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सामने रखी थाली का भोजन करना दूभर कर सकता है मातृ ऋण दोष! पितृ दोष की तरह देता है कष्‍ट, ये हैं लक्षण और उपाय

पितृ दोष तो सुना होगा लेकिन मातृ ऋण दोष कम लोग ही जानते हैं. जबकि मातृ ऋण दोष भी जिंदगी में भारी कष्‍ट देता है. यह दोष कैसे बनता है, इसके लक्षण क्‍या हैं और इससे कैसे निजात पा सकते हैं. मातृ नवमी पर जानिए ये सभी खास बातें.

Written ByShraddha Jain
Published: Oct 03, 2026, 11:53 AM IST|Updated: Oct 03, 2026, 11:57 AM IST
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सामने रखी थाली का भोजन करना दूभर कर सकता है मातृ ऋण दोष! पितृ दोष की तरह देता है कष्‍ट, ये हैं लक्षण और उपाय
Image Credit: मातृ ऋण दोष के उपाय, लक्षण और उपाय. (Photo: AI)

About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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पितृ पक्ष की नवमी पर महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है. यह तिथि माताओं और मातृशक्ति को समर्पित है. खासतौर पर सुहागिन महिलाओं को, यानी कि जिनका निधन पति के जीवित रहते हुआ हो. इस मौके पर हम मातृ ऋण दोष की बात करते हैं, जिसकी चर्चा ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में मिलती है. माता का ऋण धन या उपहार से नहीं चुकाया जा सकता है. उनकी सेवा, स्‍मरण और उनके नाम पर किए गए सत्‍कर्म ही इस ऋण से उबार सकते हैं. मातृ नवमी का दिन इसके लिए विशेष है.

मातृ ऋण क्‍या है?

लाल किताब के अनुसार, जब चौथे भाव में केतु स्थित हो तो व्यक्ति के ऊपर मातृऋण होता है. चौथे भाव का स्थायी स्वामी चन्द्रमा को माना गया है, जिसका संबंध मां और मामा पक्ष से होता है. इस घर में केतु आए तो भाव दूषित हो जाता है और व्‍यक्ति मातृऋण से प्रभावित हो जाता है.

मातृ ऋण दोष के लक्षण

लाल किताब के अनुसार, मातृ ऋण के लक्षण धन, स्त्रियों, भोजन आदि से जुड़े होते हैं.

- मातृ ऋण से पीडि़त व्‍यक्ति को समय पर कहीं से सहायता नहीं मिलती है. 
- ऐसे व्‍यक्ति की जमापूंजी भी व्‍यर्थ में खर्च हो जाती है. उस पर कर्ज हो जाता है. 
- घर की शांति भंग हो जाती है. ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि वह सामने रखी थाली का भोजन भी सुख से नहीं कर पाता है. यानी कि जैसे ही वह खाना खाने बैठता है झगड़ा-क्‍लेश हो जाता है

मातृ ऋण दोष से मुक्ति के उपाय

- यदि कुंडली में मातृ ऋण दोष का संकेत मिले तो ऐसे में घर का हर सदस्‍य बराबर-बराबर मात्रा में चांदी लेकर सोमवार के दिन नदी में बहा दे.
- चंद्रमा की शांति करना भी मातृ ऋण दोष में कमी लाता है, इसके लिए भगवान शिव की उपासना करें. 
- मातृ नवमी पर श्राद्ध करके परिवार की दिवंगत महिलाओं के प्रति श्रद्धा-सम्‍मान व्‍यक्‍त करें. 
- उनके नाम से अनाज दान करें. 
- सबसे महत्‍वपूर्ण बात किसी भी महिला का अपमान न करें.

(Disclaimer: मातृ ऋण और उससे जुड़े लक्षण-उपाय ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. अलग-अलग परंपराओं में इसकी व्याख्या अलग हो सकती है. इसे वैज्ञानिक तथ्य या किसी समस्या का निश्चित कारण न माना जाए.)

 

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