कब है शारदीय नवरात्र की नवपत्रिका पूजा? क्या है नौ पौधों के पत्तों का अनुष्ठान, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Shardiya Navratri 2026 Navpatrika Puja: इस साल शारदीय नवरात्र की नवपत्रिका पूजा कब है, नौ पौधों के पत्तों का अनुष्ठान क्या है, इस दिन किस तरह से पूजा करें और इस दिन की शुभ मुहूर्त क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
नवपत्रिका पूजा को हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष के महासप्तमी तिथि पर करने का विधान है. शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि देवी कालरात्रि को समर्पित है. वहीं नवपत्रिका पूजा पर निशा पूजा करने का विधान है. नवपत्रिका पूजा प्रकृति और जगदंबा की असीम ऊर्जा की प्राप्ति का उत्सव है. बंगाल, असम और ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में नवपत्रिका पूजा का बड़ा महत्व है. इसे कलाबाऊ पूजा के नाम से भी जाना जाता है. इस साल यह पूजा 17 अक्टूबर 2026 को शनिवार के दिन की जाएगी.
नवपत्रिका पूजा तिथि और शुभ मुहूर्त
सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 05:54 बजे से शुरू होगी.
सप्तमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 08:27 बजे समाप्त होगी.
नवपत्रिका पूजा की तिथि 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को है.
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:49 बजे से लेकर दोपहर 12:35 बजे तक.
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:52 बजे से लेकर सुबह 05:40 बजे तक.
नवपत्रिका पूजा अनुष्ठान
यह अनुष्ठान प्रकृति और शक्ति से संबंधित है जो इनके बीच के अटूट संबंध को दर्शाता है. इसमें नौ विशेष पौधों के पत्तों को साथ में रखा जाता है और एक साथ सूत्रबद्ध करके देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों का आह्वान किया जाता है. ये नवपत्रिका अनार, अशोक, मनका, केला, कच्वी, हल्दी, धान, बिल्व और जौ.
नवपत्रिका पूजा विधि
सप्तमी से ठीक एक शाम पहले बेल के पेड़ या उसकी शाखा को पूजित करें.
इसी शाखा से देवी मां को पधारने का भावपूर्ण निमंत्रण दें.
अब महासप्तमी की सुबह स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहनें.
नौ पत्तियों के समूह यानी नवपत्रिका लें.
नवपत्रिका को लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी से ढक दें.
अब इन्हें किसी पवित्र नदियों में स्नान कराएं यानी कपड़े समेत जल में डूबाकर निकालें.
अब प्रतिमा स्थापना करें.
स्नान कराए गए नवपत्रिका को मां दुर्गा की प्रतिमा के दाहिने ओर प्रतिष्ठित करें.
दर्पण में भगवती की छाया को पवित्र जल और द्रव्यों से स्नान कराएं और प्राण प्रतिष्ठा करें.
षोडशोपचार से पूजा करें यानी अंत में धूप, रोली, फल, फूल समें 16 शृंगार सामग्री चढ़ाएं.
महाआरती कर मां को प्रसन्न करें.
भव्य निशा पूजा करें, महाआरती करें और महाप्रसाद भक्तों में बांटें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)