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Explained: क्या है नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025? जिसकी वजह से उड़ी BCCI की नींद, सुप्रीम कोर्ट से खौफ खा रहा दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन्स से पूछा है कि उन्हें इस कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए.

Written By Tarun Verma
Published: Sep 10, 2026, 02:46 PM IST | Updated: Sep 10, 2026, 03:14 PM IST
Image Credit: BCCI
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. हाल ही में भारत की सबसे बड़ी अदालत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की नींद उड़ा दी है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 को लेकर BCCI और स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन्स से बड़ा सवाल किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा है कि आखिर BCCI और सभी स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन्स को इस नए कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए? इस घटना के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

यह सवाल ऐसे समय उठा है जब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 लागू हो चुका है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सवाल से BCCI की कानूनी स्थिति और उसके कामकाज को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (8 सितंबर) को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे.

क्या है नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025?

खेल मंत्रालय ने इस साल मई में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 के तहत नए नियम जारी किए थे. इस कानून का मकसद भारत में खेल संस्थाओं के कामकाज को बेहतर तरीके से चलाने और खेल संस्थाओं के अंदर होने वाले विवादों के निपटारे के लिए एक व्यवस्था तैयार करना है. इस कानून के तहत नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड देश की राष्ट्रीय खेल संस्थाओं को मान्यता देगा और उन पर नजर रखेगा. खेल संस्थाओं को अपने कामकाज, पैसों के इस्तेमाल और आचार-व्यवहार से जुड़े तय नियमों का पालन करना होगा. अगर BCCI और स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन्स इस कानून के दायरे में आते हैं, तो उनके काम करने के तरीके में बड़े बदलाव हो सकते हैं. अधिकारियों का कार्यकाल, नियम-कायदे, कामकाज में पारदर्शिता और RTI के तहत जानकारी देने जैसे मामलों में नए नियम लागू हो सकते हैं. वहीं, BCCI का मौजूदा रुख बताता है कि वह इस कानून को अपने ऊपर लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है.

नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट मामले में क्या है BCCI का पक्ष?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने फिलहाल तो सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना कोई पक्ष नहीं रखा है, लेकिन इससे पहले एक दूसरे मामले में भारतीय बोर्ड ने अपना रुख साफ किया था. ओडिशा हाई कोर्ट में ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव से जुड़े मामले में BCCI ने कहा था कि नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट अभी क्रिकेट पर लागू नहीं होता. BCCI की दलील थी कि क्रिकेट को इस कानून के तहत लागू होने वाले डेजिग्नेटेड स्पोर्ट्स के तौर पर नोटिफाइड नहीं किया गया है. BCCI का लंबे समय से यह तर्क रहा है कि उसे सरकारी ग्रांट नहीं मिलता, इसलिए उसे इस कानून के दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए. इसके अलावा सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन ने मई में कहा था कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) RTI कानून के तहत ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं है. इसलिए BCCI को RTI के तहत जानकारी देना जरूरी नहीं है. इसका मतलब है कि संविधान के आर्टिकल 12 में बताए गए ‘स्टेट’ और RTI कानून की धारा 2(h) में बताए गए ‘पब्लिक अथॉरिटी’ दोनों में BCCI शामिल नहीं है. यही बात इस फैसले का मुख्य आधार बनी.

लोढ़ा कमेटी का गठन कब हुआ और उसकी क्या सिफारिश थी?

सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2015 को लोढ़ा कमेटी को नियुक्त किया था. दरअसल, IPL 2013 सट्टेबाजी मामले की जांच के बाद जस्टिस मुकुल मुद्गल कमेटी द्वारा नवंबर 2014 में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद लोढ़ा कमेटी का गठन किया गया था. लोढ़ा कमेटी का गठन सुप्रीम कोर्ट ने BCCI में सुधार के लिए किया था. इसका मकसद क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और एक ही व्यक्ति के लंबे समय तक सत्ता में बने रहने पर रोक लगाना था. लोढ़ा कमेटी ने 2016 में कई अहम सिफारिशें की थीं. लोढ़ा कमेटी चाहती थी कि BCCI कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में न रहे और उसका प्रशासन ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक हो.

लोढ़ा कमेटी की 9 बड़ी सिफारिशें

1. एक राज्य और एक वोट का फॉर्मूला

हर राज्य की सिर्फ एक क्रिकेट एसोसिएशन को BCCI में वोट देने का अधिकार देने की सिफारिश की गई थी. यानी एक राज्य से कई एसोसिएशनों के वोटिंग अधिकार को खत्म करने का सुझाव था.

