आसान वास्तु उपाय: फ्लैट में रहते हैं, वास्तु के प्रमुख नियमों का ही नहीं हो पा रहा पालन? ये उपाय चुटकियों में हल करेंगे समस्या
फ्लैट में वास्तु के सभी नियमों का पालन कर पाना हर बार संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में बिना तोड़-फोड़ के आसान वास्तु उपाय करके भी वास्तु दोष दूर किए जा सकते हैं. जानिए ये आसान उपाय.
बना हुआ घर खरीदना या फ्लैट लेना अब जरूरत बन चुका है, लेकिन वह वास्तु के नियमों के अनुरूप बना हो, यह जरूरी नहीं है. ऐसे में अपने आशियाना से वास्तु दोष दूर करने के उपाय कर लें, ताकि घर के लोग खुश, समृद्ध और स्वस्थ रहें. लेकिन फ्लैट में तोड़-फोड़ कर पाना भी हर बार संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में लोगों को उन वास्तु उपायों को अपनाने की जरूरत होती है, जिन्हें आसानी से बिना तोड़-फोड़ के अपनाया जा सके. जानिए फ्लैट में भी किन वास्तु दोषों से बचना चाहिए और यदि वे हैं तो उनसे कैसे बचें.
प्रमुख 5 वास्तु दोष और उनसे बचने के आसान उपाय
मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में रहते हुए यदि वास्तु के कुछ नियमों का पालन न हो पाए तो उनसे बचने के लिए बताए गए उपाय आजमा सकते हैं.
1. मुख्य द्वार की दिशा : वास्तु नियमों के अनुसार, घर का मुख्य दरवाजा उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है. ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करे, लेकिन मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में हर फ्लैट का दरवाजा इन दिशा में बनाना संभव नहीं होता है. ऐसे में घबराएं नहीं एक उपाय कर लें.
मुख्य द्वार का वास्तु दोष दूर करने का उपाय - फ्लैट का मुख्य द्वार बताई गई दिशा में न हो तो रोजाना घर के बाहर दरवाजे पर ऊपर की ओर स्वास्तिक या ॐ का चिह्न लगाएं रोली से बनाएं. साथ ही सुनिश्चित करें कि गेट पर भरपूर रोशनी हो और वहां कभी भी गंदगी न रहे. न ही गेट के पास डस्टबिन आदि रखें. साथ ही फ्लैट की उत्तर-पूर्व दिशा में कोई इनडोर प्लांट रख लें.
2. घर में किचन की दिशा : वास्तु के अनुसार घर में किचन दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में होना चाहिए. लेकिन फ्लैट में किचन इसी दिशा में हो ये जरूरी नहीं है. जबकि गलत दिशा में बना रसोई घर कई मुसीबतें देता है.
किचन का वास्तु दोष दूर करने के उपाय- यदि किचन दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में न हो तो किचन के अंदर चूल्हा इस तरह रख लें कि खाना पकाते समय मुख पूर्व दिशा में हो. साथ ही चूल्हा के ठीक बगल में पानी न रखें, न सिंक बनाएं. आग-पानी का साथ में होना बड़ा वास्तु दोष पैदा करता है.
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3. सोने का कमरा : मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) दिशा में होना चाहिए. साथ ही बेडरूम इस तरह होना चाहिए कि सोते समय सिर दक्षिण दिशा में हो, लेकिन हर कमरे की सेटिंग ऐसी स्थिति में हो ये जरूरी नहीं है.
बेडरूम का वास्तु दोष दूर करने का उपाय - भले ही बेड की सेटिंग चेंज न हो पाए लेकिन यदि बेड बड़ा है तो सोते समय आप सही दिशा में सिर करके सो सकते हैं. यदि तब भी दक्षिण दिशा में सिर न हो तो पूर्व दिशा में कर लें. लेकिन उत्तर दिशा में सिर करके न सोएं. साथ ही बेडरूम में कोई आइना न रखें.
4. टॉयलेट : टॉयलेट घर में कहीं भी हो लेकिन ईशान कोण में या घर के बीचों-बीच यानी कि ब्रह्मस्थान में कतई नहीं होनी चाहिए. वरना घर में खूब लड़ाई-झगड़े होते हैं.
टॉयलेट का वास्तु दोष दूर करने का उपाय - टॉयलेट-बाथरूम गलत जगह पर बने हों तो उनके अंदर कांच की कटोरी में सेंधा नमक भरकर रख दें. हर दिन में ये नमक फेंकें, कटोरी धोएं और फिर उसे सुखाकर फिर से नया नमक भरकर रख दें.
5. पूजा रूम : घर में पूजा का कमरा या मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. इसे बाथरूम के पास या दक्षिण दिशा में भूलकर भी न बनवाएं.
पूजा रूम का वास्तु दोष दूर करने का उपाय - पहले तो कोशिश करें कि घर का मंदिर भले ही छोटा हो लेकिन सही दिशा में हो. या फिर इस तरह हो कि पूजा करने वाले का मुख पूर्व की ओर हो. यदि ऐसा संभव न हो पाए तो पूजा के कमरे की छत या दीवार पर तांबे की प्लेट से बना वास्तु दोष निवारण का यंत्र लगाएं. साथ ही घर में सुबह-शाम देसी घी का दीपक, कपूर आदि जलाएं.
6. बालकनी और खिड़कियां : बालकनी और खिड़कियां सिर्फ वेंटिलेशन के लिए नहीं होती हैं, ये घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने का जरिया भी होती हैं. बालकनी और बड़ी खिड़कियां उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए ताकि सुबह की ताजी हवा और सकारात्मक सूर्य की किरणें घर में आ सकें. यदि ऐसा न हो तो गड़बड़ हो जाता है.
बालकनी का वास्तु दोष दूर करने के उपाय - यदि बालकनी दक्षिण या पश्चिम में है या इस दिशा में घर की सबसे बड़ी खिड़कियां बनी हैं तो वहां भारी गमले या पौधे रखें ताकि नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो सके. साथ ही बालकनी को हमेशा साफ रखें, वहां कबाड़ रखने की भूल न करें.
(Disclaimer: यह जानकारी वास्तु शास्त्र में बताई गई मान्यताओं पर आधारित है. इसके परिणाम व्यक्ति, स्थान और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसे निश्चित परिणाम या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लें.)