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विदिशा में छिपा 1100 साल पुराना ऐतिहासिक खजाना: पहाड़ की गोद में बना है माला देवी मंदिर, जहां हैं प्राचीन मूर्तियां

मध्य प्रदेश के विदिशा में 1100 साल पुराना माला देवी मंदिर स्थित है. ग्यारसपुर की पहाड़ी पर चट्टान काटकर बने इस प्राचीन जैन मंदिर में भगवान शांतिनाथ और पार्श्वनाथ की दुर्लभ मूर्तियां हैं. जर्जर हालत के कारण एएसआई अब इसके पत्थरों की नंबरिंग करके संरक्षण कर रहा है.

विदिशा में छिपा 1100 साल पुराना ऐतिहासिक खजाना: पहाड़ की गोद में बना है माला देवी मंदिर, जहां हैं प्राचीन मूर्तियां

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक पुरानी जगह है. इस जगह का नाम ग्यारसपुर है. यहां पहाड़ पर एक बहुत पुराना मंदिर बना है.

इस मंदिर का नाम माला देवी मंदिर है. ये मंदिर लगभग 1100 साल पुराना है. इसे किसी नॉर्मल मकान की तरह केवल पत्थरों से नहीं बनाया गया है.

इसे पहाड़ की चट्टान को काटकर तैयार किया गया है. आज हम इस खबर में इस अनोखे मंदिर के बारे में डिटेल से जानेंगे.

नौवीं सदी का ऐतिहासिक निर्माण

ये मंदिर विदिशा शहर से करीब 38 किलोमीटर दूर है. इस मंदिर को नौवीं सदी के आसपास बनाया गया था.

अब आपके मन में आ रहा होगा कि इस मंदिर को किसने बनवाया होगा तो, उस समय वहां कलचुरी वंश के राजा वल्लेका का शासन चलता था. उनके मंदिर के पास कुछ शिलालेख भी मिले है.

इस मंदिर का एक हिस्सा सीधे पहाड़ की चट्टान को तराशकर बनाया गया है. बाकी हिस्सा पत्थरों को जोड़कर तैयार किया गया है. मंदिर के खंभे और जालियां दिखने में बहुत सुंदर हैं.

जैन तीर्थंकरों की प्राचीन मूर्तियां

ये स्थान जैन धर्म के इतिहास से गहराई से जुड़ा है. मंदिर के अंदर जैन भगवानों की पुरानी मूर्तियां रखी हैं. यहां भगवान शांतिनाथ जी की एक मूर्ति है.

ये मूर्ति पद्मासन मुद्रा में बैठी हुई है. मूर्ति के पास हिरण का निशान बना है. इसके अलावा यहां भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति भी मौजूद है.

मंदिर की दीवारों पर देवी चक्रेश्वरी, अंबिका और पद्मावती की आकृतियां भी बनाई गई हैं.

जैन परंपरा में पूजा का तरीका

जैन धर्म में पूजा का तरीका बहुत सीधा और सरल होता है. यहां भक्त भगवान से सुख-सुविधाएं नहीं मांगते हैं.

वे अहिंसा, संयम और मन की शांति का संकल्प लेते हैं. पूजा में जल, चंदन, चावल और दीपक का उपयोग किया जाता है.

लोग मंदिर में जाकर मंत्र पढ़ते हैं और परिक्रमा लगाते हैं. हालांकि इस माला देवी मंदिर में रोज पूजा कब से बंद हुई, इसका कोई पक्का लिखित रिकॉर्ड नहीं मिलता है.

अब ASI करेगा मंदिर की मरम्मत

काफी पुराना होने के कारण मंदिर का कुछ हिस्सा कमजोर हो गया था. इसलिए सुरक्षा के लिए पर्यटकों का जाना रोक दिया गया था.

अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI इस मंदिर को ठीक कर रहा है. इसके लिए एक-एक पत्थर का हिसाब रखा जाएगा.

पत्थरों पर नंबर लिखे जाएंगे. फिर कमजोर पत्थरों को निकालकर ठीक किया जाएगा. इसके बाद पुराने पत्थरों को दोबारा उसी जगह पर लगा दिया जाएगा.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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