Asian Games 2026: मनु भाकर और पीवी सिंधु सहित भारत के 10 बड़े मेडल दावेदार, रिकॉर्ड्स बताते हैं क्यों हैं खास
एशियन गेम्स 2026 में भारत की नजर हांगझोउ के 107 मेडल के रिकॉर्ड को बेहतर करने पर होगी. मनु भाकर, सिफत कौर समरा, पीवी सिंधु, सात्विक-चिराग, अमन सहरावत, मीराबाई चानू, लवलीना बोरगोहेन, ज्योति याराजी और अविनाश साबले से बड़ी उम्मीदें हैं. वहीं पुरुष और महिला क्रिकेट टीमें अपने गोल्ड मेडल का बचाव करने उतरेंगी. नीरज चोपड़ा चोट के कारण बाहर हैं.
Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत का कद पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. 2014 में 57 और 2018 में 69 मेडल जीतने के बाद भारत ने हांगझोउ एशियन गेम्स में इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड 107 मेडल अपने नाम किए थे. इनमें 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज शामिल थे. अब आइची-नागोया 2026 में भारतीय दल की नजर इस रिकॉर्ड को और बेहतर करने पर है. इस बार भारत के पास शूटिंग, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कुश्ती, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग और क्रिकेट में कई मजबूत दावेदार हैं.
हालांकि सबसे बड़ा झटका 3 सितंबर को लगा, जब स्टार जैवलिन एथलीट नीरज चोपड़ा ने चोट के कारण एशियन गेम्स से नाम वापस ले लिया. वो लगातार तीसरे एशियन गेम्स गोल्ड के लक्ष्य में थे, लेकिन अब उनकी जगह यशवीर सिंह को टीम में शामिल किया गया है. आइए उन 10 नामों के बारे में जानते हैं, जिनसे 2026 एशियन गेम्स में मेडल लाने की पूरी उम्मीद है. इसमें भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीम भी शामिल हैं.
1. मनु भाकर - शूटिंग
पेरिस ओलंपिक में दो मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली मनु भाकर भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीदों में हैं. वो 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल दोनों में उतरेंगी. पेरिस 2024 में वो एक ही ओलंपिक में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनी थीं.
एशियन गेम्स में शूटिंग हमेशा भारत का मजबूत क्षेत्र रहा है और इस बार 30 सदस्यीय टीम में मनु के अलावा ईशा सिंह और सुरुचि जैसे नाम भी हैं. यानी मनु के पास व्यक्तिगत के साथ टीम इवेंट में भी मेडल जीतने का मौका होगा.
2. सिफत कौर समरा - शूटिंग
सिफत कौर समरा के नाम ऐसा रिकॉर्ड है जो उन्हें सीधे गोल्ड की दावेदारों की सूची में खड़ा करता है. हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्होंने महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3-पोजिशन में 469.6 अंक के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड जीता था. यह एशियन गेम्स में इस इवेंट का भारत का पहला व्यक्तिगत गोल्ड भी था. यानी सिफत के पास जापान में सिर्फ मेडल जीतने का नहीं, बल्कि अपने खिताब और रिकॉर्ड की विरासत को आगे बढ़ाने का मौका है.
3. पीवी सिंधु - बैडमिंटन
दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु इस बार भी भारतीय बैडमिंटन की सबसे बड़ी उम्मीदों में हैं. सिंधु के नाम ओलंपिक में सिल्वर और ब्रॉन्ज दोनों हैं. एशियन गेम्स में भी वो 2018 में महिला सिंगल्स का सिल्वर जीत चुकी हैं.
2026 की भारतीय टीम में सिंधु के अलावा युवा खिलाड़ी भी हैं, लेकिन बड़े टूर्नामेंट का अनुभव उन्हें सबसे अलग बनाता है. जापान में अगर सिंधु अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाती हैं तो वह फिर पोडियम तक पहुंच सकती हैं.
4. सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी - बैडमिंटन
भारतीय बैडमिंटन में अगर किसी जोड़ी से गोल्ड की सबसे ज्यादा उम्मीद है तो वह सात्विक-चिराग हैं. इस जोड़ी ने हांगझोउ में पुरुष डबल्स का गोल्ड जीता था और 2026 में वह अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगे.
भारत का पुरुष बैडमिंटन दल भी मजबूत है. पिछली बार टीम इवेंट में भारत ने सिल्वर जीता था और इस बार वही टीम बेहतर प्रदर्शन के इरादे से उतरेगी. हालिया चीन मास्टर्स में भी सात्विक-चिराग ने जीत के साथ क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई, जिससे उनकी मौजूदा प्रतिस्पर्धी क्षमता का अंदाजा मिलता है.
5. अमन सहरावत - कुश्ती
पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीतकर भारत के सबसे युवा ओलंपिक मेडलिस्ट बनने वाले अमन सहरावत 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत की बड़ी उम्मीद हैं. वो 21 साल और 24 दिन की उम्र में ओलंपिक मेडल जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बने थे.
