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दशहरा बीतते ही शरद पूर्णिमा का इंतजार शुरू हो जाता है. शरद पूर्णिमा वो खास तिथि है जब चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है. साथ ही साल में इसी दिन चंद्रमा की रोशनी से अमृत बरसने की मान्यता है. शरद पूर्णिमा पर व्रत रखते हैं, रात को चंद्रमा के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं, ऐसा करने से धन-समृद्धि बढ़ती है. इस पवित्र दिन विधिवत तरीके से व्रत पूजा करने के साथ-साथ दान जरूर करना चाहिए. लेकिन दान करते समय कुछ नियमों का पालन करें, वरना गड़बड़ी हो सकती है और धन की देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं.
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन पूर्णिमा यानी कि शरद पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर की सुबह 11:55 बजे प्रारंभ होगी और 26 अक्टूबर की सुबह 09:41 समाप्त होगी. शरद पूर्णिमा पर पूजा रात में की जाती है, इसलिए 25 अक्टूबर की रात को शरद पूर्णिमा का चांद रहेगा और इसी दिन व्रत रखा जाएगा व पूजा की जाएगी. साथ ही इसी रात चांद की रोशनी में खीर रखी जाएगी. हालांकि पूर्णिमा का स्नान 26 अक्टूबर की सुबह करना उचित रहेगा.
शरद पूर्णिमा का दान 25 अक्टूबर और 26 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक दोनों दिन किया जा सकेगा. लेकिन पूर्णिमा के दान में कुछ बातों का ध्यान रखें वरना लक्ष्मी जी रूठ सकती हैं.
- शरद पूर्णिमा के दिन गरीब-जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, अनाज दान करें.
- शरद पूर्णिमा के दिन लोहे का दान करना बेहद अशुभ माना जाता है. इस दिन चांदी या मोती का दान करना अव्छा होता है.
- शरद पूर्णिमा पर खीर, दूध, मिठाई का दान करें, लेकिन गलती से भी दही का दान न करें. वरना घर का सुख-चैन, समृद्धि चली जाएगी.
- शरद पूर्णिमा के दिन किसी को नमक भी दान न करें. ऐसा करने से निगेटिविटी बढ़ती है.
- किसी को फटे-पुराने कपड़े, जूते दान न दें. कपड़े दान करें तो ऐसे हों जो अच्छी स्थिति में हों और पहने जा सकें.
(Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. दान के नियम और पुण्य फल से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं. अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना ही इस परंपरा का मूल भाव है.)