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महिला एशिया कप 2026 की ट्रॉफी कंट्रोवर्सी की खबर हर किसी के पास पहुंच चुकी होगी. पाकिस्तान के गृह मंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी की पिछले साल से भी भयानक बेइज्जती हुई. लेकिन उनके सिर पर जिद, जुनून और बेशर्मी सवार थी, इसलिए एक बार फिर ट्रॉफी लेकर चलते बने. लेकिन क्या ये सब रोका जा सकता था, क्या भारतीय टीम को ट्रॉफी कोई और सौंप सकता था? हम आपको प्रोटोकॉल का वो पन्ना बताते हैं, जो नकवी ने अपनी जिद के आगे पलट दिया.
ये मुद्दा सबसे पहले मेंस एशिया कप 2025 में उठा, जब भारतीय टीम ने खिताब जीता और दोनों देशों के बीच तनाव के चलते टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी न लेने की ठान ली. नकवी दूसरी तरफ खुद ट्रॉफी देने के लिए अड़े रहे और फिर खिताब लेकर चलते बने. महिला एशिया कप में भी यही देखने को मिला. भारत ने फाइनल में श्रीलंका को मात दी और चैंपियन बनी, लेकिन चमचमाती ट्रॉफी लेकर तो मोहसिन नकवी भाग गए. नियमों को उठाकर देखें तो ये कंट्रोवर्सी रोकी जा सकती थी, लेकिन नकवी ने अपनी जिद और जुनून के आगे नियमों की धज्जियां उड़ा डालीं.
एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की पुरानी गाइडलाइंस को उठाकर देखें, तो समझ आता है कि इस पूरी कंट्रोवर्सी का केंद्र मोहसिन नकवी हैं. गाइलाइंस के मुताबिक बड़े आयोजनों या द्विपक्षीय सीरीज में पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान विजेता टीम को ट्रॉफी देने का सम्मान न्यूट्रल पदाधिकारियों, स्थानीय क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधियों या मेजबान देश के बोर्ड अध्यक्ष को दिया जाता है. ये नियम खेल भावना को बनाए रखने और राजनीतिक गतिरोध को मैदान से दूर रखने के लिए ही बनाया गया है.
मोहसिन नकवी ने ACC अध्यक्ष बनकर भी नियमों का सम्मान नहीं किया. मान लेते हैं, पिछले साल टीम इंडिया नकवी से ट्रॉफी न लेना उनके लिए सरप्राइजिंग था, लेकिन इस बार उन्होंने दोहरा रवैया दिखाया. बीसीसीआई सचिव और अन्य पदाधिकारियों ने फाइनल मैच से पहले ही साफ कर दिया था, कि भारत किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनेगा. क्योंकि मोहसिन नकवी के पाकिस्तान के गृह मंत्री के पद पर भी हैं. खिताबी जंग से पहले बीसीसीआई ने एसीसी अधिकारियों को आगाह किया था कि नकवी अगर नकवी प्रेजेंटेशन सेरेमनी में आते हैं, तो भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी. भारत की तरफ से आगाह करने के साथ सुझाव भी था कि एसीसी के उपाध्यक्ष या मेजबान यूएई के कोई पदाधिकारी ट्रॉफी सौंप सकते हैं, लेकिन नकवी जिद पर अड़े रहे और बेशरमी की सरी हदें पार कर दीं.
अब बात करें ट्रॉफी की जिद की, तो नियमों के मुताबिक ये जायज नहीं है. पिछले साल जब भारत को ट्रॉफी देने का मुद्दा उठा, तो जवाब था कि 'भारत को ट्रॉफी चाहिए तो उनके दफ्तर से कलेक्ट कर ले.' पिछले साल की तरह दूसरी ट्रॉफी भी मोहसिन नकवी ट्रॉफी ले जा चुके हैं. अब देखना होगा कि इस बार भारत की तरफ से दोनों ट्रॉफी को लेकर कोई कदम उठाया जाएगा या नहीं.