“राधा-कृष्ण” भारतीय भक्ति परंपरा में एक-दूसरे के पर्याय हैं और उनकी लीलाओं, रासलीला पर कई ग्रंथ, पुराण लिखे गए हैं. जिसमें श्रीमद्भागवत पुराण प्रमुख है. इस पुराण में एक अनोखी बात देखने को मिलती है इसमें कहीं भी राधा का नाम सीधे तौर पर नहीं लिखा गया है. ऐसा क्यों?