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Chaturdashi Shradh 2026: किन पितरों की शांति के लिए किया जाता है चौदश का श्राद्ध, जानें कुतूप-रौहिण मुहूर्त और तर्पण की विधि

Pitru Paksha 2025 Chaturdashi Shradh: पितृपक्ष में चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध विशेष रूप से उन पितरों का किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो. चौदस श्राद्ध कब है और इसके लिए शुभ मुहूर्त क्या हैं, आइए जानें.

Written ByPadma Shree Shubham
Published: Oct 08, 2026, 02:51 PM IST|Updated: Oct 08, 2026, 02:54 PM IST
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Chaturdashi Shradh 2026: किन पितरों की शांति के लिए किया जाता है चौदश का श्राद्ध, जानें कुतूप-रौहिण मुहूर्त और तर्पण की विधि

About the Author

Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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Chaturdashi ka shradh kaise kare: हिंदू धर्म में पितरों के तर्पण और उनकी शांति को विशेष महत्व दिया गया है. इस साल 26 सितंबर 2026 से शुरू हुआ पितृ पक्ष अब अपने समापन की ओर है और 10 अक्टूबर को अंतिम श्राद्ध यानी सर्वपृत अमावस्या है. इसी कड़ी में 9 अक्टूबर 2026 को चौदस यानी चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. आइए जानें चौदस श्राद्ध का महत्व, शुभ मुहूर्त और तर्पण की विधि क्या है.

चौदस श्राद्ध का महत्व

चौदस यानी चतुर्दशी तिथि पर उन पितृ का श्राद्ध करने का विधान है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने के किसी भी पक्ष में चतुर्थी तिथि पर हुई हो. चौदस श्राद्ध पर विशेष रूप से उनका भी तर्पण किया जाता है जिनकी किसी दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या से मृत्यु हुई हो या सरल रूप में कहें तो ऐसे पितृ जिनकी अकाल मृ्त्यु हुई हो. यह श्राद्ध इन अशांत और अतृप्त पितृ की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है ताकि वे मोक्ष का मार्ग पा सकें.

चतुर्दशी तिथि कब से कब तक

चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ कब होगा- 08 अक्टूबर 2026 को रात के 10:15 बजे से.
चतुर्दशी तिथि का समापन कब होगा-  09 अक्टूबर 2026 को रात के 09:35 बजे.

श्राद्ध कर्म के शुभ मुहूर्त

कुतुप मुहूर्त, श्राद्ध कर्म के लिए सर्वश्रेष्ठ समय- दोपहर 11:45 से लेकर 12:31 बजे तक.
रोहिणी मुहूर्त- दोपहर 12:31 से लेकर 01:18 बजे तक.
अपराह्न काल- दोपहर 01:18 से लेकर 03:38 बजे तक.

तर्पण की विधि

स्नान आदि के बाद शुभ मुहूर्त में तर्पण विधि शुरू करें.
घर व पूजा स्थल को गंगाजल छिड़कें और पितृ का ध्यान करें.
पितरों का ध्यान करते हुए उनके श्राद्ध और तर्पण का संकल्प करें.
अब दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं.
जल में काले तिल, जौ और सफेद पुष्प मिलाकर उस जल से पितरों का तर्पण करें.
अब जौ के आटे, पके चावल और काले तिल से पिंड बनाएं और कुशा पर रखकर अर्पित करें.
सात्विक भोजन से गौमाता, कुत्ते, कौवे, देव बल और चींटियों का हिस्सा निकालें.
ब्राह्मण को घर बुलाएं और भोजन कराकर दान-दक्षिणा और वस्त्र दें.
ब्राह्मणों का आशीर्वाद लें और अंत में पितृ शांति की प्रार्थना करें.

(डिस्क्लेमर-  यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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Pitru Paksha 2026