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आपने अक्सर ही ऐसा देखा होगा कि मंदिर या घर की पूजा में भगवान को जब हम भोग लगाते हैं और थोड़ी भी लापरवाही करते है तो अचानक कुत्ता भोग को खा जाता है, प्रसाद जूठा कर देता है. ऐसे में मन में इस तरह के सवाल उठते हैं कि भगवान को चढ़ाया भोग अगर कुत्ता खा जाए तो यह शुभ होता है या अशुभ, कहीं पाप के भागी तो नहीं बन जाएंगे? ध्यान दें सनातन धर्म में कुत्ते केवल जानवार नहीं हैं बल्कि इनका भगवान भैरव और यमराज से गहरा संबंध बताया गया है. ऐसे में आइए इस बारे में विस्तार से जानें कि भगवान को भोग लगाने के बाद कुत्ता उस भोग को खा ले तो इसका क्या मतलब है, ऐसा होना शुभ है या अशुभ, इसका राहु-केतु और शनिदेव से क्या संबंध है.
शास्त्रों के अनुसार कुत्ते को भोग खिलाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और भगवान काल भैरव भी प्रसन्न होते हैं. सनातन धर्म में भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ते को माना गया है. अगर भोग लगने के बाद प्रसाद कुत्ता खा जाए तो ऐसा मान लिया जाता है कि भगवान ने किसी रूप में आकर भोग को स्वीकार किया है. ध्यान दें, भगवान को लगाया भोग कुत्ता अगर प्रसाद रूप में खा जाए तो इसे सामान्य घटना मानना चाहिए और शुभ संकेत के रूप में देखना चाहिए.
भूखे जीव विशेष रूप से कुत्तों को भोजन करवाना या प्रसाद ग्रहण करवाना सामान्य बात नहीं है. ज्योतिष और सनातन परंपरा में जीव सेवा का बड़ा महत्व है. इससे जीवन में शांति और सकारात्मकता बढ़ती है. ग्रह भी शांत होते हैं. दरअसल, कुत्ता अगर खुद भी आकर भगवान का भोग या प्रसाद खा ले तो इससे राहु, केतु और शनि देव के क्रूर ग्रहों का अशुभ प्रभाव शांत होने लगता है. ज्योतिष में कुत्ते को केतु का प्रतीक माना गया है और जब काला या चितकबरा कुत्ता पूजा में आकर प्रसाद खाले या प्रसाद खिला दिया जाए तो मानसिक तनाव और अचानक आने वाली बाधाओं का अंत होता है. मन का भ्रम दूर होता है. भूखे जीवों की आत्मा जब तृप्त होती है तो कुंडली के पितृदोष का भी नाश होता है.
एक बार भगवान को नैवेद्य चढ़ा दिया जाता है तो यह एक ऐसा महाप्रसाद बन जाता है जिसे कोई भी जीव ग्रहण कर सकता है चाहे वह कोई मानव हो या फिर कोई कुत्ता ही क्यों न हो. कुत्ते के द्वारा प्रसाद या भोग खा लेना कोई बड़ा पाप या वास्तु दोष नहीं लगता है. हालांकि, यह एक अशुद्धता और लापरवाही हो सकती है. धार्मिक मान्यताएं हैं कि भगवान का भोग अति पवित्र होना चाहिए. वैसे ही जैसे किसी भी पूजा के होने से पहले और होने के बाद स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिए. भोग लगाने से पहले भी पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए. भोग को ढंककर रखें, सुरक्षित जगह पर रखें और ध्यान रखें कि पूजा व भोग की पवित्रता भंग न हो.
(डिस्क्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है, इसे ही अंतिम सत्य न मानते हुए विद्वानों से एक बार परामर्श अवश्य करें.)