भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /धर्म
  • /सैकड़ों साल पुराना सिद्धपीठ: जहां विश्वकर्मा जी ने बनाया था गर्भगृह, जानिए मां ब्राह्मणी के इस मंदिर का अनोखा रहस्य

सैकड़ों साल पुराना सिद्धपीठ: जहां विश्वकर्मा जी ने बनाया था गर्भगृह, जानिए मां ब्राह्मणी के इस मंदिर का अनोखा रहस्य

इस खबर में आज हम ब्रह्मा जी के स्त्री रूप माता ब्राह्मणी देवी मंदिर के बारे में बताएंगे. जिसमें इस मंदिर के बनने के पीछे की कहानी होगी.

Written ByHarsh Singh
Published: Oct 14, 2026, 12:53 PM IST|Updated: Oct 14, 2026, 01:30 PM IST
joinshare
सैकड़ों साल पुराना सिद्धपीठ: जहां विश्वकर्मा जी ने बनाया था गर्भगृह, जानिए मां ब्राह्मणी के इस मंदिर का अनोखा रहस्य

About the Author

    Harsh Singh

    Harsh Singh

    हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
    Read More

    ट्रेंडिंग

    • न्यूज़
    • फोटो
    • वीडियो
    हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

    हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

    2

    अतीक अहमद के अवैध साम्राज्य पर फिर चला पुलिस का डंडा; मदनलाल के नाम दर्ज 30 करोड़ की 14 बेनामी संपत्तियां कुर्क

    3

    जान से खिलवाड़? घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस, मालवाहक में ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर मरीज पहुंचे अस्पताल

    4

    'मौत को छूकर टक से वापस आ गया': UK में तूफान बोएलो का खौफनाक मंजर; प्लेन की ऐसी लैंडिंग देख कांप उठी रूह

    5

    Bhava Brihaspati: जानिए उस महान आचार्य की कहानी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर को बनाया था अमर

    logo
    • contact us
    • privacy policy
    • legal
    • investor info
    • advertise with us
    © 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

    तीनों लोकों के रचयिता ब्रह्मा जी की पूजा भारत में गिने चुने जगहों पर ही किया जाता है. आज हम उन्हीं के स्त्री रूप के एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो यूपी में स्थित है.

    इस मंदिर का नाम मां ब्राह्मणी देवी मंदिर है. ये यूपी के इटावा जिले के जसवंतनगर ब्लॉक में स्थित है. इसके चारों ओर बालराई का घना जंगल है.

    मंदिर के पास से ही यमुना नदी बहती हैं. ऐसे बीहड़ों के बीच माता का मंदिर होना अपने आप में ही एक रहस्य है.

    इस मंदिर के बनने का कोई तारीख तो नहीं पता है, लेकिन वहां के लोगों और कई वेबसाइट्स के मुताबिक ये लगभग 500 साल पुराना बताया जाता है.

    इस मंदिर में इटावा ही नहीं वहां के आस-पास के क्षेत्र जैसे भिंड, ग्वालियर, फिरोजाबाद, आगरा, और मैनपुरी से भी लोग दर्शन करने आते हैं.

    कैसे हुई थी मंदिर की स्थापना?

    इस मंदिर की स्थापना कैसे हुई थी इसपर वहां के लोगों और इतिहास में अलग-अलग कहानियां है. उन्हीं में से एक लोककथा ये है कि एक दिन भदावर के राजा को सपने में मां ब्राह्मणी देवी ने आकर दर्शन दिया था.

    माता ने राजा से कहा कि वो यमुना नदी के पास में जमीन के अंदर समाहित हैं. इसलिए वहां उनके मंदिर को बनवाया जाए.

    फिर क्या था राजा ने तुरंत आदेश देकर वहां खुदाई चालू करवा दी. वहां पर माता की एक मूर्ति निकली.

