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दिवाली के अगले दिन जरूर करें अलक्ष्मी विसर्जन, जानिए नए सूप और झाड़ू का इससे क्या है संबंध

Alakshmi Visarjan: दिवाली के दूसरे दिन नए सूप और झाड़ू से ब्रह्ममुहूर्त में अलक्ष्मी का विसर्जन करने का विधान है. आइए जानें अलक्ष्मी के विसर्जन का क्या मतलब है और इसकी विधि क्या है.

दिवाली के अगले दिन जरूर करें अलक्ष्मी विसर्जन, जानिए नए सूप और झाड़ू का इससे क्या है संबंध

इस साल दिवाली का पर्व 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा. दिवाली की रात को लोग अपने घर में मां महालक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करते हैं. प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करने के बाद पूरे घर में दीपक जलाया जाता है. ध्यान दें, दिवाली का पर्व केवल दीया जलाने और मिठाई बांटने का पर्व नहीं है बल्कि घर से दरिद्रता और नकारात्मकता को दूर करने का भी पर्व है. यह पर्व अलक्ष्मी को घर से दूर करने का भी है. दिवाली की पूजा तब तक अधूरी रहती है जब तक कि दिवाली के अगले दिन अलक्ष्मी का विसर्जन न कर दिया जाए. देवी अलक्ष्मी का विसर्जन कैसे करें और इसकी पूरी विधि क्या है.

अलक्ष्मी विसर्जन कैसे करें

दिवाली की रात तो पूरे घर में दीपक जलाया जाता है. घर के एक-एक कोने में दीया जलाकर अंधकार को मिटाया जाता है. लेकिन दिवाली पर्व को पूर्ण करने के लिए दिवाली के दूसरे दिन अलक्ष्मी विसर्जन किया जाता है. ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे एक नया सूप और झाड़ू लें इसके बाद अलक्ष्मी यानी कचरे को समेटें और फिर उसका कूड़ेदान में विसर्जन कर दें. अब स्नान आदि कर लें और फिर महालक्ष्मी की पूजा करके प्रसाद ग्रहण करें. हालांकि अगर पूरी विधि की बात करें तो कचरे को समेट लें और एक नये सूप में रख लें, इसके बाद इस सूप को अपने सिर के ऊपर से 3 बार घुमाएं, अब इस सूप को घर से बाहर लेकर जाएं और कूड़ेदान, सुनसान जगह या चौराहे पर फेंक आएं. झाड़ू को भी फेंक दें. पीछे मुड़कर न देखें और जल्द ही घर आकर अच्छे से हाथ-पैर धो लें.

देवी अलक्ष्मी कौन हैं

शिवपुराण कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ तो अमृत से लेकर विष और शंख आदि निकले, इस मंथन से देवी लक्ष्मी भी प्रकट हुईं. लेकिन देवी लक्ष्मी से पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी प्रकट हुई. अलक्ष्मी कलह, क्लेश, रोग, दोष, अपयश, दरिद्रता और नकारात्मकता की देवी हैं. जहां पर गंदगी का वास होता है और जिस घर में झगड़े होते हैं, वहां पर देवी अलक्ष्मी का वास होता है. देवी अलक्ष्मी के पैर गंदे हैं और उनके बाल बिखरे हैं.

(Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और लोक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है. पूजा या किसी भी धार्मिक कार्य से पहले अपने विद्वान से अवश्य सलाह लें.)

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Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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