अमन ने 2026 एशियन गेम्स के ट्रायल में भी अपनी कैटेगरी जीती और टीम में जगह बनाई है. पिछली बार भारतीय पहलवानों ने कुल छह मेडल जीते थे. एक सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज. ऐसे में अमन से इस बार मेडल का रंग बदलने की उम्मीद होगी.
6. मीराबाई चानू - वेटलिफ्टिंग
मीराबाई चानू के करियर में एक बड़ी कमी अभी भी बाकी है, वो है एशियन गेम्स का व्यक्तिगत मेडल. ओलंपिक में सिल्वर और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड की हैट्रिक लगा चुकीं चानू 49 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. हांगझोउ में वह चौथे स्थान पर रही थीं. टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर जीतने वाली मीराबाई चानू के नाम 49 किग्रा वर्ग में क्लीन एंड जर्क का 119 किग्रा वर्ल्ड रिकॉर्ड भी रह चुका है. इस बार एशियन गेम्स का मेडल जीतना उनके शानदार करियर का एक और बड़ा अध्याय होगा.
7. लवलीना बोरगोहेन - बॉक्सिंग
टोक्यो ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में भारत की सबसे अनुभवी पदक उम्मीदों में हैं. 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने बॉक्सिंग में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 7 गोल्ड समेत 10 मेडल जीते थे. लवलीना भी उस अभियान का हिस्सा थीं और सिल्वर जीत चुकी हैं. एशियन गेम्स के लिए वो 75 किग्रा वर्ग में उतरेंगी. ओलंपिक अनुभव और हालिया कॉमनवेल्थ प्रदर्शन उन्हें जापान में मजबूत दावेदार बनाते हैं.
8. ज्योति याराजी - एथलेटिक्स
महिलाओं की 100 मीटर हर्डल्स में ज्योति याराजी भारत की सबसे बड़ी ट्रैक एंड फील्ड उम्मीदों में हैं. हांगझोउ में उन्होंने 12.91 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता था. वो एक समय विवादित डिस्क्वालिफिकेशन के खतरे में थीं, लेकिन विरोध के बाद उनका ब्रॉन्ज सिल्वर में अपग्रेड हुआ.
2026 में लंबे ब्रेक के बाद ट्रैक पर वापसी करते हुए उन्होंने 13.14 सेकंड में एशियन गेम्स क्वालीफाइंग मार्क हासिल किया. अब उनके सामने पिछली बार के सिल्वर को गोल्ड में बदलने की चुनौती होगी.
9. अविनाश साबले - एथलेटिक्स
भारत की लंबी दूरी की दौड़ में अविनाश साबले एक बड़ा नाम बन चुके हैं. हांगझोउ में उन्होंने पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में 8:19.50 सेकंड के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता था. उसी गेम्स में उन्होंने 5000 मीटर में भी सिल्वर हासिल किया.
2026 में वो फिर स्टीपलचेज में उतरेंगे. चोटों से प्रभावित दौर के बाद उनकी वापसी हुई है, लेकिन पिछला एशियन रिकॉर्ड और गोल्ड उन्हें भारत के प्रमुख एथलेटिक्स दावेदारों में शामिल करता है.
10. भारतीय क्रिकेट टीमें
सबसे ज्यादा उम्मीदें क्रिकेट से है. भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमें पिछली बार गोल्ड जीत चुकी हैं और 2026 में अपने खिताब का बचाव करेंगी. पुरुष टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे और 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भी टीम में हैं. उनके साथ तिलक वर्मा, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह जैसे नाम मौजूद हैं. महिला टीम में हरमनप्रीत कौर कप्तान और स्मृति मंधाना उप-कप्तान हैं. यानी दोनों वर्गों में भारत के पास एशियन गेम्स का गोल्ड बचाने का मजबूत मौका है.
क्या भारत 107 मेडल का रिकॉर्ड तोड़ेगा?
भारत ने हांगझोउ में 107 मेडल जीतकर पहली बार 100 का आंकड़ा पार किया था. इस बार भी शूटिंग, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कुश्ती और बॉक्सिंग से बड़ी संख्या में पदक की उम्मीद है. क्रिकेट और कबड्डी में पुरुष तथा महिला दोनों टीमों के सामने गोल्ड बचाने की चुनौती है.
नीरज चोपड़ा का बाहर होना निश्चित रूप से भारत के गोल्ड मेडल अभियान के लिए बड़ा झटका है, लेकिन मनु भाकर, सिफत कौर, सिंधु, सात्विक-चिराग, अमन सहरावत, मीराबाई, लवलीना, ज्योति और साबले जैसे नाम बताते हैं कि भारत की पदक की उम्मीदें सिर्फ एक स्टार पर निर्भर नहीं हैं. आइची-नागोया में भारत के सामने असली लक्ष्य सिर्फ 100 के पार जाना नहीं, बल्कि हांगझोउ के 107 मेडल के रिकॉर्ड को चुनौती देना होगा.