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सनातन धर्म में दशहरा पर्व यानी विजयादशमी का बड़ा महत्व है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक तो है ही इसके साथ ही यह पर्व मां दुर्गा की कृपा पाने का भी है. धार्मिक परंपराओं में इस मौके पर अगर मां दुर्गा की पूजा करें तो मां की कृपा प्राप्त होती है. हालांकि, अगर दशहरे से पहले अगर कुछ पौधों को लगाएं तो इससे घर का वास्तु तो सुधरता ही है इसके साथ ही सभी तरह के दोष खत्म होते हैं. इस साल 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा. आइए यहां जानें कि शुभ पौधों को दशहरा से पहले लगाने और दशहरे के दिन उनकी पूजा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
धार्मिक मान्यता है कि तुलसी पौधे में माता लक्ष्मी का वास होता है ऐसे में अगर दशहरे से पहले यानी नवरात्र के दौरान अगर घर में तुलसी का पौधा लगाएं तो मातारानी अति प्रसन्न होती हैं और पूरे घर पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं. दशहरे में लगाई गई तुलसी की पूजा हर दिन सुबह-शाम दीया जलाएं. पौधे वाली जगह को साफ रखें.
शारदीय नवरात्र के दिनों में दशहरा से एक दिन पहले अगर घर में लाल गुड़हल का पौधा लगाएं तो मातारानी अति प्रसन्न होती है. मां दुर्गा को गुड़हल का फूल अति प्रिय है और जब यह पौधा घर में लगाते हैं तो घर पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है और समृद्धि बनी रहती है. दशहरे के दिन मां दुर्गा की पूजा के समय इस पौधे के सामने भी दीया जला सकते हैं.
धार्मिक मान्यताओं में हरसिंगार के पौधे को पवित्र माना गया है. मान्यता है कि इसमें मातारानी वास करती हैं. इस शारदीय नवरात्र पर दशहरा से पहले अगर घर में हरसिंगार के पौधे को लगाएं तो घर में सुख-समृद्धि आती है. इससे घर का वास्तु भी ठीक हो जाता है. हरसिंगार के पौधे की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
शारदीय नवरात्र में विजयादशमी आने से पहले मोरपंखी का पौधा अगर घर में लगाएं तो यह अति शुभ सिद्ध हो सकता है. मोरपंखी का पौधा 'विद्या का पौधा' माना गया है. इसे घर में लगाने से करियर में तरक्की होती है और सभी बाधाओं का अंत होता है. हर ओर सकारात्मकता होती है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में जेड प्लांट होता है उस घर में किसी भी तरह की धन संबंधी परेशानियां नहीं आती हैं. समृद्धि बढ़ती है और भाग्य का पूरा साथ मिलता है. दशहरे से पहले अगर घर के मुख्य द्वार पर अगर जेड प्लांट लगाएं या उत्तर-पूर्व दिशा में इस पौधे को लगाएं तो घर में शांति बनी रहती है मां दुर्गा की कृपा भी प्राप्त होती है.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक वास्तु एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें और किसी भी प्रकार के निश्चित परिणाम या लाभ का दावा न मानें.)