2. 70 साल की उम्र के बाद पद नहीं

कमेटी ने साफ तौर पर सुझाव दिया था कि 70 साल से ज्यादा उम्र का कोई व्यक्ति BCCI या किसी राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में पदाधिकारी न बन सके. 

3. पद पर बने रहने की समय सीमा तय हो

क्रिकेट बोर्ड में कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही पद पर न बना रहे, इसके लिए कार्यकाल सीमित करने की सिफारिश की गई थी. एक कार्यकाल 3 साल का रखने और तय अवधि के बाद कूलिंग-ऑफ पीरियड रखने का सुझाव दिया गया था.

4. मंत्री और सरकारी अफसरों के लिए BCCI में जगह नहीं

केंद्रीय या राज्य सरकार के मंत्री और सरकारी अधिकारी BCCI या राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी न बनें, ऐसी सिफारिश की गई थी. मकसद क्रिकेट प्रशासन को राजनीतिक और सरकारी प्रभाव से दूर रखना था.

5. एक व्यक्ति के लिए एक पद का नियम

एक ही व्यक्ति एक समय में कई बड़े पदों पर काबिज न हो, इसके लिए नियम लागू करने का सुझाव दिया गया था.

6. BCCI के पैसों पर CAG की नजर

BCCI की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए CAG के प्रतिनिधि को शामिल करने की सिफारिश की गई थी. इससे बोर्ड के वित्तीय मामलों की निगरानी मजबूत करने का उद्देश्य था.

7. BCCI को RTI के दायरे में लाने की सिफारिश

लोढ़ा कमेटी ने BCCI को RTI के तहत लाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी. इससे आम लोग बोर्ड के कामकाज और उससे जुड़ी जानकारी मांग सकें, ऐसा उद्देश्य था.

8. खिलाड़ियों को भी मिले अपनी बात रखने का मंच

कमेटी ने खिलाड़ियों के हितों और उनकी आवाज को मजबूत करने के लिए प्लेयर्स एसोसिएशन बनाने की सिफारिश की थी. यानी क्रिकेट प्रशासन में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया था.

9. BCCI और IPL का प्रशासन अलग हो

लोढ़ा कमेटी ने BCCI और IPL के प्रशासनिक कामकाज को अलग रखने का सुझाव दिया था. इसका मकसद दोनों संस्थाओं की जिम्मेदारियों और कामकाज में ज्यादा स्पष्टता लाना था.

BCCI का मैनेजिंग और वर्किंग स्ट्रक्चर क्या है?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भारत में क्रिकेट के संचालन की सबसे बड़ी संस्था है. टीम इंडिया से लेकर घरेलू क्रिकेट, वित्तीय फैसलों और IPL तक, क्रिकेट से जुड़े कई अहम मामलों की जिम्मेदारी BCCI के पास है. BCCI की जनरल बॉडी में देश के क्रिकेट एसोसिएशन शामिल होते हैं. यह बोर्ड के सबसे महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली संस्था है. जनरल बॉडी BCCI की नीतियों और बड़े वित्तीय मामलों पर फैसला करती है, पदाधिकारियों का चुनाव करती है और बजट के साथ-साथ ऑडिट किए गए खातों को मंजूरी देती है. BCCI के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासन को चलाने में एपेक्स काउंसिल की अहम भूमिका होती है. BCCI के संविधान के मुताबिक इसमें कुल 9 सदस्य होते हैं. इनमें प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी और ट्रेजरर के अलावा जनरल बॉडी का एक प्रतिनिधि शामिल होता है.

इसके साथ ही इंडियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन (ICA) की ओर से एक पुरुष और एक महिला प्रतिनिधि को शामिल किया जाता है. कॉम्पट्रोलर और ऑडिटर जनरल (CAG) का एक नॉमिनी भी एपेक्स काउंसिलका हिस्सा होता है. मौजूदा एपेक्स काउंसिल की कमान BCCI प्रेसिडेंट मिथुन मन्हास के पास है. BCCI के बडे पदों पर मिथुन मन्हास (प्रेसिडेंट), राजीव शुक्ला (वाइस प्रेसिडेंट), देवजीत सैकिया (सेक्रेटरी), प्रभतेज भाटिया (जॉइंट सेक्रेटरी) और ए. रघुराम भट (ट्रेजरर) काबिज हैं. इन पदाधिकारियों का चुनाव सितंबर 2025 में हुई BCCI की 94वीं सालाना आम बैठक (AGM) में हुआ था.

