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रुका पैसा, नौकरी की तलाश या घर का तनाव... अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि पर शिव चालीसा पढ़ते समय जरूर करें ये काम

मासिक शिवरात्रि पर शिव चालीसा का पाठ करना शुभ फलदायी और मनोकामना पूर्ति करने वाला माना जाता है. जानें अक्‍टूबर में मासिक शिवरात्रि कब है और इसे किस विधि से पढ़ने से पूरा लाभ मिलता है.

रुका पैसा, नौकरी की तलाश या घर का तनाव... अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि पर शिव चालीसा पढ़ते समय जरूर करें ये काम
Image Credit: मासिक शिवरात्रि पर शिव चालीसा पढ़ने की विधि, समय, नियम और लाभ. (Photo: AI)

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है और भगवान शिव- माता पार्वती की पूजा की जाती है. अभी आश्विन महीना चल रहा है और इसकी मासिक शिवरात्रि अक्‍टूबर महीने में पड़ेगी. द्रिक पंचांग के अनुसार 8 अक्‍टूबर को आश्विन कृष्‍ण चतुर्दशी है. इस दिन पूजा में शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. धार्मिक मान्‍यता है कि इससे जिंदगी के कई कष्‍ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. लेकिन इसके लिए शिव चालीसा पढ़ने की सही विधि और नियमों का पालन करना भी जरूरी है.

शिव चालीसा पढ़ने की सही विधि और समय

पूजा से पहले स्‍नान करके साफ कपड़े पहनें. क्‍योंकि मासिक शिवरात्रि की पूजा शाम को होती है और उससे पहले स्‍नान करके पवित्र होना उचित है. इसके बाद विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करें. फिर शांत मन से शिव चालीसा का पाठ करें. इसके बाद आखिर में आरती करें. यदि सुबह ही पूजा कर रहे हैं तब भी इसी विधि का पालन करें.

कितनी बार पढ़ें शिव चालीसा

शिव चालीसा कितनी बार पढ़ें इसे लेकर धर्म-शास्‍त्रों में कोई नियम नहीं बताया गया है. इसे एक बार भी सच्‍चे मन से पढ़ना काफी है. यदि आप चाहें तो ज्‍यादा बार भी इसका पाठ कर सकते हैं.

शिव चालीसा पढ़ते समय इन बातों का रखें ध्‍यान

कभी भी जल्‍दबाजी में या गलत उच्‍चारण से शिव चालीसा न पढ़ें, बल्कि शांत मन और पूरे भक्तिभाव से पढ़ें. अपनी और पूजा स्‍थल की स्‍वच्‍छता का ध्‍यान रखें. चाहे घर में पढ़ें या मंदिर में.

शिव चालीसा पढ़ने का लाभ

- यह केवल भौतिक लाभ नहीं देता है, बल्कि मन को शांति और एकाग्रता देता है.

- जीवन से नकारात्‍मकता दूर करता है, जो कि कई समस्‍याओं की जड़ है.

- इसे पढ़ने के बाद मनोकामना पूर्ति के लिए भी भक्‍त महादेव से प्रार्थ्‍ना कर सकते हैं.

श्री शिव चालीसा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।

कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला ।

सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।

कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।

मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।

छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।

बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।

सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।

या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।

तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।

देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।

लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।

सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।

सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।

पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।

सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।

अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।

जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।

नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।

जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।

कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।

कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।

भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।

करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।

भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।

येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।

संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।

संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।

आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।

जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।

क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।

मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।

शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।

सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।

ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।

पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।

निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।

ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।

ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।

शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।

अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।

जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

दोहा

नित्त नेम कर प्रातः ही,पाठ करौं चालीसा ।

तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान ।

अस्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण ॥

॥श्री शिव चालीसा सम्पूर्ण॥

(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

Shraddha Jain

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पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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