आपने अपने लोकल में देखा होगा कि जब भी कोई लड़का पैदा होता है तो बहुत खुशी मनाई जाती है. जिसके लिए लोग तरह-तरह के परंपरा को फॉलो करते हैं.
घर में अगर लड़का पैदा होता है तो यूपी, बिहार में महिलाएं ढोलक की थाप के साथ सोहर गाना शुरू करती हैं.
अब ये कोई नॉर्मल गाना नहीं होता है. ये परिवार में नए सदस्य के आने की खुशी का उत्सव होता है. लेकिन आपके मन में हमेशा एक सवाल उठता होगा.
आखिर क्यों लड़के के पैदा होने पर ही सोहर क्यों गाया जाता है. लड़कियों के पैदा होने पर उस तरह का शोर-शराबा नहीं होता है, जैसे लड़को के पैदा होने पर होता है.
ऐसा होने के पीछे कहीं न कहीं हमारे समाज का दोष है. आपने अपने आस-पास देखा होगा की लोग लड़की होने पर ये जरूर बोल देते हैं कि लड़का होता तो ठीक होता.
दरअसल पहले के समय में लोग वंश बढ़ाने और अपने बुढ़ापे के सहारे के लिए लड़का ही पैदा करना चाहते थे.
समय के साथ इसका असर बस सिर्फ इंसानों की सोच पर ही नहीं हमारे लोक-साहित्य और गीतों पर भी पड़ने लगा. यही वजह है कि जब भी लड़का पैदा होता है तो उसे बहुत बड़े उत्सव की तरह मनाते हैं.
लड़के के आते हीं घर और आस-पास की महिलाएं एक साथ इकट्ठा होती हैं और सोहर गाती हैं. ऐसे ही ये हमारी परंपरा बन गई.
अब आप ये सोच रहे होंगे कि लड़कियों के पैदा होने पर कोई खुशी नहीं मनाता होगा, पर ऐसा नहीं है. लड़कियों के पैदा होने पर भी गीत गाया जाता था, और खुशी मनाई जाती थी.
लेकिन वो गाने बिल्कुल अलग हुआ करते थे. जैसे लड़कों के पैदा होने पर सोहर गाया जाता था जिसमें उल्लास, गर्व और बधाई का भाव होता था.
वहीं लड़की के पैदा होने पर शांत गीत गाया जाता है. कई बार गाने में आपको बेटी के पराए धन होने और भविष्य में उसकी विदाई के दर्द की झलक दिख जाएगी.
दरअसल दहेज प्रथा और बेटियों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता इस खुशी को कम कर देती थी. इसी वजह से लोग बेटी के पैदा होने पर उत्सव नहीं मनाते थे. वैसे अब ये चीजें धीरे-धीरे बदल रही है.
अब समय बदल चुका है. लोगों की सोच में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है. अब के लोग बेटे और बेटी में फर्क नहीं करते.
अब लड़की के पैदा होने पर भी उतनी ही खुशियां मनाते हैं जितना लड़के के पैदा होने पर मनाते थे. इतना ही नहीं अब तो पढ़े-लिखे लोगों के घर लड़कियों के पैदा होने पर सोहर भी गाया जाता है.
सोहर गीत गाने का असली मकसद घर में आई नई जिंदगी और मां बनने की खुशी का सम्मान करना होता है.
फिर चाहे वो लड़का चाहे लड़की दोनों ही भगवान के दिए हुए तोहफे होते हैं.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी भारतीय लोक-संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और लोक-साहित्य के विश्लेषकों की राय पर आधारित है. इसका उद्देश्य किसी भी सामाजिक मान्यता का अपमान करना नहीं है.