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बुध–शनि का षडाष्टक योग 9 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार के दिन दोपहर 02:22 बजे बनने जा रहा है. दरअसल, बुध तुला राशि में और शनि मीन राशि में रहेंगे. तुला से मीन छठी राशि हैं और मीन से तुला आठवीं में है, ऐसे में 6/8 का संबंध बनता है. षडाष्टक योग कुछ घंटे से लेकर कुछ दिन तक सक्रिय रह सकता है. हालांकि किसी भी योग या ग्रहों के गोचर का प्रभाव वास्तविक रूप से शुभ होगा या अशुभ यह लग्न, ग्रहों के भावाधिपत्य, जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनकी दशा के आधार पर तय होता है.
ज्योतिष शास्त्र की विशेष जानकार ज्योतिषाचार्य अनामिका सिंह बताती हैं कि 4 राशि के जातकों के लिए बुध-शनि का यह योग अशुभ फलदायी हो सकता है, जिससे इन राशि के जातकों के सोच-विचार से लेकर निर्णय लेने की क्षमता तक प्रभावित हो सकती है और मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है. आइए ज्योतिषाचार्य अनामिका सिंह से जानें ये 4 राशियां कौन सी हैं और इन पर बुध-शनि के षडाष्टक योग का क्या प्रभाव पड़ेगा.
मेष राशि के जातकों के लिए बुध-शनि का षडाष्टक योग शुभ सिद्ध नहीं होगा. साझेदारी और संबंधों में संवाद की कमी से दिक्कतें बढ़ सकती हैं. जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और गैरजरूरी खर्चों से मानसिक दबाव भी बढ़ा सकता है. व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय को जल्दबाजी में लेने से बचें.
कर्क राशि के जातकों के लिए बुध-शनि का षडाष्टक योग चुनौतियों से भरा समय ला सकता है. व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं में कमी आ सकती है. घर-परिवार और भविष्य की योजनाओं, उच्च शिक्षा या गुरुजनों से जुड़े विषयों के बीच संतुलन बना पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. जातक इस अवधि में मानसिक रूप से दो दिशाओं में खिंचाव महसूस कर सकते हैं.
बुध-शनि का षडाष्टक योग तुला राशि के जातकों के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. जातकों का आत्मविश्वास कम हो सकता है. निर्णय लेने की क्षमता पर कार्यक्षेत्र के दबाव का प्रभाव पड़ सकता है. छोटी-छोटी बातों को लेकर बहुत ज्यादा सोच-विचार करेंगे. जातकों को इस अवधि में मानसिक थकान महसूस हो सकता है.
मीन राशि के जातकों को बुध शनि का यह योग दबाव महसूस करा सकता है. जातकों को मानसिक स्तर पर यह योग अधिक प्रभावित करेगा. अनिश्चितता और अत्यधिक सोच-विचार बढ़ेगा. जिम्मेदारियों का दबाव और मानसिक तनाव महसूस कर सकते हैं. महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय सतर्क रहें, धन संबंधी मामलों में जल्दबाजी करने से जातकों को बचना चाहिए.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं एवं ग्रह गोचर की व्याख्याओं पर आधारित है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. किसी भी व्यक्ति पर ग्रह गोचर का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा, अंतर्दशा तथा अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.)