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Navratri 4th Day: नवरात्रि का चौथा दिन आज, मां कुष्मांडा की पूजा में पढ़ें ये मंत्र, कथा, चालीसा और आरती

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है. इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. जानिए मां कुष्‍मांडा का मंत्र, स्‍तुति, चालीसा और मां कुष्‍मांडा की आरती.

Written ByShraddha Jain
Published: Oct 14, 2026, 05:21 AM IST|Updated: Oct 14, 2026, 05:25 AM IST
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Navratri 4th Day: नवरात्रि का चौथा दिन आज, मां कुष्मांडा की पूजा में पढ़ें ये मंत्र, कथा, चालीसा और आरती
Image Credit: मां कुष्‍मांडा देवी की आरती, चालीसा, कथा और मंत्र. (Photo:AI)

About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है, आज 14 अक्‍टूबर 2026, बुधवार को आश्विन शुक्‍ल चतुर्थी को मां कुष्‍मांडा की पूजा की जाएगी. साथ ही गणेश चतुर्थी भी है. मां दुर्गा का चौथा स्‍वरूप देवी कुष्‍मांडा का है. मान्‍यता है कि अपनी मंद और मधुर मुस्कान से उन्‍होंने ब्रह्मांड की रचना की. देवी मां का यह स्वरूप ऊर्जा और चराचर जगत में प्राणशक्ति का संचार करने वाला है. उनकी आठ भुजाएं हैं और शेर पर सवार हैं. धर्म-शास्‍त्रों के अनुसार, सूर्यमंडल को नियंत्रित करने की क्षमता केवल देवी कूष्मांडा में ही है.

मां कुष्‍मांडा का मंत्र : 'ॐ कूष्माण्डायै नम:।'

मां कुष्‍मांडा की स्तुति : स्तुति: ''सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥''

मां कुष्‍मांडा की आरती

कुष्माण्डा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकम्भरी माँ भोली भाली॥

लाखों दीप तुम्हारे राजें।
तिहुं लोक में डंका बाजें॥

शुद्ध मन से जो तुझे ध्यावे।
अंत काल पदवी वह पावे॥

चौथा स्वरूप तुम्हारा माता।
सुख पाता जो तुम्हें मनाता॥

अष्टभुजी माँ शक्ति वाली।
मिटाती सबकी विपदा काली॥

सूर्य लोक की तुम महारानी।
सब जग करता तुम्हारी महिमा बखानी॥

मालपुआ का भोग लगाओ।
माँ को श्रद्धा से मनाओ॥

शुक्रवार को जो ध्यान लगावे।
मनवांछित फल माँ से पावे॥

कुष्माण्डा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥

मां कुष्‍मांडा का चालीसा

॥दोहा॥
माता कुष्मांडा की जय, करुणा की सागर।
सुख-सम्पत्ति देने वाली, जय माँ, जय अंबर॥

॥चालीसा॥
जयति जयति जगत की माता।
कुष्मांडा देवी सुखदायी भ्राता॥

शुम्भ-निशुम्भ हरणी माता।
भक्तों की विपदा हरणी भ्राता॥

कुश (कुमार) मंद हर्ष से भरी।
चारों ओर कृपा की झरी॥

हंस पर सवार हे माता।
कृपा का अविरल बहाता॥

कुम्भ करों में जल से भरे।
धन-धान्य से भरे सारे घर॥

आभा से दीप्त हे माता।
भक्तों के संकट मिटाता॥

चतुर्थी तिथि शुभ कहलाती।
व्रत रखने से सब सफल होती॥

मंत्र का जप करों हे प्यारे।
जीवन सुखी हो जाए सारे॥

अंत में सुन लो अरज हमारी।
जीवन सवारे भवसागर से॥

जय माता कुष्मांडा भवानी।
कृपा करो हे जगत की रानी॥

॥ इति श्री कुष्मांडा चालीसा सम्पूर्ण ॥

माता कुष्‍मांडा की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि के निर्माण नहीं हुआ था, तब न कोई लोक था, न किसी काल का अस्तित्‍व था. चारों तरफ सिर्फ गहरा अंधकार ही था. तब सैकड़ों सूर्यों के समान तेज वाले और प्रदीप्त मुखमंडल वाली देवी कूष्मांडा प्रकट हुईं. मां के मुख पर बिखरी हल्की सी मुस्कान से ब्रह्मांड में ऊर्जा और स्पंदन का संचार हुआ.

ये वैसा ही था जिस प्रकार किसी पुष्प में अंड का सृजन होता है, ठीक उसी भांति माता की मधुर हंसी से यह विशाल ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ. ये देवी कूष्मांडा कहलाईं और इस चराचर जगत् की आद्यशक्ति बनीं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है. पूजा-विधि, मंत्र और रीति-रिवाजों में क्षेत्र एवं परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है.)
 

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