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इसमें कहीं से दो राय नहीं है कि जसप्रीत बुमराह मौजूदा समय में सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि दुनिया के टॉप गेंदबाज हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि वो टीम इंडिया की आधी ताकत हैं. आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं. इस साल T20I में भारतीय टीम 13 मुकाबलों में बुमराह के बिना मैदान पर उतरी है और इन मैचों में गेंदबाजों का हाल बेहाल रहा है. 2026 में T20I में 'फुल मेंबर' टीमों के खिलाफ भारत की बॉलिंग के आंकड़े एक दिलचस्प कहानी बताते हैं.
फर्क साफ दिखता है कि बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय गेंदबाजों की ताकत आधी हो जाती है. इसका नमूना हमने रांची में भी देखा, जहां भारतीय गेंदबाज 250 रन भी डिफेंड नहीं कर सके. वेस्टइंडीज के खिलाफ इस मैच में अगर बुमराह होते तो शायद कहानी कुछ और हो सकती थी.
इस साल जसप्रीत बुमराह के बिना भारत ने 13 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं. इन मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने 29.32 की औसत और 9.37 की इकॉनमी रेट से रन लुटाते हुए 73 विकेट चटकाए हैं. इस दौरान भारतीय गेंदबाजों का स्ट्राइक रेट 18.7 का रहा है.
2026 में अब तक के सफर पर नजर डालें तो जसप्रीत बुमराह की उपस्थिति में भारत ने 15 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. इस दौरान भारतीय गेंदबाजों ने 22.18 की औसत और 8.77 की इकॉनमी रेट से रन देते हुए 111 विकेट चटकाए हैं और स्ट्राइक रेट 15.1 का रहा है.
बड़ा सवाल ये है कि बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया 13 मैचों में सिर्फ 73 विकेट ही क्यों ले पाई है? जबकि, उनके साथ ये आंकड़ा बढ़कर 111 हो जा रहा है. दरअसल, बुमराह ना सिर्फ खुद विकेट चटकाते हैं, बल्कि साथी बॉलर को भी विकेट लेने में मदद करते हैं. उनका प्रभाव इतना है कि विरोधी टीम के बल्लेबाज उनके खिलाफ ज्यादा रिस्क नहीं लेते हैं. उनका प्लान दूसरे गेंदबाजों पर अटैक करने का होता है और इसी का फायदा बुमराह के साथ गेंदबाजी करने वाले बॉलर्स को मिलता है. दबाव बुमराह बनाते हैं और विकेट किसी और को मिलती है.
वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में बुमराह टीम इंडिया का हिस्सा नहीं हैं. उनकी अनुपस्थिति में भारतीय गेंदबाजी बेहद कमजोर नजर आ रही है. अर्शदीप सिंह भी बुमराह के बिना आधे दिख रहे हैं और काफी रन लुटा रहे हैं. रांची में खेले गए सीरीज के दूसरे मुकाबले में स्कोरबोर्ड पर 249 रन बनाने के बाद भी टीम इंडिया को हार झेलनी पड़ी. 9 गेंद रहते ही वेस्टइंडीज ने बाजी मार ली और T20I इतिहास का दूसरा सबसे सफल रन चेज किया.
भारत की मुश्किलें सिर्फ उनके बॉलिंग कॉम्बिनेशन तक ही सीमित नहीं हैं. उनकी फील्डिंग भी चिंता का विषय रही है. 2025 की शुरुआत से T20I में 'फुल मेंबर' टीमों के बीच भारत ने सबसे ज्यादा कैच छोड़े हैं, साथ ही उनसे काफी बार मिसफील्डिंग और रन-आउट के मौके चूकने जैसी गलतियां भी हुई हैं.
2025 से अब तक हुए T20I की बात करें तो 50 मैचों में भारत ने 79 कैच छोड़े हैं, 4 स्टंपिंग मिस की है और 95 रन आउट मिस किए हैं.