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ग्रहों की चाल में होने वाला बदलाव देश-दुनिया पर असर डालता है और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर इसकी भविष्यवाणियां की जाती हैं. अक्टूबर महीने का अंत इस समय खासी चर्चा में है क्योंकि तारामंडल का सबसे बड़ा ग्रह गुरु 31 अक्टूबर 2026 को गोचर कर रहा है और कर्क से निकलकर सिंह राशि में जाएगा. इससे मंगल-गुरु की युति टूट जाएगी और मंगल बेलगाम हो जाएंगे. ज्योतिषाचार्य आशंका जता रहे हैं कि 12 नवंबर 2026 तक मंगल अपनी नीच की राशि कर्क में रहकर देश-दुनिया में उत्पात मचा सकते हैं.
अभी मंगल के साथ गुरु का होना उसे प्रोटेक्शन दे रहा है, जिसका उदाहरण हालिया विमान हादसा है, जिसमें भारतीय पायलट सुमित मच्छार ने अपना कर्तव्य निभाते हुए साहस दिखाया और जान पर खेलकर डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की जान बचाई. ज्योतिष की नजर से देखें तो यहां गुरु ने उन्हें कर्तव्य पूरा करने की प्रेरणा दी और मंगल ने साहस दिया.
गुरु ग्रह ज्ञान, विस्तार, धर्म, कानून, शिक्षा, सलाह, समृद्धि और मार्गदर्शन के कारक हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर 12:50 बजे गुरु ग्रह कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में निकलें. कर्क राशि में गुरु उच्च के और मंगल नीच के होते हैं. यह गुरु का पॉवर ही है जो 18 सितंबर 2026 से कर्क में आए मंगल को संभाले हुए है. लेकिन 31 अक्टूबर को गुरु के बाहर निकलते ही मंगल अकेले नीच राशि कर्क में होंगे. मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, युद्ध, भूमि, सेना, कार्रवाई, आक्रामकता और संघर्ष से संबंधित हैं. ऐसे में 31 अक्टूबर से बन रहे नए समीकरण देश-दुनिया पर भारी पड़ सकते हैं.
ज्योतिषाचार्य इंदुबाला शर्मा कहती हैं कि नीच राशि कर्क में बैठे मंगल वैसे ही अशुभ होते हैं क्योंकि मंगल अग्नि तत्व वाले ग्रह हैं और कर्क चंद्रमा के स्वामित्व वाली जल तत्व राशि है. आग का पानी में आना, आग को भले ही थोड़ा ठंडा कर दे लेकिन पानी में तबाही मचाती है. ऐसे में मंगल देश-दुनिया में समुद्री, नदी से जुड़ी दुर्घटनाएं करवा सकता है. पानी में युद्ध हो सकते हैं.
ज्योतिषाचार्य इंदुबाला शर्मा कहती हैं कि बात मंगल अकेले के कष्ट देने और उत्पात मचाने की नहीं है. यहां कुंभ राशि में बैठे राहु पर उनकी आठवी दृष्टि भी पड़ रही है, जो अशुभ मानी जाती है. मंगल राहु का संबंध अंगारक योग बना रहा है. ऐसे में मंगल की राहु पर आठवी दृष्टि भी आंशिक अंगारक योग बना रही है.
यह योग युद्ध, हिंसा, आग या आग से जुड़ी घटनाओं का कारक है. मौसम बिगड़ सकता है. आर्थिक स्थिरता आ सकती है. दुर्घटना/संघर्ष बढ़ सकता है.
ज्योतिष के अनुसार, ग्रह राशि परिवर्तन के 15 दिन पहले से असर दिखना शुरू कर देते हैं. ऐसे में 20-25 अक्टूबर से लेकर 12-15 नवंबर तक का समय थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
- इस दौरान लोगों की इमोशंस गड़बड़ा सकते हैं, बेहद भावुक होकर आप गलत निर्णय ले सकते हैं.
- कुछ लोगों में गुस्सा बढ़ सकता है.
- वाहन चलाते समय सावधान रहें.
- किसी से विवाद न करें. वरना बाद में पछतावा हो सकता है.
(Disclaimer: इस खबर में दी गई देश-दुनिया से जुड़ी आशंकाएं ज्योतिषीय गणनाओं और विशेषज्ञों की मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी न माना जाए. वास्तविक घटनाओं का पूर्वानुमान केवल ग्रहों की स्थिति के आधार पर नहीं किया जा सकता.)