BCCI का काम सिर्फ चुने हुए पदाधिकारियों तक सीमित नहीं है. बोर्ड के पास एक प्रोफेशनल एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम भी है, जो क्रिकेट के रोजमर्रा के संचालन को संभालता है. इसमें क्रिकेट ऑपरेशन्स, फाइनेंस, कानूनी मामले, मीडिया, मार्केटिंग, घरेलू क्रिकेट और इंटरनेशनल क्रिकेट समेत कई अहम विभाग शामिल हैं. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नीति बनाने का काम गवर्निंग बॉडी के पास रहे, जबकि उसके अमल और रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी प्रोफेशनल मैनेजमेंट संभाले.

BCCI के पूरे ढांचे में इंडियन प्रीमियर लीग के लिए अलग गवर्निंग काउंसिल बनाई गई है. यह IPL से जुड़े प्रशासनिक और ऑपरेशनल मामलों को देखती है. आईपीएल, गवर्निंग काउंसिल लीग के नियमों, नीलामी और प्रतियोगिता से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण फैसलों पर काम करती है. मौजूदा आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता अरुण सिंह धूमल करते हैं. इसमें BCCI के अधिकारी, CAG के नॉमिनी और इंडियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन (ICA) का प्रतिनिधि भी शामिल होता है.

BCCI की कुल नेटवर्थ कितनी है?

BCCI की अनुमानित नेटवर्थ करीब 2.2 अरब डॉलर यानी लगभग 18,760 करोड़ रुपये है. इस आंकड़े के साथ BCCI दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बना हुआ है. BCCI की मजबूत आर्थिक स्थिति के पीछे कई बड़े सोर्स हैं. इनमें मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप, इंटरनेशनल क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सबसे अहम हैं. खास तौर पर IPL ने भारतीय क्रिकेट के कमर्शियल मॉडल को नई ऊंचाई दी है. BCCI की कमाई का सबसे बड़ा आधार IPL को माना जाता है. 2023-27 के IPL मीडिया राइट्स की डील 6.2 अरब डॉलर से ज्यादा में हुई थी. इस भारी-भरकम रकम ने दिखाया कि भारत में क्रिकेट की टीवी और डिजिटल ऑडियंस की बाजार में कितनी बड़ी कीमत है.

मीडिया राइट्स के अलावा BCCI को स्पॉन्सरशिप, टिकट बिक्री, मर्चेंडाइज, इंटरनेशनल क्रिकेट राइट्स और ICC की कमाई में हिस्सेदारी से भी बड़ी रकम मिलती है. भारत में क्रिकेट देखने वालों की विशाल संख्या की वजह से ब्रॉडकास्टर्स और स्पॉन्सर्स भारतीय क्रिकेट से जुड़ने के लिए प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं. महिला क्रिकेट के बढ़ते बाजार ने भी BCCI के कमर्शियल नेटवर्क को मजबूत किया है. विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के आने से भारतीय क्रिकेट के पास एक और बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टी जुड़ गई है. इससे महिला क्रिकेट को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ BCCI के कारोबारी दायरे का भी विस्तार हुआ है. BCCI की आर्थिक ताकत का अंदाजा दूसरे क्रिकेट बोर्ड की तुलना से लगाया जा सकता है. नेटवर्थ के मामले में BCCI के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (करीब 79 मिलियन डॉलर), इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (करीब 59 मिलियन डॉलर) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (करीब 55 मिलियन डॉलर) का नाम आता है.

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About the Author

तरुण वर्मा ज़ी न्यूज़ हिंदी डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं. तरुण वर्मा फरवरी 2021 से ज़ी न्यूज का हिस्सा हैं. तरुण वर्मा किसी भी मैच का बारीकी से विश्‍लेषण करने में माहिर हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी ख़बरों के विभिन्न एंगल्स पर साइड स्टोरीज़ करने के अलावा खिलाड़ियों पर स्‍पेशल पैकेजेस बनाने में बहुत रुचि है. क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी ज़ी न्यूज़ के पाठकों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी तरुण वर्मा बख़ूबी निभाते हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट खेलने, किताबें पढ़ने और घूमने का बहुत शौक है. तरुण वर्मा साल 2016 में गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज का इंटरव्यू कर चुके हैं. तरुण वर्मा खेलों के कई बड़े-बड़े इवेंट्स को कवर करने का अनुभव रखते हैं. ज़ी न्यूज़ से जुड़ने से पहले तरुण वर्मा इंडिया टुडे ग्रुप मीडिया (Aajtak.in) संस्थान का भी हिस्सा रह चुके हैं. आप Tarun.Verma@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. तरुण वर्मा एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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