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महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन के बाद कलश-चावल-सुपारी का क्या करें? इन चीजों के दान से पूरी होगी पूजा

16 दिन के महालक्ष्मी व्रत अब समाप्‍त होने को हैं और उद्यापन के दिन पूजा के बाद कलश के जल, चावल और सुपारी आद‍ि सामग्री का क्‍या करें? साथ ही पूजा का पूरा फल मिले इसके लिए क्‍या दान करें, जानिए.

महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन के बाद कलश-चावल-सुपारी का क्या करें? इन चीजों के दान से पूरी होगी पूजा
Image Credit: महालक्ष्‍मी व्रत के उद्यापन के बाद किन बातों का ध्‍यान रखें. (Photo:AI)

गरीबी, दुख, तंगी दूर करने के लिए भाद्रपद मास के शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी से शुरू हुए महालक्ष्मी व्रत आश्विन महीने के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को समाप्‍त होते हैं. इस दिन व्रत का विधि-विधान से उद्यापन, दान और बची हुई पूजन सामग्री का सही तरीके से निपटान करना बहुत जरूरी है. तभी व्रत का पूरा फल मिलने की मान्‍यता है. इस साल 3 अक्‍टूबर 2026, शनिवार को महालक्ष्‍मी व्रत का समापन है.

महालक्ष्‍मी व्रत पूजा मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 07:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 05:51 बजे समाप्‍त होगी. 3 अक्‍टूबर को ही अष्‍टमी तिथि मानी जाएगी और महालक्ष्‍मी व्रत रखा जाएगा. साथ ही इस दिन मासिक कालाष्‍टमी है और संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया व्रत भी रखा जाएगा. महालक्ष्मी व्रत 2026 के लिए 4 शुभ मुहूर्त हैं-

सुबह 07:51 बजे से 09:19 बजे तक
सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
दोपहर 12:15 बजे से 01:44 बजे तक
दोपहर 03:12 बजे से शाम 04:40 बजे तक

महालक्ष्‍मी व्रत पूजा के बाद बची सामग्री का क्‍या करें?

महालक्ष्मी व्रत के समापन या उद्यापन के बाद पूजा में उपयोग हुए कलश, सुपारी और अक्षत (चावल) का सही उपयोग और विसर्जन करें तो बहुत लाभ पाया जा सकता है.

कलश का जल : पूजा में रखे गए कलश का जल बेहद पवित्र होता है. इसे पूरे घर में छिड़कें, इससे सकारात्‍मकता बढ़ती है. यदि जल ज्‍यादा है तो उसे पौधों में डाल दें. ध्यान रखें कि यह जल पैरों में नहीं आना चाहिए.

पूजा की सुपारी : पूजा में इस्तेमाल की गई सुपारी खास होती है, इसे लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख सकते हैं. यदि ऐसा करना संभव न हो तो बहते जल में प्रवाहित कर दें या मंदिर में रख आएं.

अक्षत (चावल) : पूजा के चावल के कुछ दाने लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन स्‍थान पर रख सकते हैं. इससे पूरे साल धन-धान्‍य बढ़ते रहने की मान्‍यता है. इसके अलावा चावल ज्‍यादा हों तो किसी गरीब को दान कर दें, या खीर का प्रसाद बनाकर खुद खाएं और परिवार को खिलाएं.

महालक्ष्‍मी पूजा के दिन करें दान

हिंदू धर्म हर व्रत-त्‍योहार, खास मौके पर दान को बड़ा महत्‍व दिया गया है. महालक्ष्‍मी व्रत के उद्यापन के दिन भी पूजा के बाद कुछ चीजों का दान करना बेहद शुभ माना गया है. इससे धन-वैभव की देवी लक्ष्‍मी के प्रसन्‍न होने और पूजा का पूरा फल मिलने की मान्‍यता है. जानिए इस दिन क्‍या-क्‍या दान करें.

सौभाग्य/सुहाग की सामग्री जैसे- चूड़ियां, बिंदी, महावर, सिंदूर, कंघी और साड़ी.
अनाज, फल मिठाई, खासतौर पर इस दिन सफेद या दूध से बनी मिठाई जैसे- खीर, बर्फी दान करें. 
महालक्ष्‍मी व्रत 16 दिन के होते हैं और इसमें 16 की संख्‍या का विशेष महत्‍व है. लिहाजा 16 की गिनती में लौंग, इलायची, फल या मेवे दान करें. 
सामर्थ्य अनुसार 16 सिक्‍के दान कर सकते हैं.

(Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पूजा-पद्धतियों पर आधारित है. व्रत के उद्यापन और पूजा सामग्री के उपयोग/दान की विधि क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है.)
 

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About the Author

Shraddha Jain

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पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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