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नवरात्र के पहले दिन करें माता शैलपुत्री की पूजा, पढ़ें यह आरती, मंत्र और कथा

Navratri First day Devi Maa Shailputri : नवरात्र का पहला दिन मां दुर्गा के पहले स्‍वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. 11 अक्‍टूबर 2026 को मातारानी की पूजा में मां शैलपुत्री की आरती, चालीसा, मंत्र, कथा पढ़ें.

Written ByShraddha Jain
Published: Oct 10, 2026, 04:47 PM IST|Updated: Oct 10, 2026, 04:53 PM IST
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नवरात्र के पहले दिन करें माता शैलपुत्री की पूजा, पढ़ें यह आरती, मंत्र और कथा
Image Credit: नवरात्र के पहले दिन की देवी शैलपुत्री की आरती, चालीसा. (Photo: AI)

About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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शैल मतलब पर्वत, शैलपुत्री यानी कि पर्वतराज हिमालय की पुत्री. नवरात्र की पहले दिन की देवी माता शैलपुत्री हैं, जो पूर्व जन्‍म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं. शैलपुत्री स्‍वरूप में बेहद सौम्‍य और शांत होता है. हमेशा सफेद वस्‍त्र धारण करती हैं, बाएं हाथ में कमल और दाएं हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं. वृषभ (बैल) उनका वाहन है. चूंकि वे 'मूलाधार चक्र' की अधिष्‍ठात्री देवी हैं. इसी से साधक के आध्‍यात्मिक यात्रा की शुरुआत होती है. इसलिए नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की साधना की जाती है. 11 अक्‍टूबर 2026, रविवार को आश्विन शुक्‍ल प्रतिपदा यानी कि नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा करें. पूजा में उनके मंत्र पढ़ें, चालीसा का पाठ करें, कथा पढ़ें और अंत में आरती करें.

माता शैलपुत्री का मंत्र : ''ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥''

स्‍तुति : या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माता शैलपुत्री का चालीसा

॥दोहा॥

श्री गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल करण कृपाल।
विघ्न हरण मंगल मूरति,
जय जय गिरिजा लाल॥

॥चौपाई॥

जय गिरिराजकुमारि जगत जननी।
सकल सृष्टि पालक भवानी भवानी॥

जय शैलपुत्री माता महिमा अपार।
जो कोई तुमको ध्यावत भव भव पार॥

चंद्रार्ध मस्तक विराजत सुभ गंगा।
तुमहि देखि हरषत हिय शिव संगा॥

वाहन वृषभ राजत छवि निराली।
सोहत रूप मातु शिव की ललाली॥

कहत अष्टमां महिमा अमृत वाणी।
महिमा अपरम्पार विधि न जानी॥

कली कालक पाप हटावनि हरता।
संतन प्रभु प्रीति प्रभु भवानी करता॥

जो कोई तुहि ध्यावत रुधि रासि भवानी।
सकल सृष्टि पालक दुर्गा भवानी॥

गौरी शंकर संग विराजति सुहावनि।
मंगल कारण काली माई कहलावनि॥

ध्यान धरत जो कोई नर भवानी।
सकल सृष्टि में होत सुबानी॥

श्री शैलपुत्री चालीसा का पाठ।
करत ध्यान जस आपनि दास॥

विनय राम दास मनु प्रीतम भवानी।
तासु ध्यान से सकल सृष्टि भवानी॥

माता शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।।

शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।

पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।

सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।।

उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।

घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।

जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।

मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।

(यह भी पढ़ें: शारदीय नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना और मां शैलपुत्री की उपासना, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और माता का प्रिय भोग) 

मां शैलपुत्री की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवी सती के पिता राजा दक्ष ने बड़ा यज्ञ किया, उसमें सारे देवताओं को आमंत्रित किया. लेकिन अपने दामाद भगवान शंकर को आमंत्रित नहीं किया. जब उनकी पत्‍नी सती ने अपने पिता के घर यज्ञ में जाने की जिद की तो शिवजी ने उन्‍हें बताया कि उन्‍हें निमंत्रण नहीं दिया गया है. हालांकि उन्‍होंने अपने पत्‍नी को यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी.

देवी सती अपने पिता प्रजापति दक्ष के घर पहुंचीं. वहां जाकर जब उन्‍होंने इसकी वजह पूछी तो राजा दक्ष ने शिवजी के प्रति अपमानजनक वचन कहे. इससे देवी सती व्‍यथित हो गईं. अपने पति महादेव का अपमान वे न सह सकीं और उन्‍होंने यज्ञ में कूदकर अपनी जान दे दी. बाद में यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और प्रचलित पूजा पद्धतियों पर आधारित है. पूजा विधि, मंत्र और आरती के पाठ में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है. पाठक अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पूजा करें.)

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aarti chalisa katha