)
Vaman Avatar Ki Katha Hindi Me: वामन जयंती भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाने का विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि पर श्रवण नक्षत्र के अभिजीत मुहूर्त में भगवान विष्णु ने अपना पांचवां अवतार यानी वामन अवतार लिया. जिसके कारण इस पर्व को वामन जयंती मनाई के रूप में मनाया जाता है जिसे वामन द्वादशी भी कहते हैं. इस साल वामन द्वादशी पर्व 23 सितंबर को यानी आज मनाया जा रहा है. वामन जयंती के दिन भक्त भगवान वामन या भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत का संकल्प करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीहरि की कृपा प्राप्त हो सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि का बढ़ती है. आज पूजा के समय वामन अवतार की कथा का भी पाठ किया जाता है. आइए इस पौराणिक कथा को जानें.
पौराणिक कथा है कि एक बार भक्त प्रह्लाद के पौत्र राजा बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वर्ग का राजपाट पा लिया. पराजित देवताओं और इंद्रदेव की स्थिति को देख उनकी माता अदिति दुखी हुईं. तब उन्होंने विष्णु जी की उपासना कर उन्हें प्रसन्न किया और अपने पुत्रों के संकट दूर करने की प्रार्थना की. इस पर विष्णु जी ने कहा- देवी! चिंता न करें, मैं आपके पुत्र के रूप में जन्म लूंगा और इंद्रदेव को उसका खोया हुए स्वर्ग दिलाऊंगा. समय बीता और राजा बलि ने स्वर्ग पर स्थायी अधिकार पाने के लिए भव्य अश्वमेध यज्ञ करने की ठानी. यज्ञ इतना भव्य था की इसकी चर्चा तीनों लोकों में हो रही थी. स्कंद पुराण के अनुसार राज बलि ने 99 अश्वमेध यज्ञ पूरे कर लिए थे और यह उसका 100वां अश्वमेध यज्ञ था. तभी राजा बलि के यज्ञ स्थल पर मां अदिति के पुत्र और भगवान विष्णु के पांचवें अवतार वामन देव पहुंचे. वामन भगवान के हाथों में छाता, दंड और जल से भरा कमंडल था. राजा बलि ने वामन भगवान को उत्तम आसन पर बिठाया और उनका खूब सत्कार किया. बलि ने वामन देव से कहां आप मुझसे दान में कुछ मांगें प्रभु. लेकिन भगवान वामन चुप रहे. जब बलि ने उनसे बहुत कहा तब जाकर वामन देवता ने कहा मुझे केवल 3 पग भूमि चाहिए. जिस पर बलि ने कहां बस तीन पग भूमि, प्रभु आप मुझसे और अधिक मांग लें, मैं सहर्ष दूंगा. इस पर वामन भगवान अपनी बात पर अड़े रहे. अब बलि ने हाथ में जल लेकर संकल्प लिया की हे वामन देवता मैं आपको दान में तीन पग भूमि दूंगा. फिर क्या था वामन देवता ने अपना आकार बढ़ाया और एक पग से पृथ्वी और दूसरे से स्वर्ग नाप लिया. फिर बलि से पूछा हे राजन दो पग में तो मैंने धरती और स्वर्ग नाप लिया अब तीसरा पग कहां रखूं. जिस पर राजा बलि ने अपना वचन निभाते हुए कहा प्रभु, संपत्ति का स्वामी संपत्ति से बड़ा माना गया है. प्रभु आप अपना तीसरा पग मेरे मस्तक पर पर रख दें. वामन देवता ने जैसे ही अपना पग बलि के मस्तक पर रखा वैसे ही बलि दबता गया और अंत में पाताल लोक चला गया. बलि ने अपना सबकुछ हार दिया लेकिन अपने वचन को नहीं टूटने दिया. उसकी वचनबद्धता और आदर भाव को देकर भगवान वामन ने उसे अनंतकाल तक के लिए पाताल का राजा बना दिया और देवताओं के संकट को दूर किया.
(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक ग्रंथों, व्रत कथाओं, पौराणिक प्रसंगों एवं प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है. विभिन्न ग्रंथों, क्षेत्रों, परंपराओं और विद्वानों के मतानुसार कथाओं एवं उनके विवरण में अंतर संभव है. इसका उद्देश्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है.)