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भारत में चार धाम और कई पवित्र तीर्थ स्थल मौजूद हैं. लोग जीवन में पुण्य कमाने के लिए अलग-अलग धार्मिक जगहों पर जाते हैं. लेकिन शास्त्रों में लिखा है कि पुष्कर गए बिना हर धार्मिक यात्रा अधूरी रहती है.
महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखित पद्म पुराण की मानें तो पुष्कर को सभी तीर्थों का गुरु यानी तीर्थराज माना गया है. राजस्थान के अजमेर में बसा यह शहर धार्मिक आस्था और खूबसूरत पर्यटन स्थल है.
पद्म पुराण के सृष्टि खंड में पुष्कर की उत्पत्ति की एक बहुत सुंदर कथा के बारे में बताया गया है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा जी ने धरती पर एक यज्ञ करने के बारे में सोचा.
अब उनको सही जगह का चुनाव करना था. ऐसे में उन्होंने सही जगह चुनने के लिए अपने हाथ से एक कमल का फूल गिराया. वो फूल जिस जगह पर गिरा, वहां पानी का एक विशाल सरोवर बन गया.
कमल यानी पुष्प और हाथ यानी कर से मिलकर इस जगह का नाम पुष्कर पड़ा. यज्ञ के दौरान देवी सावित्री के समय पर न पहुंचने के कारण ब्रह्मा जी ने गायत्री माता से विवाह कर यज्ञ पूरा किया.

इसी बात से गुस्सा होकर देवी सावित्री ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया था कि पूरे संसार में केवल पुष्कर में ही उनकी मुख्य रूप से पूजा की जाएगी.
तीर्थों का राजा: पद्म पुराण में लिखा है कि व्यक्ति चाहे जितने भी बड़े धामों की यात्रा कर ले, जब तक वो पुष्कर सरोवर में स्नान नहीं करता है, तब तक उसे पूरा पुण्य नहीं मिलता है.
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व: कार्तिक महीने में शुक्ल एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक यहां ब्रह्मा जी का खास वास रहता है.
पापों का नाश: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाने से व्यक्ति के सभी कायिक, मानसिक पाप खत्म हो जाते हैं.
महा-आरती: इस पावन अवसर पर पुष्कर के 52 घाटों पर हजारों दीप जलाए जाते हैं और भव्य महा-आरती की जाती है.
1- अगर आप पुष्कर दर्शन और स्नान के लिए जा रहे हैं, तो कुछ नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. सरोवर के घाटों पर जाते समय चमड़े का सामान जैसे बेल्ट या पर्स बाहर ही उतार दें.
2- जल में साबुन लगाकर न नहाएं और न ही गंदगी फैलाएं. घाट पर पूजा करवाते समय अनजाने पंडितों के बहकावे में आकर अपनी क्षमता से ज्यादा दान-दक्षिणा का वादा न करें.
3- अपनी श्रद्धा अनुसार ही भक्ति भाव से दान करें. पुष्कर सरोवर के पास वराह मंदिर, रंगजी मंदिर और सावित्री माता के मंदिर के दर्शन करना भी बहुत शुभ माना जाता है.
पुष्कर के प्रसिद्ध कार्तिक मेले की बात करें तो ये इस साल नवंबर महीने में आयोजित होगा. धार्मिक मान्यताओं की मानें तो कार्तिक शुक्ल एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा (24 नवंबर 2026) तक यहां स्नान और दर्शन का खास महत्व माना जाता है.
इतना ही नहीं, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर के 52 घाटों पर शाम 6:00 बजे भव्य महा-आरती शुरू होती है. कहा जाता है कि, एक साथ यहां हजारों दीपों का दान किया जाता है.
मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु ध्यान रखें कि मुख्य ब्रह्मा मंदिर में सुबह 5:30 बजे की मंगला आरती और शाम 7:00 बजे की संध्या आरती के समय भीड़ सबसे अधिक रहती है.

दर्शन के लिए हमेशा लाइन में बने रहें और सरोवर के घाटों पर स्वच्छता का खास पालन करें. घाट परिसर में फोटोग्राफी और जूते-चप्पल ले जाना पूरी तरह वर्जित है, इसलिए इन नियमों का पालन करके अपनी यात्रा को सुगम और फलदाई बनाएं.
पुष्कर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा और इतिहास का एक अटूट हिस्सा है.
अगर आप अपनी धार्मिक यात्राओं को सफल और संपूर्ण बनाना चाहते हैं, तो पद्म पुराण में बताए गए नियमों के अनुसार एक बार पुष्कर तीर्थ के दर्शन और सरोवर स्नान जरूर करें.