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Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा के 5 अद्भुत और चमत्कारिक निर्माण, जिनके रहस्य आज भी चौंकाते हैं

Vishwakarma Puja 2026: इस साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा की जाएगी. इस मौके पर आइए जानें भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाए गए 5 दिव्य और रहस्यमयी निर्माण कौन से हैं जो आज भी चौकाते हैं.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Sep 15, 2026, 11:41 AM IST | Updated: Sep 15, 2026, 11:44 AM IST
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Vishwakarma Puja 2026: इस साल 17 सितंबर को देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा को समर्पित पर्व विश्वकर्मा पूजा पर्व मनाया जाएगा. इस पर्व पर फैक्ट्री, वर्कशॉप और ऑफिस की मशीनों आदि की पूजा करने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के इंजीनियर हैं जिन्होंने अनेक चमत्कारिक नगर, महल और दिव्य शस्त्रों का निर्माण किया. अनेक शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ऐसे-ऐसे चमत्कारी निर्माण किए जो रहस्यों से भरे हैं. आइए भगवान विश्वकर्मा के 5 अद्भुत और चमत्कारी निर्माणों के बारे में जानें.

सोने की लंका

शिव जी ने अपनी धर्मपत्नी देवी पार्वती के लिए एक सुंदर महल बनाने की सोची और भगवान विश्वकर्मा को आदेश दिया कि हे देव एक ऐसे महल का निर्माण करिए जिसकी सुंदरता की तुलना त्रिभुवन में किसी और महल से न की जा सके. विश्वकर्मा जी ने एक ऐसी जगह खोजी जिसके चारों ओर पानी ही पानी था. जहां बीच में तीन सुंदर पहाड़ दिखते थे और पहाड़ पर सुंदर फूल खिले थे. इसी जगह उन्होंने सोने की लंका बनाई. कहते हैं लंका नगरी दूर से ही सोने की तरह चमकती थी. यहां सुगंधित पुष्प वाटिकाएं थीं. सोने के महल में खंभे भी सोने के थे और सभाएं रत्नजड़ित थीं. भव्य प्रवेश द्वार थे जो अद्भुत वास्तुकला को दर्शाते थे.  

पुष्पक विमान

पुष्पक विमान भगवान विश्वकर्मा की कला का ही एक चमत्कारी और अद्भुत उदाहरण है. शास्त्रों के अनुसार, दिव्य पुष्पक विमान दूर से ही चंद्रमा की तरह चमकता था. धरती ही नहीं, ग्रहों के बीच की भी यह अद्भुत विमान यात्रा करने में सक्षम था. मन के वेग से चलने वाले इस वाहन को ब्रह्मा जी ने कुबेर को दिया था. आगे चलकर कुबेर से रावण ने लिया था

द्वापर युग में श्रीकृष्ण की द्वारका का निर्माण

धार्मिक मान्यता है कि विश्वकर्मा जी ने भगवान श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी का निर्माण किया था जो अलौकिक और स्वर्ग जैसी सुंदर थी. वास्तु शास्त्र के अनुसार विश्वकर्मा जी ने एक ऐसी सुंदर नगरी का निर्माण किया जिसकी सड़कें चौड़ी थीं, चौराहे और गलियार, बागीचे अद्भुत थे. आज भले ही द्वारिका नगरी समुद्र में समायी हुई है लेकिन यह नगरी हिंदुओं के चार धाम और सप्तपुरियों में गिनी जाती है.

सुदर्शन चक्र और दिव्य अस्त्र

ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु जी के सुदर्शन चक्र से लेकर शिव जी के त्रिशूल और कई दिव्य शस्त्रों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किए. उन्होंने सूर्य के तेज को काटकर देवताओं के लिए एक से एक अद्भुत और शक्तिशाली शस्त्रों का निर्माण किया.

जगन्नाथ जी की प्रतिमा का निर्माण

प्रसिद्ध जगन्नाथ जी की प्रतिमा भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया है जो उनके अद्भुत शिल्प कौशल का अप्रतिम उदाहरण माना गया है. धार्मिक मान्यताओं का कथाओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा जी ने जगन्नाथ जी की प्रतिमा के निर्माण के लिए एक शर्त रखी थी कि जिस कमरे में वे मूर्ति निर्माण करेंगे वहां पर कोई नहीं होगा और न तो भीतर को प्रवेश करेगा. प्रतिमा का निर्माण शुरू हुआ और देखते ही देखते बहुत दिन बीत गए. राजा को लगा बहुत दिन बीत गए, कमरे के भीतर से कोई आवाज भी नहीं आ रही है. राजा को शंका हुआ कि कहीं भगवान विश्वकर्मा नाराज होकर चले तो नहीं गए. राजा ने जैसे ही दरवाजा खोला विश्वकर्मा मूर्ति निर्माण को अधूरा छोड़कर अंतर्धान हो गए. यही कारण है कि जगन्नाथ जी और उनके भाई-बहन की प्रतिमा आज भी अधूरी है.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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