आखिर रात के समय क्यों बंद किए जाते हैं मंदिर के पट, क्या भगवान भी सोते हैं?
Hindu Temple Rituals: आखिर रात के समय मंदिर के कपाट क्यों बंद किए जाते हैं, क्या है इसके पीछे का सही कारण और क्या हमारे भगवान भी हमारी तरह सोते हैं? आइए इस लेख में विस्तार से जानेंगे.
क्या आपने कभी ये सोचा है कि रात के समय शयन आरती के बाद मंदिरों के पट को क्यों बंद कर दिया जाता है. क्या भगवान भी हमारी तरह नींद लेते हैं? यह सवाल हर भक्त के मन में कभी तो उठा ही होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन धर्म में मंदिर केवल पूजा स्थल होता है बल्कि ये मंदिर भगवान का साक्षात निवास स्थल होता है. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि मंदिर के कपाट रात के समय क्यों बंद किए जाते हैं, क्या भगवान भी सोते हैं?
रात के समय क्यों बंद किए जाते हैं मंदिर के पट
देवताओं के सम्मान
अगर रात के समय मंदिर के पट को बंद करने को धार्मिक मान्यताओं से जोड़े तो ध्यान देना होगा कि सनातन धर्म में मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है जिसके बाद से ही मंदिर में देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में रात में कपाट बंद कर ईश्वर तत्व को सम्मान और देवताओं को आराम का मौका दिया जाता है. मान्यता के अनुसार, रात के समय ही देवी-देवता विश्राम करते हैं. इसके बाद सुबह कपाट खोलकर फिर से देवी-देवताओं को स्नान, शृगार आदि कर उनकी पूजा की जाती है.
ऊर्जा का संचय
मान्यताओं के अनुसार, हर दिन पूजा-पाठ करने से मंदिर में आध्यात्मिक ऊर्जा बहुत अधिक होती है. ऐसे में रात के समय मंदिर के पट बंद कर इस ऊर्जा को मंदिर में करने की कोशिश की जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि रात के समय यह ऊर्जा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. वहीं जब भक्त सुबह पूजा के लिए मंदिर पहुंते हैं तो उन्हें दर्शन का पूरा-पूरा लाभ प्राप्त होता है. यही कारण है कि मंदिर में सुबह जल्दी से जल्दी जातक भगवान के दर्शन करने के लिए कहा जाता है.
साफ-सफाई और सुरक्षा
रात के समय मंदिर के पट को बंद करने के पीछे मंदिर की साफ-सफाई और सुरक्षा भी कारण है. कई मंदिरों में ऐसा नियम है कि दैनिक पूजा-पाठ और अनुष्ठान के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है और फिर वहां के पुजारी भगवान की प्रतिमा से लेकर मंदिर की साफ-सफाई करते हैं. इसके अलावा भी और कई काम करते हैं और अगले दिन की पूजा की पूरी व्यवस्था बनाते हैं. रात के समय मंदिर के कपाट बंद करने के पीछे एक कारम सुरक्षा भी है. मंदिर में स्थापित मूर्तियां मूल्यवान धातुओं से बनी होती हैं, भगवान के कीमती गहने होते हैं और कई और सामान भी मंदिर में रखे जाते हैं. ऐसे में मंदिर की सुरक्षा के लिए भी मंदिर के कपाट को बंद कर दिया जाता है.
कितनी बार मंदिर का पट होता है बंद?
अधिकांश हिंदू मंदिरों में नियम है कि हर दिन दो बार दोपहर और रात में पट बंद किए जाते हैं. दोपहर के समय पट बंद करने का मतलब है कि इस समय कुछ घंटों के लिए भगवान विश्राम करेंगे. इसके बाद पट खोले जाते हैं और रात को शयन आरती कर कपाट को बंद कर दिया जाता है. हालांकि, मंदिर के पट का बंद होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि तय मंदिर के नियम क्या है. क्यों कई जगहों पर मंदिरों के अपने नियम है जो अन्य मंदिरों से अलग हो सकत हैं.
क्या भगवान भी सोते हैं?
हिन्दू धर्म की मान्यताएं हैं कि भगवान सोते नहीं हैं. ऐसे में एक सावल ये उठता है कि जब भगवान सोते नहीं तो फिर मंदिरों के कपाट क्यों बंद किए जाते हैं. दरअसल मंदिर के पट को बंद करने की परंपरा को ईश्वर के प्रति श्रद्धा, सम्मान और सजीव रूप में उनकी सेवा करने से जोड़ा जाता है. ध्यान दें, प्राण-प्रतिष्ठित प्रतिमा में देवी-देवता का वास होता है. ऐसे में जिस तरह मनुष्य दिनभर के काम के बाद विश्राम करता है वैसे ही आदर-सम्मान देते हुए भी भगवान की शयन आरती कर उन्हें उनके मंदिर में विश्राम के लिए छोड़ दिया जाता है.
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, इसकी पुष्टि नहीं करता है)