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दशहरे पर सुबह इस जीव के दर्शन होना क्‍यों माना जाता है शुभ? पेड़ों के पास खोजते हैं लोग

सनातन धर्म में प्रमुख व्रत-त्‍योहारों पर पूजा-पाठ के साथ कई परंपराएं भी निभाई जाती हैं. साथ ही इन खास मौकों के लिए शुभ-अशुभ संकेत भी बताए गए हैं. दशहरे के दिन भी एक खास जीव का दिखना बहुत शुभ माना गया है.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 15, 2026, 11:31 AM IST | Updated: Oct 15, 2026, 11:44 AM IST
Image Credit: दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन होना भगवान शिव और भगवान राम की कृपा होने का संकेत माना जाता है. (Photo:AI)
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दशहरा या विजयादशमी पर्व पर हथियारों की पूजा होती है, रावण दहन होता है लेकिन इसके साथ-साथ अलग-अलग जगहों पर ढेर सारी परंपराएं निभाईं जाती हैं. साथ ही इस दिन पान खाना बहुत शुभ माना जाता है. इसके अलावा दशहरे के दिन कुछ खास तरह के सपने दिखना, एक शुभ जीव का दिखना अच्‍छा शकुन माना गया है. ऐसा होना देवी-देवताओं की कृपा का संकेत माना जाता है. खासतौर पर इसे भगवान शिव और भगवान श्रीराम से जोड़ा जाता है. यह जीव है नीलकंठ पक्षी.

नीलकंठ दिखना क्‍यों शुभ?

भगवान राम ने दशहरे के दिन लंकापति रावण का वध किया था इसलिए इसे बुराई पर अच्‍छाई की जीत का पर्व विजयादशमी कहा जाता है. साथ ही हथियारों की पूजा करते हैं. हिंदू धर्म-शास्‍त्रों के अनुसार भगवान राम, भगवान शिव के परमभक्‍त थे. उन्‍होंने लंका पर चढ़ाई करने से पहले समुद्र किनारे शिवलिंग बनाकर पूजा की थी.

चूंकि भगवान शिव को नीलकंठ कहा जाता है, इसलिए इस दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन होना भगवान शिव और भगवान राम की कृपा का संकेत माना जाता है. समुद्र मंथन में निकले हलाहल विष का पान करने से शंकर जी का गला नीला पड़ गया था और वह नीलकंठ कहलाए.

पेड़ों, पहाड़ों, जंगलों में पाया जाता है नीलकंठ

आमतौर पर नीलकंठ पक्षी प्रकृति के करीब पाया जाता है, जैसे पेड़ों के झुरमुट में, जंगलों और पहाड़ों में. यही वजह है कि दशहरे के दिन लोग नीलकंठ के दर्शन करने के लिए घने पड़ों के पास उसे खोजते हैं. वहीं खुद ब खुद यदि नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो क्‍या ही कहने हैं. यह भाग्‍य खुलने का संकेत माना गया है. क्‍योंकि नीलकंठ मुश्किल से ही नजर आता है. उस पर इस विशेष दिन सुबह -सुबह होना दुर्लभ सा ही है.

दूर होते हैं कष्‍ट

दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन होना कष्टों-समस्‍याओं से मुक्ति होने, आर्थिक तंगी दूर होने, तरक्‍की की बाधाएं खत्‍म होने का संकेत माना जाता है. यह निकट भविष्‍य में मान-सम्‍मान मिलने का भी इशारा है. वहीं कई जगहों पर दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है. साथ ही लोग एक-दूसरे को शमी के पेड़ की पत्तियों देकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. पौराणिक मान्‍यता है कि एक बार दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पत्तियां सोने की बन गईं थीं. तब से ही धन-समृद्धि पाने के लिए दशहरे के दिन शमी के पेड़ या पौधे की पूजा करने का विधान है. 

(Disclaimer: दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन को शुभ मानने की परंपरा धार्मिक आस्था और लोकमान्यताओं पर आधारित है. इसके दर्शन से भविष्य में सफलता या समृद्धि मिलने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.)
 

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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