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ब्रह्मा जी की नाक से क्यों प्रकट हुए थे भगवान विष्णु? जानिए वराह अवतार और हिरण्याक्ष वध की कथा

इस खबर में भगवान विष्णु के तीसरे वराह अवतार की संपूर्ण कथा के बारे में डिटेल से जानेंगे. साथ ही समझिए कैसे जय-विजय के श्राप से हिरण्याक्ष का जन्म हुआ और ब्रह्मा जी की नाक से प्रकट होकर वराह रूपी श्रीहरि ने पृथ्वी की रक्षा की थी.

Written By Harsh Singh
Published: Sep 12, 2026, 07:23 PM IST | Updated: Sep 12, 2026, 08:13 PM IST
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हिंदू धर्म में विष्णु भगवान के दस अवतारों का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है. जब-जब धरती पर पाप बढ़ा और बुराई हावी हुई, तब-तब विष्णु भगवान अलग-अलग रूप लेकर दुनिया को बचाने आए.

सतयुग में जब राक्षस हिरण्याक्ष ने पूरी पृथ्वी को समुद्र के गहरे पानी में छिपा दिया था, तब सृष्टि बचाने के लिए विष्णु भगवान ने अपना तीसरा अवतार लिया.

इस अवतार को वराह यानी सूअर अवतार कहा जाता है.आखिर भगवान को ये अनोखा रूप क्यों लेना पड़ा और कैसे हिरण्याक्ष का अंत हुआ, इसके बारे में हम इस खबर में डिटेल से जानेंगे.

जय-विजय को मिला था ऋषियों का बड़ा श्राप

इस कहानी की शुरुआत बैकुंठ धाम से होती है. श्रीमद्भागवत महापुराण के मुताबिक जय और विजय विष्णु भगवान के बैकुंठ धाम के दरबान थे.

एक बार सनकादि ऋषि बैकुंठ में जाना चाहते थे, पर जय और विजय ने उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया.

इस बात से नाराज होकर ऋषियों ने उन्हें राक्षस बनकर जन्म लेने का श्राप दे दिया. इसी श्राप की वजह से दोनों ने कश्यप ऋषि और दिति के घर जन्म लिया. वे आगे चलकर हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु नाम के दो बहुत शक्तिशाली राक्षस बने.

घमंडी हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में डुबो दिया

हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी को खुश करने के लिए बहुत बड़ी तपस्या की. इससे खुश होकर ब्रह्मा जी ने उसे ये वरदान दे दिया कि वो किसी से नहीं हारेगा.

ये वरदान मिलते ही हिरण्याक्ष बहुत घमंडी हो गया. उसने देवलोक पर कब्जा कर लिया और देवताओं को परेशान करने लगा.

अपनी ताकत के नशे में उसने पूरी पृथ्वी को पानी में डुबो दिया और उसे समुद्र की गहराई में छिपा दिया. इससे पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया और सभी देवता डर गए.

ब्रह्मा जी की नाक से निकला वराह रूप

जब पृथ्वी पर यह संकट आया, तो सभी देवता और ऋषि-मुनि ब्रह्मा जी के पास पहुंचे. ब्रह्मा जी ने देवताओं को बचाने के लिए विष्णु भगवान को याद किया.

उसी वक्त ब्रह्मा जी की नाक से एक छोटा सा वराह यानी सूअर का रूप निकला. देखते ही देखते वह बहुत बड़ा हो गया. विष्णु भगवान का ये रूप एक बड़े पहाड़ जितना विशाल था.

उनकी गर्जना से चारों तरफ आवाज गूंज उठी. इसके बाद वराह भगवान पृथ्वी को खोजने समुद्र के अंदर उतर गए.

भयंकर लड़ाई और हिरण्याक्ष का अंत

नारद जी से वराह अवतार की खबर मिलते ही हिरण्याक्ष गुस्से से भर गया. वह तुरंत समुद्र के अंदर पहुंचा. वहां उसने देखा कि विशाल वराह भगवान अपने दांतों पर पूरी पृथ्वी को उठाकर बाहर ला रहे हैं.

हिरण्याक्ष ने विष्णु भगवान को लड़ाई के लिए ललकारा. दोनों के बीच समुद्र के अंदर जबरदस्त युद्ध हुआ.

आखिरकार वराह भगवान ने अपनी गदा से वार करके हिरण्याक्ष का वध कर दिया. फिर उन्होंने पृथ्वी को सुरक्षित लाकर उसकी सही जगह पर वापस रख दिया.

13 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी वराह जयंती

धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक वराह भगवान विष्णु का तीसरा अवतार हैं. हर साल भादो महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है.

मान्यता है कि इसी दिन विष्णु भगवान ने धरती को संकट से बचाया था. मिथिला और काशी पंचांग के मुताबिक इस साल 2026 में वराह जयंती 13 सितंबर, रविवार को मनाई जाएगी.

कहा जाता है कि इस दिन वराह रूप की पूजा करने से जिंदगी के सारे कष्ट और डर दूर हो जाते हैं.

डिस्क्लोमर (Disclaimer):
यह लेख श्रीमद्भागवत महापुराण, पौराणिक कथाओं और वैदिक पंचांग की मान्यताओं पर आधारित एक विवरणात्मक रिपोर्ट है. इसका उद्देश्य पाठकों तक भारतीय संस्कृति और भगवान विष्णु के अवतारों से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है.

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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