)
एशियन गेम्स 2026 में अफगानिस्तान की फरीबा हाशिमी ने अपने करिश्मे से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में महिला रोड रेस कॉम्पिटीशन में फरीबा हाशिमी ने सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. वह साल 2002 के बाद एशियन गेम्स में अफगानिस्तान के लिए मेडल जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी हैं. उनका यह मेडल सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि मुश्किल हालात से लड़कर अपने सपने को पूरा करने की कहानी भी है.
23 साल की फरीबा हाशिमी ने मेडल जीतने के बाद अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने अहसास को शब्दों में बयां नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने बताया कि वह ऐसे देश में पैदा हुईं, जहां अपने सपने देखने वाली महिलाओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. फरीबा हाशिमी को उम्मीद है कि उनकी कहानी अफगानिस्तान की अगली पीढ़ी की लड़कियों को अपने सपनों के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी.
फरीबा हाशिमी के लिए साइकिलिंग का सफर बिल्कुल आसान नहीं था. किशोरावस्था में जब वह अफगानिस्तान के फरयाब प्रांत में साइकिल चलाती थीं, तब उन पर पत्थर फेंके गए और कांच की बोतलें तक फेंकी गईं, लेकिन इन मुश्किलों ने उनका हौसला नहीं तोड़ा और उन्होंने साइकिलिंग को अपना करियर बनाने का फैसला जारी रखा.
फरीबा हाशिमी ने 2017 में प्रतिस्पर्धी साइकिलिंग शुरू की थी. उनकी बड़ी बहन युलदुज हाशिमी भी उनके साथ साइकिलिंग करती थीं. दोनों बहनें गुपचुप तरीके से ट्रेनिंग के लिए निकलती थीं. वे सिर पर स्कार्फ, मास्क और सनग्लास पहनती थीं और कई बार पुरुषों के कपड़े पहनकर अपनी पहचान छिपाती थीं. यहां तक कि वे लोगों का ध्यान बचाने के लिए नकली नामों का इस्तेमाल भी करती थीं.
कुछ समय बाद स्थानीय मीडिया को दोनों बहनों की ट्रेनिंग के बारे में पता चल गया. फरीबा हाशिमी ने बताया कि फरयाब में किसी ने सोचा भी नहीं था कि महिलाएं साइकिल चलाएंगी. शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह छोटी-सी बात होगी, लेकिन उनकी साइकिलिंग ने पूरे इलाके में चर्चा पैदा कर दी. फरीबा हाशिमी ने बताया कि वह ट्रेनिंग के लिए अक्सर पुरुषों का भेष धारण करती थीं.
2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद फरीबा हाशिमी को अपना देश छोड़ना पड़ा. अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. लड़कियों के लिए माध्यमिक शिक्षा पर रोक, सार्वजनिक जीवन में कई तरह की पाबंदियां और संगठित खेलों में महिलाओं की भागीदारी पर प्रतिबंध ने उनके अवसरों को बेहद सीमित कर दिया है.
फरीबा हाशिमी ने अपने सिल्वर मेडल को अफगान महिलाओं के संघर्ष और मजबूती का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि यह मेडल दिखाता है कि अफगान महिलाएं कितनी मजबूती से मुश्किलों का सामना कर सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह अकेली नहीं हैं और दुनिया के कई देशों की लाखों महिलाएं भी अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रही हैं.
तालिबान के सत्ता में लौटने के कुछ ही दिनों बाद फरीबा और उनकी बहन युलदुज अफगानिस्तान से निकलकर इटली पहुंचीं. इस सफर में इटली की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन साइकिलिस्ट अलेसांद्रा कैपेलोटो ने उनकी मदद की. इसके बाद दोनों बहनों ने इटली में पेशेवर रोड साइकिलिस्ट के तौर पर अपना करियर आगे बढ़ाया. 2023 में ग्लासगो में आयोजित UCI वर्ल्ड चैंपियनशिप में फरीबा और युलदुज ने तालिबान की वापसी के बाद पहली बार अफगानिस्तान की महिला प्रतिनिधियों के तौर पर हिस्सा लिया.
इसके एक साल बाद दोनों ने 2024 पेरिस ओलंपिक की महिला रोड रेस में भी हिस्सा लिया. इस तरह दोनों बहनों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व जारी रखा. एशियन गेम्स में फरिबा के पास दूसरे कई साइकिलिस्टों की तरह पूरी सपोर्ट टीम नहीं थी. उन्होंने बताया कि उनके साथ राष्ट्रीय महासंघ की ओर से सिर्फ एक व्यक्ति था, जो कार चला रहा था. अपनी साइकिल की मरम्मत से लेकर उसकी सफाई तक का काम उन्हें खुद करना पड़ा. रेस के दौरान जब उनकी साइकिल में तकनीकी समस्या आई, तब जापानी टीम ने उनकी मदद की और साइकिल को ठीक किया.
एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बाद फरीबा की नजर अब 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक पर है. उनका लक्ष्य एक बार फिर ओलंपिक में हिस्सा लेना है. उनकी कहानी बताती है कि खेलों में उपलब्धि सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई बार किसी खिलाड़ी का सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद और प्रेरणा भी बन जाता है.