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Navratri 8th Day: नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा, पढ़ें यह मंत्र, स्‍तुति, आरती, चालीसा और कथा

नवरात्र की अष्‍टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा की जाती है. हालांकि इस साल अष्‍टमी कब है, इसे लेकर भी लोगों में काफी उलझन है. जानें सही तारीख और माता महागौरी का मंत्र, आरती, कथा, चालीसा.

Written By Shraddha Jain
Published: Oct 18, 2026, 07:18 AM IST | Updated: Oct 18, 2026, 07:32 AM IST
Image Credit: अष्‍टमी की पूजा में माता महागौरी की आरती, मंत्र, कथा और चालीसा पढ़ें. (Photo:AI)
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नवरात्र के आठवें दिन का कलर है पर्पल, जो कि 18 अक्‍टूबर यानी कि आज है. लेकिन आज अष्‍टमी तिथि है या नहीं, इसे लेकर भक्‍तों में असमंजस है. जिसके चलते कोई 18 अक्‍टूबर को अष्‍टमी तिथि मान रहा है तो कोई 19 अक्‍टूबर 2026 को अष्‍टमी-नवमी एकसाथ मान रहा है. वैसे द्रिक पंचांग समेत ज्‍यादातर पंचांग 19 अक्‍टूबर को अष्‍टमी-नवमी तिथि एकसाथ बताई गई है. अष्‍टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा का विधान है. पूजा में माता महागौरी की आरती करें, उनके मंत्र, स्‍तुति, कथा, चालीसा पढ़ें. इससे पूजा का पूरा फल मिलने की मान्‍यता है.

मां महागौरी का मंत्र: ''ॐ देवी महागौर्यै नमः॥''
मां महागौरी की स्‍तुति: श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।  

माता महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया।
जय उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा॥

चंद्रकली और ममता अम्बे।
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे॥

भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥

सती सत हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आने वाले का संकट मिटाया॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी सदा ही जय हो॥

जय मां महागौरी। जय मां दुर्गा।

माता महागौरी की चालीसा

॥ दोहा ॥

मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर,
प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार।

॥ चौपाई ॥

नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,

शरनागत न कभी घबराता, गौरी उमा शंकरी माता।

आपका प्रिय आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,

महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल कलेश मिटाओ।

सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मों से कभी हटु ना,

सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,

मन को भाए वो वर चाहुं, ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।

परम आराध्या आप हो मेरी, फिर क्यूं वर में इतनी देरी,

हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोड़े में बरकत भर दीजियो।

अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,

गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।

देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर में पाते,

श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,

जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे, निराश मन में आस जगावे।

शिव भी आपका काहा ना टाले, दया दृष्टि हम पे डाले,

जो जन करता आपका ध्यान, जग में पाए मान सम्मान।

सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,

दया दृष्टि जब माँ डाले, भव सागर से पार उतारे।

जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,

जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

सता गुन की हो दता आप, हर इक मन की ग्याता आप,

काटो हमरे सकल कलेशा, निरोग रहे परिवार हमेशा।

दुख संताप मिटा देना माँ, मेघ दया के बरसा देना माँ,

जबही आप मौज में आय, हठ जय माँ सब विपदाए।

जिसपे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,

फल-फूल मैं दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

अवगुन मेरे ढ़क देना माँ, ममता आँचल कर देना माँ,

कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,

जितने आपके पावन धाम, सब धामो को माँ प्राणम।

आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,

निर्मल मन जो शरण मे आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।

संतोष धन्न से दामन भर दो, असम्भव को माँ सम्भव कर दो,

आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।

अपकी महिमा अती निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,

मनोकामना पुरन करती, मन की दुविधा पल में हरती।

चालीसा जो भी पढ़े-सुनाया, सुयोग वर् वरदान  पाए,

आशा पूर्ण कर देना माँ, सुमंगल साखी वर देना माँ।

॥ दोहा ॥

गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धहार।
हीं हीं हीं शरण में, दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।

मां महागौरी की कथा

सफेद वस्‍त्राभूषण धारण करने वाली मां महागौरी की मुद्रा बेहद शांत और सौम्‍य है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी महागौरी ने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तपस्‍या की थी, जिससे उनका पूरा शरीर काला पड़ गया था. भगवान शिव उनकी तपस्‍या से प्रसन्‍न हुए. शिव जी ने उनके शरीर पर गंगा का पवित्र जल डाला तो महागौरी का शरीर कांतिमय और गौरवर्ण हो गया. इस कारण वे महागौरी कहलाईं. मान्‍यता है कि माता महागौरी सारी मनोकामनाएं पूरी करने वालीं हैं. साथ ही वे अलैाकिक सिद्धियों की भी दात्री हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है. पूजा-विधि, मंत्र और रीति-रिवाजों में क्षेत्र एवं परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है.)

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About the Author

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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