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बाल कान्हा से हुई थी ऐसी 'बड़ी भूल'? जिसके बाद लगा था गो-हत्या का घोर पाप, जानिए श्याम कुंड का खौफनाक सच

इस खबर में हम आपको भगवान श्री कृष्ण के एक ऐसी गलती के बारे में बताएंगे, जिसके कारण से उनके ऊपर गो-हत्या का घोर पाप लग गया था. और उन्होंने कैसे इस पाप मुक्ति पाई थी इस बारे में भी डिटेल से जानेंगे.

Written By Harsh Singh
Published: Oct 03, 2026, 08:30 PM IST | Updated: Oct 03, 2026, 08:38 PM IST
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पौराणिक कथाओं में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के कई दिलचस्प कहानियां देखने को मिलती हैं. जब श्री कृष्ण छोटे थे तब वो नंद बाबा की गायों को जंगल घास चराने ले जाया करते थे.

उस समय मथुरा का राजा कंस, रोज-रोज नए राक्षस भेज दिया करता था. एक बार उसने एक अरिष्टासुर नाम के एक खूंखार राक्षस को वृंदावन भेजा था.

अब अपने दोस्तों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने उस राक्षस का अंत कर दिया था. लेकिन इसके बाद कान्हा जी पर गो-हत्या का पाप लग गया था.

आज हम इस खबर में ये जानेंगे कि ये पाप कान्हा को कैसे लगा था और इससे मुक्ति कैसे मिली थी.

कंस का भयानक षड्यंत्र और अरिष्टासुर का गो-रूप

राजा कंस ने जिस राक्षस को वृंदावन भेजा था वो भगवान के अपार शक्ति को अच्छे तरीके से जानता था. इसलिए उसने दिमाग लगाया और  सामने से हमला करने के बजाय छल का रास्ता चुना.

उसने अपना रूप बदलकर एक सांड का रख लिया था. उसके बाद वो जाकर जंगल में गायों के झुंड में शामिल हो गया. वो छिपकर काफी देर तक कान्हा पर हमला करने का इंतजार करता रहा.

लेकिन जब उसे काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी उसे हमला करने का मौका नहीं मिला तो उसने वहां के गाय चराने वाले बच्चों पर हमला करना शुरू कर दिया. वो कृष्ण के दोस्तों को चोट पहुंचाने लगा और उन्हें मारने की कोशिश करने लगा.

कान्हा का क्रोध और अरिष्टासुर का वध

जब श्री कृष्ण ने अपने दोस्तों को मुसीबत में देखा, तो वे सब समझ गए. कान्हा को तुरंत समझ में आ गया कि गाय के रूप में छिपा ये कोई साधारण जीव नहीं बल्कि कंस का भेजा राक्षस है.

इसके बाद भगवान कृष्ण ने बिना देर किए अरिष्टासुर की टांग पकड़ी और उसे हवा में घुमाकर जोर से जमीन पर पटक दिया.

कान्हा के इस भीषण प्रहार से उस राक्षस की मौके पर ही मौत हो गई. इस तरह श्री कृष्ण ने अपने सभी दोस्तों को उस भयानक संकट से बचा लिया.

राधा रानी की शर्त और गो-हत्या के पाप का डर

अरिष्टासुर का वध होने के बाद जब ये खबर राधा रानी तक पहुंची, तो वे चिंता में पड़ गईं. राधा जी ने कान्हा से कहा कि भले ही वो राक्षस था, लेकिन तुमने गो-वंश के रूप में मौजूद जीव को मारा है.

इसलिए तुम पर गो-हत्या का घोर पाप लग चुका है. इस महा-पाप से मुक्ति पाने के लिए तुम्हें दुनिया के सभी पवित्र तीर्थों की यात्रा करनी होगी और वहां स्नान करना पड़ेगा.

श्री कृष्ण को राधा रानी की बात सही लगी, लेकिन इतनी जल्दी सारे तीर्थों की यात्रा करना बहुत कठिन था.

देवर्षि नारद की सलाह और बांसुरी से कुंड का निर्माण

अपनी इस बड़ी दुविधा का हल निकालने के लिए श्री कृष्ण देवर्षि नारद मुनि के पास पहुंचे. उन्होंने नारद जी से इस पाप से मुक्ति पाने का सरल उपाय पूछा.

नारद मुनि ने मुस्कुराते हुए कान्हा को सलाह दी कि वे दुनिया भर के सभी तीर्थों को अपने पास बुलाएं. इसके बाद श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी से एक विशाल कुंड खोदा.

कान्हा के आदेश पर ब्रह्मांड के सभी पवित्र तीर्थ जल रूप में उस कुंड में आकर समा गए. इस तरह कान्हा के सामने ही सारे तीर्थ प्रकट हो गए.

श्री कृष्ण का पावन स्नान और अरिता गांव का रहस्य

कुंड में सभी तीर्थों का जल भर जाने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने उसमें भक्ति भाव से स्नान किया. इस पावन स्नान के साथ ही कान्हा के ऊपर से गो-हत्या का पाप हमेशा के लिए मिट गया.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मथुरा के पास स्थित अरिता गांव में यह ऐतिहासिक कुंड आज भी मौजूद है.

इस कुंड को श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है. हर साल हजारों श्रद्धालु इस कुंड के दर्शन करने और इसमें स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं.

(Disclaimer): यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और लोक-प्रचलित प्रसंगों पर आधारित है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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