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Pitru Paksha 2026: पितरों के तर्पण के तुरंत बाद न करें ये 4 काम, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल और पितर रह जाएंगे अशांत

Pitru Paksha 2026 Niyam: धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक श्राद्ध व तर्पण करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है. लेकिन श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद कुछ नियमों का पालन करना भी बहुत जरूरी होता है. आइए जानते हैं श्राद्ध और तर्पण के बाद कौन से 4 काम नहीं करने चाहिए.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Sep 22, 2026, 08:01 PM IST | Updated: Sep 22, 2026, 08:09 PM IST
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Pitru Shraddha Tarpan Niyam: जल्द ही पितृ पक्ष शुरू होने वाला है जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करके हम अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं. इस साल 26 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है और 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला है. आइए इस लेख में जानें कि पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करने के तुरंत बाद कौन से 4 काम भूल से भी न करें.

तुरंत भोजन करने से बचें

पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म कर लें तो इसके तुरंत बाद भूल से भी भोजन न करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तर्पण करने के बाद पहले ब्राह्मण, गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों को भोजन कराएं. इसके कुछ समय बाद ही भोजन करें. मान्यता है कि श्राद्ध कर्म पूरी तरह जब संपन्न हो जाए तो करीब एक घंटे बाद ही कुछ भी खाएं पीएं.

पूजा के तुरंत बाद आराम न करें

पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाकर सोएं नहीं. धार्मिक मान्यता है कि पूजा के तुरंत बाद दान-पुण्य, सेवा करें, पितरों का स्मरण करें और पितृ मंत्रों का जाप करें. मान्यतानुसार श्राद्ध कर्म के करीब एक पहर यानी  तीन घंटे बाद ही आराम करें. बुजुर्ग, अस्वस्थ लोगों के लिए यह नियम अनिवार्य नहीं है.

तामसिक भोजन से करें परहेज

घर में पितरों के निमित्त श्राद्ध या तर्पण कर लिया है तो खान-पान को लेकर विशेष रूप से नियम का पालन करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में श्राद्ध या तर्पण किया गया हो वहां श्राद्ध के तुरंत बाद मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन या अन्य तामसिक खान-पान न करें. ऐसे भोजन का पूरे पितृ पक्ष में त्याग करना भी उचित होगा. सात्त्विक भोजन करें और संयमित दिनचर्या रखें. श्राद्ध कर्म की गरिमा और पवित्रता बनाए रखें.

घर में विवाद और कलह न करें

श्राद्ध के दिन और उसके बाद भी घर के वातावरण को शांत रखें तभी श्राद्ध का सकारात्मक प्रभाव घर पर पड़ेगा. परिवार के सदस्यों के साथ बहस न करें, गुस्सा न करें और न तो विवाद करें. बुजुर्गों का अपमान न करें, नहीं तो तर्पण और श्रद्धा का कोई फल प्राप्त नहीं होगा.

(Disclaimer: ये जानकारी वैदिक ग्रंथों, धार्मिक मान्यताओं के साथ ही  सामान्य जनश्रुतियों पर आधारित है. इसका उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है. किसी भी पूजा-पाठ या मंत्र जाप को करने से पहले अपने स्थानीय पुरोहित, पंडित या धर्मगुरु से सलाह अवश्य लें.)

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About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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