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दिवाली के समय में आपने देखा होगा कि गांवों में लोग गाय-भैसों की पूजा करते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है ऐसा क्यों होता है.
दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा तो होती ही हैं. साथ में गांव के इलाकों में पशुओं की भी पूजा करने की परंपरा है.
गांव के लोग गाय, भैस और बैल पालते हैं. साथ ही उनको अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं.
इस दिन पशुओं को नहलाया जाता है, फिर रोली-चावल का तिलक लगाकर गुड़ व हरी घास खिलाया जाता है.
ये करके लोग पशुओं का आभार व्यक्त करते हैं. आज हम इस खबर में दिवाली के इस परंपरा के बारे में आपको डिटेल से बताएंगे.
गांव में रहने वाले लोग ज्यादातर लोग अपनी आजीविका और खेती के लिए पूरी तरीके से पशुओं पर निर्भर रहते हैं.
खेती से लेकर दूध और बाकी जरूरतों के लिए पशुओं का होना बहुत जरूरी है. इससे लोगों का काम आसान हो जाता है.
किसान इन पशुओं को अपने परिवार के सदस्य की तरह प्यार देते हैं. दीपावली के खास दिन पशुओं की पूजा कर उनके लिए आभार जताया जाता है.
ये परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी गांवों में पूरी आस्था के साथ निभाई जाती है.
पूजा के इस पावन दिन सुबह-सुबह पशुओं को अच्छी तरह नहलाया जाता है. इसके बाद उन्हें बड़े प्यार के साथ सजाया जाता है.
उनके माथे पर रोली और चावल का सुंदर तिलक लगाया जाता है. पशुओं को रंग-बिरंगे फूलों की मालाएं पहनाई जाती हैं.
कई गांवों में उन्हें सुंदर कपड़ों से भी संवारा जाता है. इसके बाद उनके सामने दीपक जलाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की जाती है.
पशुधन की पूजा करते समय पशुओं को पालने वालों को कुछ खास सावधानियां रखनी चाहिए. सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि पशुओं को बहुत ठंडे पानी से नहलाएं.
1- ठंड के मौसम में साफ और गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें.
2- पूजा के समय जब आप माथे पर तिलक लगाएं, तो ये ध्यान रखें कि रोली या सिंदूर उनकी आंखों में न जाए.
3- दीपक जलाते समय भी पशुओं को आग से सुरक्षित दूरी पर रखें.
पूजा के बाद पशुओं को प्रसाद के रूप में गुड़ और ताजी हरी घास दी जाती है.
इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि उन्हें किसी भी तरह का बासी खाना न दें. पूजा के दौरान पशुओं को ज्यादा देर तक कसकर बांधें नहीं.
उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी नहीं होनी चाहिए. उनकी सेहत का ख्याल रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
दीपावली के बाद पशुओं की ये पूजा सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है. ये जीवों के लिए हमारे प्रेम को दर्शाती है.
हमें सिर्फ एक दिन ही नहीं, बल्कि हमेशा अपने पशुओं की सेहत का ध्यान रखना चाहिए.
जब हम त्योहार की खुशियों के साथ इनकी सही देखभाल करेंगे, तभी सच्ची दीपावली मनेगी.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारियां और सुझाव पारंपरिक मान्यताओं, लोक-परंपराओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. इसका उद्देश्य किसी भी तरह की अंधविश्वास को बढ़ावा देना या पशु चिकित्सा का विकल्प बनना नहीं है. पशुओं की पूजा और देखभाल के दौरान उनकी सुरक्षा, सेहत और आराम का पूरा ध्यान रखें. किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए हमेशा योग्य पशु चिकित्सक से सलाह लें.