तीनों लोकों के रचयिता ब्रह्मा जी की पूजा भारत में गिने चुने जगहों पर ही किया जाता है. आज हम उन्हीं के स्त्री रूप के एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो यूपी में स्थित है.
इस मंदिर का नाम मां ब्राह्मणी देवी मंदिर है. ये यूपी के इटावा जिले के जसवंतनगर ब्लॉक में स्थित है. इसके चारों ओर बालराई का घना जंगल है.
मंदिर के पास से ही यमुना नदी बहती हैं. ऐसे बीहड़ों के बीच माता का मंदिर होना अपने आप में ही एक रहस्य है.
इस मंदिर के बनने का कोई तारीख तो नहीं पता है, लेकिन वहां के लोगों और कई वेबसाइट्स के मुताबिक ये लगभग 500 साल पुराना बताया जाता है.
इस मंदिर में इटावा ही नहीं वहां के आस-पास के क्षेत्र जैसे भिंड, ग्वालियर, फिरोजाबाद, आगरा, और मैनपुरी से भी लोग दर्शन करने आते हैं.
इस मंदिर की स्थापना कैसे हुई थी इसपर वहां के लोगों और इतिहास में अलग-अलग कहानियां है. उन्हीं में से एक लोककथा ये है कि एक दिन भदावर के राजा को सपने में मां ब्राह्मणी देवी ने आकर दर्शन दिया था.
माता ने राजा से कहा कि वो यमुना नदी के पास में जमीन के अंदर समाहित हैं. इसलिए वहां उनके मंदिर को बनवाया जाए.
फिर क्या था राजा ने तुरंत आदेश देकर वहां खुदाई चालू करवा दी. वहां पर माता की एक मूर्ति निकली.
वहीं कुछ मान्यताओं की मानें तो वो इस मूर्ति को म्यांमार यानी बर्मा से लकर आए थे. लेकिन मूर्ति को लेकर आते समय राजा के सामने एक शर्त रख दी गई थी.
शर्त के मुताबिक राजा को मूर्ति लाते समय पीछे मूड़कर नहीं देखना है. अगर उन्होंने पीछे मूड़कर देखा तो, माता वहीं रूक जाएंगी.
जब वो मूर्ति को लेकर वापस आ रहे थे, उस समय पीछे से कोई आवाज आई. राजा ने पीछे मुड़कर देख लिया. फिर क्या था मूर्ति वहीं भारी होकर गिर गई.
फिर राजा साहब ने वहां साल 1500 के आस-पास एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया. आज भी भदावर के शाही परिवार माता को अपना कुल देवी मानते हैं.

इस मंदिर के बारे में एक चीज और कही जाती है कि यहां का गर्भगृह खुद भगवान विश्वकर्मा ने बनाया है. जो कहीं ना कहीं सही भी लगती है.
भगवान विश्वकर्मा ने इस मंदिर के गर्भगृह की बनावट को बीसा यंत्र के आधार पर किया है.
अब कुछ लोगों के मन में ये सवाल आएगा कि आखिर बीसा यंत्र होता क्या है?
तो ये एक चमत्कारी और शक्तिशाली ज्यामितीय प्रतीक है जिसका इस्तेमाल नेगेटिव एनर्जी को दूर करने और समस्या से छूटकारा पाने के लिए किया जाता है. बीसा यंत्र कैसा होता है उसकी फोटो हम नीचे डाल देंगे.

मंदिर के में बारह द्वार और नौ ग्रहों की स्थापना भी की गई है. जो इसे और भव्य बनाता है. इतना ही नहीं इस मंदिर के पास में कुल 9 प्राचीन कुएं मौजूद हैं.
इस समय तो इस मंदिर में मां ब्राह्मणी के साथ-साथ भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर की भी स्थापना करवा दिया गया है. जहां लोग एक साथ कई देवताओं के दर्शन कर सकते हैं.
इस मंदिर के पास साल में 3 बड़े मेले लगते हैं. जो हिंदी पंचांग के अनुसार होते हैं. ये तीनों भव्य मेले चैत्र, आषाढ़ और अश्विन के समय में आयोजित किए जाते हैं.
इनमें से सबसे बड़ा मेला चैत्र की नवरात्रि के दौरान होता है. जिसमें बहुत भीड़ आती है. मेलें में हजारों की संख्या जाती है.
साथ हीं लगभग सौ से अधिक दुकाने सजती हैं. मंदिर के आस-पास लगभग 500 झंडे लगाएं जाते हैं.
कुछ भक्त तो माता के दर्शन के लिए अपने घर से पैदल आते हैं. कुछ लोग तो जमीन पर दंडवत करते हुए माता के मंदिर तक पहुंचते हैं.
अगर आप भी इस भव्य मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां जाने का रास्ता बहुत आसान है. ये जगह इटावा के जिला के मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर स्थित है.
वहां जानें के लिए बालराई-जसवंतनगर रोड हैं जिसकी कंडिशन कमाल की है, जिसके वजह से यहां पहुंचना तो काफी आसान हो चुका है.
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई समस्त जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक कथाओं, स्थानीय मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना और शास्त्रीय ज्ञान पहुंचाना है. किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या पुरोहित से सलाह अवश्य लें.