सिर्फ झीलें ही नहीं, आस्था का बड़ा केंद्र है उदयपुर; जानिए ऋषभदेव और ईडाना माता मंदिर की खासियत
उदयपुर अपने झीलों के साथ-साथ प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है. इस स्टोरी में केसरियाजी और ईडाना माता मंदिर से जुड़ी अनोखी मान्यताएं और मेवाड़ी संस्कृति के बारे में बताएंगे जहां आप घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं.
राजस्थान के उदयपुर को लोग उसकी झीलों और बड़े-बड़े महलों के लिए जानते हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि मेवाड़ की यह धरती धार्मिक जगहों के मामले में भी बहुत आगे है.
उदयपुर और इसके आसपास कई ऐसे पुराने मंदिर हैं, जहां जाकर मन को बहुत सुकून मिलता है. आपको इन मंदिरों के दर्शन करने साथ-साथ राजस्थान की पुरानी परंपराएं और मेवाड़ की लोक संस्कृति भी देखने को मिल जाएगी.
अगर आपने उदयपुर जाने का प्लान बना लिया है तो आप वहां के इन फेमस मंदिरों में जा सकते हैं, जो आपके घूमने के मजे को दोगुना कर सकता है.
केसरियाजी मंदिर
शहर से सिर्फ 60KM की दूरी पर ही भगवान ऋषभदेव का फेमस केसरियाजी मंदिर है. इस कमाल के मंदिर में जैन धर्म के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की बहुत सुंदर मूर्ति रखी हुई है.
वहां की मान्यताओं के मुताबिक यहां भगवान को केसर चढ़ाया जाता है. यही कारण है कि इन्हें केसरियानाथ भी कहा जाता है.
इस मंदिर की खास बात ये भी है कि यहां सिर्फ जैन धर्म के ही लोग नहीं बल्कि सभी धर्म के लोग दर्शन करने आते हैं. ये जगह सालों से भाईचारे की मिसाल रही है.
अरावली की पहाड़ियों के बीच खूबसूरत नजारा
ये मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं है, बल्कि घूमने के लिए भी सबसे बेस्ट प्लेस है. मंदिर के पास के इलाके में अरावली की पहाड़ियां स्थित है. जिसकी खूबसूरत एक नंबर है.
अगर आपको मेवाड़ की सादी जिंदगी और गांव के माहौल को देखने का मन है तो आप यहां आकर देख सकते हैं. यहां के लोगों का कहना है कि अगर यहां घूमने-फिरने की सुविधाएं थोड़ी और बेहतर हो जाएं, तो यह जगह धार्मिक यात्रा के साथ-साथ एक बढ़िया टूरिस्ट स्पॉट भी बन सकती है.
झाड़ोल का ईडाना माता मंदिर
उदयपुर जिले के झाड़ोल इलाके में ईडाना माता का मंदिर है, जहां लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है. इस मंदिर को लेकर यहां के लोगों में कई पुरानी मान्यताएं और कहानियां चली आ रही हैं.
माना जाता है कि माता अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. मंदिर में समय-समय पर होने वाली पूजा और मेलों में दूर-दूर से लोग शामिल होने आते हैं. यहां का शांत और भक्तिभाव भरा माहौल हर किसी का मन मोह लेता है.
मेलों में दिखती है मेवाड़ की लोक संस्कृति
मेवाड़ के इन मशहूर मंदिरों की खास बात ये है कि यहां आने पर सिर्फ भगवान के दर्शन ही नहीं होते, बल्कि यहां की संस्कृति से भी जुड़ाव महसूस होता है.
मंदिरों के आसपास लगने वाले मेलों में मेवाड़ी गीत, नाच और यहां के हस्तशिल्प की झलक साफ दिखती है. इन मेलों में राजस्थान के कलाकार अपनी कला दिखाते हैं, जिसे देखकर विदेशी सैलानी भी दंग रह जाते हैं.
यहां का खाना-पीना और गांव घूमना भी है खास
उदयपुर के इन धार्मिक जगहों के आसपास गांव घूमने की भी अच्छी संभावना है. मंदिर दर्शन के लिए आने वाले लोग यहां के गांवों में रुककर असली मेवाड़ी खाना जैसे दाल-बाटी-चूरमा और कढ़ी का स्वाद ले सकते हैं.
यहां के लोगों की सादगी और उनका मेहमानों के साथ अच्छा बर्ताव हर किसी का दिल जीत लेता है. इन जगहों का विकास होने से यहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा और मेवाड़ की पुरानी संस्कृति भी बची रहेगी.
(Disclaimer): यह लेख लोक मान्यताओं, शास्त्रीय कथाओं और पौराणिक प्रसंगों पर आधारित है. इसमें शामिल जानकारियों का उद्देश्य किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना या भ्रम फैलाना नहीं है.
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