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Pitru Paksha 2026: एकादशी श्राद्ध से पितृ पाते हैं नरक से मुक्ति और वंशजों को मिलता है ऋषियों का आशीर्वाद, जानें तर्पण मुहूर्त और विधि

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में एकादशी श्राद्ध का विशेष महत्व है. इस तिथि पर पितृ का श्राद्ध करने से उन्हें नरक से मुक्ति मिलती है. इसका साथ ही श्राद्ध करने वाले वंशजों को ऋषियों का आशीर्वाद मिलता है.

Written ByPadma Shree Shubham
Published: Oct 06, 2026, 06:33 AM IST|Updated: Oct 06, 2026, 07:07 AM IST
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Pitru Paksha 2026: एकादशी श्राद्ध से पितृ पाते हैं नरक से मुक्ति और वंशजों को मिलता है ऋषियों का आशीर्वाद, जानें तर्पण मुहूर्त और विधि

About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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Ekadasi Shradh 2026: पितृपक्ष का पावन पर्व पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान दिखाने का एक विशेष मौका होता है. इस साल 24 सितंबर से शुरू हुआ पितृपक्ष आने वाले 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो जाएगा. आज एकादशी श्राद्ध है जिसे ग्यारस श्राद्ध भी कहा जाता है. अति महिमामयी एकादशी श्राद्ध का क्या महत्व है, इस दिन तर्पण का शुभ मुहूर्त क्या है और किस विधि से पितृ का तर्पण व पिंडदान करें? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.

पितृपक्ष की एकादशी तिथि पर उन पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी माह के किसी भी पक्ष में एकादशी तिथि पर हुई हो. इस साल एकादशी श्राद्ध आज यानी 06 अक्टूबर, मंगलवार को है. इस दिन इंदिरा एकादशी का व्रत का संकल्प भी किया जाएगा.

एकादशी श्राद्ध की तिथि और शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि 06 अक्टूबर 2026 को तड़के 02:07 बजे से शुरू होगा.
एकादशी तिथि 07 अक्टूबर 2026 को तड़के 00:34 बजे समाप्त होगा.
कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:46 से लेकर 12:33 बजे तक.
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 से लेकर 01:20 बजे तक.
अपराह्न काल: दोपहर 01:20 से लेकर शाम 03:40 बजे तक.

एकादशी श्राद्ध का महत्व और लाभ

धार्मिक मान्यता है कि एकादशी श्राद्ध पर पितृ का श्राद्ध करने से उन्हें नरक और दंड से मुक्ति मिलती है. पूर्वज अगर अपने जाने अनजाने पाप कर्मों के कारण नरक में कष्ट भोग रहे हों तो इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखकर अगर उनके वंशज पुण्य फल पितरों का तर्पण करें तो यातना से तुरंत मुक्त होकर पितृ स्वर्गलोक पाते हैं. इस दिन श्राद्ध कर्म करने से परिवार को समस्त वेदों का ज्ञान और ऋषियों का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन व्रत और तर्पण करने से पितृदेव अर्यमा की कृपा प्राप्त होती है और श्री विष्णु रूप भगवान शालिग्राम भी अति प्रसन्न होकर संपूर्ण पापों का नाश करते हैं. आश्विन कृष्ण एकादशी पर दान-तर्पण करने वाले के जीवन में धन की कमी नहीं होती है और सुख बना रहता है. रुके काम पूरे होते हैं.

एकादशी श्राद्ध की संपूर्ण पूजा विधि

सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें.
सबसे पहले देवताओं को अग्निग्रास अर्पित करें.
अब गाय, कौए, कुत्ते, चींटी और मछली को भोजन दें.
पीपल के वृक्ष के नीचे श्रद्धापूर्वक अन्न व जल अर्पित करें.
तुप या अपराह्न काल के शुभ मुहूर्त में  अब दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं.
हाथ में जल, कुशा, जौ और काले तिल लें व पितरों का तर्पण करें.
जौ, चावल, तिल और आटे से पिंड बनाएं व कुशा पर रखकर पितरों को अर्पित करें.
सात्विक भोजन तैयार करें और योग्य ब्राह्मण को घर पर आदरपूर्वक बुलाकर उन्हें खिलाएं.
सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा, वस्त्र और दान दें. जरूरतमंदों में भी दान करें.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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