SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Pitru Paksha 2026: युद्ध में दिवंगत आत्मा का किस तिथि पर होता है श्राद्ध कर्म, अकाल मृत्यु पाने वाले पितृ के तर्पण का क्या है नियम?

Pitru Paksha 2026: युद्ध में दिवंगत हुए लोगों की आत्मा का किस तिथि पर श्राद्ध कर्म करना चाहिए, ऐसे लोग जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो उन पितरों के तर्पण का क्या नियम है?

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 01, 2026, 07:08 AM IST | Updated: Oct 01, 2026, 07:13 AM IST
Join

Accidental Death Shraddh: सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धा भाव के साथ श्राद्ध कर्म और तर्पण करते हैं. हालांकि, कई बार लोगों के मन में ऐसा प्रश्न आता है कि जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना या युद्ध क्षेत्र में हुई हो तो उनका श्राद्ध पितृपक्ष की किस तिथि पर किया जाता है. शास्त्रों में अकाल या असामयिक मृत्यु पाने वाले पितरों के तर्पण के लिए क्या नियम है? आइए इस लेख में विस्तार से जानें.

चतुर्दशी तिथि पर अकाल मृत्यु का श्राद्ध

जिन लोगों की मृत्यु दुर्घटना में हो जाए या ऐसे लोग जो युद्ध क्षेत्र में शहीद हो गए हों उन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृपक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी चौदस श्राद्ध पर तर्पण करने का विधान है. शास्त्रों के अनुसार इस विशेष तिथि पर अकाल मृत्यु पाए हुए, शस्त्र से मारे गए, दुर्घटना में मृत्यु प्राप्त और युद्ध में जान गंवाए पितरों का श्राद्ध कर्म किया जाता है. चतुर्दशी तिथि पर ऐसे पितरों को जल देने से उनकी आत्मा तृप्त होती है. पितर परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं.

अकाल मृत्यु का अर्थ?

ऐसे लोग जो अपनी आयु पूरी नहीं कर पाए हों और उससे पहले ही उनका निधन हो गया हो तो इसे अकाल मृत्यु कहा जाता है. दुर्घटना, आग में जलना, किसी असाध्य रोग से मरना, जहर से या आत्महत्या से जीवन त्यागना. ऐसी स्थिति ये लोग ईश्वर की दी हुई आयु को जी नहीं पाते और समय से पहले ही दिवंगत हो जाते हैं.

तर्पण का नियम

चतुर्दशी श्राद्ध के लिए सुबह में स्नान कर लें. नियमित पूजा करें. अब दोपहर के समय शुभ मुहूर्त पर एक लोटे में गंगाजल लें और उसमें काले तिल डाल लें. अकाल मृत्यु पा चुके पितर का नाम लें और जल देकर तर्पण करें. भगवान शिव से प्रार्थना करें कि वे पितर को मोक्ष प्रदान करें और पूजा का पुण्य फल दें.

(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES