तरह वॉलपेपर में नमी एक दिशा में आगे बढ़ती रहती है और बिजली पैदा होती रहती है.
रिसर्चर्स ने इस तकनीक को सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने 1,596 छोटे यूनिट को आपस में जोड़कर एक बड़ा वॉलपेपर तैयार किया. टेस्ट के दौरान एक यूनिट लगभग 0.34 वोल्ट का वोल्टेज पैदा करने में सक्षम था.
80 फीसदी रिलेटिव ह्यूमिडिटी पर इसकी पावर डेंसिटी करीब 2.2 माइक्रोवाट प्रति वर्ग सेंटीमीटर रही. इतने बड़े सेटअप से लगातार बिजली पैदा हुई, जिससे रिसर्चर्स ने एक वायरलेस कीबोर्ड को बिना बैटरी के चलाकर दिखाया.
इस वॉलपेपर का काम सिर्फ बिजली बनाना ही नहीं है. यह कमरे की नमी को कम करने में भी मदद कर सकता है. एक टेस्ट में कमरे की नमी 38 फीसदी से घटकर 32 फीसदी तक पहुंच गई.
इसका मतलब है कि भविष्य में ऐसी तकनीक एक तरह से पैसिव डीह्यूमिडिफायर की तरह भी काम कर सकती है. इससे घर के एयर कंडीशनर पर नमी कम करने का कुछ दबाव घट सकता है.
फिलहाल इस तकनीक से घर का फ्रिज, टीवी या कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चलाना संभव नहीं है. इससे पैदा होने वाली बिजली माइक्रोवाट स्तर की है. इसलिए इसका इस्तेमाल कम बिजली खपत करने वाले डिवाइस के लिए ज्यादा असरदार होगा. स्मार्ट थर्मोस्टेट, टेंपरेचर सेंसर, घर की हवा की निगरानी करने वाले डिवाइस और वायरलेस कीबोर्ड इसके संभावित इस्तेमाल हो सकते हैं.
सबसे खास बात यह है कि वॉलपेपर के पीछे वायरिंग छिपाई जा सकती है. ऐसे में दीवार पर अलग से तारों का जाल भी नजर नहीं आएगा. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर तैयार होने लगती है तो भविष्य में घर की दीवारें सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं रहेंगी, बल्कि छोटे स्मार्ट डिवाइस के लिए बिजली भी बना सकेंगी.