Asian Para Games 2026: पैरा जूडो में भारत को मिला मेडल, कपिल परमार ने जीता ब्रॉन्ज, 69 सेकंड में विरोधी को किया चित
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के कपिल परमार ने जूडो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. पेरिस पैरालंपिक के मेडलिस्ट ने सिर्फ 69 सेकंड में इंडोनेशिया के खिलाड़ी को हराया.
भारत के कपिल परमार ने सोमवार को एशियन पैरा गेम्स 2026 में मेंस J1 -70kg पैरा-जुडो इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. ब्रॉन्ज मेडल मैच में उन्होंने इंडोनेशिया के शिदकी राफली अहनाफ को सिर्फ 69 सेकंड में 'इप्पोन' से हराया. पेरिस पैरालंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले कपिल परमार का यह एशियन पैरा गेम्स में दूसरा मेडल है. इससे पहले 2023 में हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था. कपिल परमार का यह ब्रॉन्ज मेडल, एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का तीसरा मेडल है और पैरा-जुडो में देश का पहला मेडल है. इससे पहले, टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में कपिल परमार ने मंगोलिया के बातरसुरेन बाट-एर्देने को 'गोल्डन स्कोर' के दौरान 4 मिनट 53 सेकंड में 'इप्पोन' से हराकर अगले दौर में जगह बनाई थी.
मेडल जीतने के बाद, कपिल परमार ने अपनी उपलब्धि पर खुशी जताई, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे गोल्ड मेडल जीतने के इरादे से उतरे थे. कपिल परमार ने मीडिया से कहा, 'मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं. काफी समय बाद मैंने कोई मेडल जीता है. मैंने बहुत कड़ी मेहनत की है. मेरे कोच ने भी मुझ पर बहुत मेहनत की है. मैं गोल्ड मेडल की तैयारी के साथ आया था, लेकिन आज मेरा दिन या मेरी किस्मत साथ नहीं थी, इसलिए मुझे ब्रॉन्ज मेडल मिला. सभी भारतीयों का बहुत-बहुत धन्यवाद. TOPS (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) और SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का बहुत-बहुत धन्यवाद. सभी को धन्यवाद. OGQ (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट) का भी धन्यवाद. बहुत-बहुत धन्यवाद, भारत.'
कपिल परमार ने जीता ब्रॉन्ज
कपिल के कोच, मुनव्वर अंजार ने बताया कि परमार के लिए यह मेडल बहुत मायने रखता है, क्योंकि हाल के महीनों में उन्हें कई निजी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, जिसमें उनकी मां की खराब तबीयत भी शामिल थी. मुनव्वर अंजार ने कहा, 'कपिल परमार के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतना बहुत जरूरी था. उन्होंने पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता है, लेकिन इसके बाद कुछ ऐसी स्थितियां बनीं, जब घर पर उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी. इस वजह से वह काफी टूट गए थे, मानसिक रूप से भी, लेकिन मैंने उनसे कहा कि उन्हें यह मेडल अपनी मां को समर्पित करना चाहिए और आज उन्होंने ऐसा ही किया. सबसे बड़ी बात यह है कि हमें मेडल मिला और हमें ब्रॉन्ज मेडल मिला है, जिसके सहारे हम आने वाले पैरालंपिक के लिए बहुत कड़ी तैयारी करेंगे.'
कपिल परमार की आंखों की रोशनी चली गई
कपिल परमार ने इससे पहले पेरिस पैरालंपिक 2024 पैरा गेम्स में इतिहास रच दिया था. वह पैरालंपिक मेडल जीतने वाले भारत के पहले जूडोका (judo athlete) बन गए थे, जिन्होंने मेंस J1 -60kg कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. टैक्सी ड्राइवर के बेटे कपिल परमार की बचपन में ही आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती चली गई. 9 साल की उम्र में अपने गांव के खेतों में पानी के पंप से पानी निकालते समय उन्हें बिजली का जोरदार झटका लगा था.
गांव के ही एक व्यक्ति ने उन्हें बेहोशी की हालत में पाया, जिसके बाद उन्हें भोपाल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. वे छह महीने तक कोमा में रहे, और उसके बाद बहुत धीरे-धीरे और काफी तकलीफ सहते हुए ठीक हुए. एक इंटरव्यू में कपिल परमार ने बताया, 'जब मैं कोमा से बाहर आया और ठीक होने लगा, तो डॉक्टर ने मुझे कुछ शारीरिक गतिविधियां करने की सलाह दी ताकि मेरा वजन बढ़ सके. मुझे पता ही नहीं चला कि मेरा वजन कैसे बढ़ गया. मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं पैरालंपिक में मेडल जीतूंगा.'