    वहीं कुछ मान्यताओं की मानें तो वो इस मूर्ति को म्यांमार यानी बर्मा से लकर आए थे. लेकिन मूर्ति को लेकर आते समय राजा के सामने एक शर्त रख दी गई थी.

    शर्त के मुताबिक राजा को मूर्ति लाते समय पीछे मूड़कर नहीं देखना है. अगर उन्होंने पीछे मूड़कर देखा तो, माता वहीं रूक जाएंगी.

    जब वो मूर्ति को लेकर वापस आ रहे थे, उस समय पीछे से कोई आवाज आई. राजा ने पीछे मुड़कर देख लिया. फिर क्या था मूर्ति वहीं भारी होकर गिर गई.

    फिर राजा साहब ने वहां साल 1500 के आस-पास एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया. आज भी भदावर के शाही परिवार माता को अपना कुल देवी मानते हैं.

    shri brahmani mata temple

    क्या सच में भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था भगवान गर्भगृह?

    इस मंदिर के बारे में एक चीज और कही जाती है कि यहां का गर्भगृह खुद भगवान विश्वकर्मा ने बनाया है. जो कहीं ना कहीं सही भी लगती है.

    भगवान विश्वकर्मा ने इस मंदिर के गर्भगृह की बनावट को बीसा यंत्र के आधार पर किया है.

    अब कुछ लोगों के मन में ये सवाल आएगा कि आखिर बीसा यंत्र होता क्या है?

    तो ये एक चमत्कारी और शक्तिशाली ज्यामितीय प्रतीक है जिसका इस्तेमाल नेगेटिव एनर्जी को दूर करने और समस्या से छूटकारा पाने के लिए किया जाता है. बीसा यंत्र कैसा होता है उसकी फोटो हम नीचे डाल देंगे.

    bisa yantra

    मंदिर के में बारह द्वार और नौ ग्रहों की स्थापना भी की गई है. जो इसे और भव्य बनाता है. इतना ही नहीं इस मंदिर के पास में कुल 9 प्राचीन कुएं मौजूद हैं.

    इस समय तो इस मंदिर में मां ब्राह्मणी के साथ-साथ भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर की भी स्थापना करवा दिया गया है. जहां लोग एक साथ कई देवताओं के दर्शन कर सकते हैं.

    साल में लगते हैं 3 बड़े मेले

    इस मंदिर के पास साल में 3 बड़े मेले लगते हैं. जो हिंदी पंचांग के अनुसार होते हैं. ये तीनों भव्य मेले चैत्र, आषाढ़ और अश्विन के समय में आयोजित किए जाते हैं.

    इनमें से सबसे बड़ा मेला चैत्र की नवरात्रि के दौरान होता है. जिसमें बहुत भीड़ आती है. मेलें में हजारों की संख्या जाती है.

    साथ हीं लगभग सौ से अधिक दुकाने सजती हैं. मंदिर के आस-पास लगभग 500 झंडे लगाएं जाते हैं.

    कुछ भक्त तो माता के दर्शन के लिए अपने घर से पैदल आते हैं. कुछ लोग तो जमीन पर दंडवत करते हुए माता के मंदिर तक पहुंचते हैं.

    अगर आपको करना हो दर्शन करने जाना हो तो कैसे जाएं?

    अगर आप भी इस भव्य मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां जाने का रास्ता बहुत आसान है. ये जगह इटावा के जिला के मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर स्थित है.

    वहां जानें के लिए बालराई-जसवंतनगर रोड हैं जिसकी कंडिशन कमाल की है, जिसके वजह से यहां पहुंचना तो काफी आसान हो चुका है.
     

    ये भी पढ़ें: घट स्थापना में कलश पर मौली बांधना क्यों है जरूरी? जानिए इसका रहस्य

    डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई समस्त जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक कथाओं, स्थानीय मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना और शास्त्रीय ज्ञान पहुंचाना है. किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या पुरोहित से सलाह अवश्य लें.

    Add Zee News as a Preferred Source
    TAGS:
    Temple