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गरीबी, दुख, तंगी दूर करने के लिए भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू हुए महालक्ष्मी व्रत आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होते हैं. इस दिन व्रत का विधि-विधान से उद्यापन, दान और बची हुई पूजन सामग्री का सही तरीके से निपटान करना बहुत जरूरी है. तभी व्रत का पूरा फल मिलने की मान्यता है. इस साल 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को महालक्ष्मी व्रत का समापन है.
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 07:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 05:51 बजे समाप्त होगी. 3 अक्टूबर को ही अष्टमी तिथि मानी जाएगी और महालक्ष्मी व्रत रखा जाएगा. साथ ही इस दिन मासिक कालाष्टमी है और संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया व्रत भी रखा जाएगा. महालक्ष्मी व्रत 2026 के लिए 4 शुभ मुहूर्त हैं-
सुबह 07:51 बजे से 09:19 बजे तक
सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
दोपहर 12:15 बजे से 01:44 बजे तक
दोपहर 03:12 बजे से शाम 04:40 बजे तक
महालक्ष्मी व्रत के समापन या उद्यापन के बाद पूजा में उपयोग हुए कलश, सुपारी और अक्षत (चावल) का सही उपयोग और विसर्जन करें तो बहुत लाभ पाया जा सकता है.
कलश का जल : पूजा में रखे गए कलश का जल बेहद पवित्र होता है. इसे पूरे घर में छिड़कें, इससे सकारात्मकता बढ़ती है. यदि जल ज्यादा है तो उसे पौधों में डाल दें. ध्यान रखें कि यह जल पैरों में नहीं आना चाहिए.
पूजा की सुपारी : पूजा में इस्तेमाल की गई सुपारी खास होती है, इसे लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख सकते हैं. यदि ऐसा करना संभव न हो तो बहते जल में प्रवाहित कर दें या मंदिर में रख आएं.
अक्षत (चावल) : पूजा के चावल के कुछ दाने लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन स्थान पर रख सकते हैं. इससे पूरे साल धन-धान्य बढ़ते रहने की मान्यता है. इसके अलावा चावल ज्यादा हों तो किसी गरीब को दान कर दें, या खीर का प्रसाद बनाकर खुद खाएं और परिवार को खिलाएं.
हिंदू धर्म हर व्रत-त्योहार, खास मौके पर दान को बड़ा महत्व दिया गया है. महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन के दिन भी पूजा के बाद कुछ चीजों का दान करना बेहद शुभ माना गया है. इससे धन-वैभव की देवी लक्ष्मी के प्रसन्न होने और पूजा का पूरा फल मिलने की मान्यता है. जानिए इस दिन क्या-क्या दान करें.
सौभाग्य/सुहाग की सामग्री जैसे- चूड़ियां, बिंदी, महावर, सिंदूर, कंघी और साड़ी.
अनाज, फल मिठाई, खासतौर पर इस दिन सफेद या दूध से बनी मिठाई जैसे- खीर, बर्फी दान करें.
महालक्ष्मी व्रत 16 दिन के होते हैं और इसमें 16 की संख्या का विशेष महत्व है. लिहाजा 16 की गिनती में लौंग, इलायची, फल या मेवे दान करें.
सामर्थ्य अनुसार 16 सिक्के दान कर सकते हैं.
(Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पूजा-पद्धतियों पर आधारित है. व्रत के उद्यापन और पूजा सामग्री के उपयोग/दान की विधि क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है.)