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महाभारत युद्ध से जुड़ी ढेरों कहानियां और रहस्य हैं. ऐसा ही एक रहस्य से है कुरुक्षेत्र के मैदान में लाखों सैनिकों के भोजन की व्यवस्था. यह व्यवस्था ऐसी थी कि रोजाना शाम को सैनिकों के लिए न तो भोजन कम पड़ता था और न ही भोजन बचकर बर्बाद होता था. जबकि हर दिन हजारों-लाखों योद्धा-सिपाही मृत्यु को प्राप्त होते थे. युद्ध लड़ रहे हर सिपाही और योद्धा के लिए भोजन की सही व्यवस्था हो लेकिन भोजन बर्बाद भी न हो इसके लिए भगवान कृष्ण ने एक लीला की. जानिए महाभारत से जुड़ी राजा उड़पी और भगवान कृष्ण की प्रचलित कहानी.
जब तय हो गया कि महाभारत युद्ध होना है तो कौरव-पांडवों ने भगवान कृष्ण से तो मदद मांगी ही, अन्य राजााओं से भी अपने-अपने पक्ष में शामिल होकर इस युद्ध में हिस्सा लेने का निमंत्रण दिया. इसके जरिए कौरवों ने 11 अक्षौहिणी सेनाएं और पांडवों ने 7 अक्षौहिणी सेनाएं जुटा लीं. एक अक्षौहिणी में 21,870 रथ, 21,870 हाथी, 65,610 घुड़सवार एवं 1,09,350 पैदल सैनिक होते थे. इस तरह देखा जाए तो अठारह अक्षौहिणियों में कुल 1,14,16,374 यानी कि 1 करोड़ से ज्यादा सैनिक योद्धा थे.
इन राजाओं में केवल एक राजा ऐसे थे, जिन्होंने न कौरवों के साथ जाना पसंद किया और न पांडवों के साथ. उडुपी के राजा ने निष्पक्ष रहने का फैसला किया. लेकिन युद्ध में अपनी भागीदारी देने के लिए सभी 1 करोड़ से ज्यादा योद्धाओं-सैनिकों के भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी ली.
उडुपी के राजा ने इतने सारे लोगों का पेट भरने के लिए भारी इंतजाम किए थे. लाखों सैनिकों-योद्धाओं के लिए भोजन व्यवस्था के लिए कुरुक्षेत्र के मैदान में महारसोई बनाई गई. जिसमें सैकड़ों लोग मिलकर भोजन बनाते थे. लेकिन इस दौरान सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि रोज कितना भोजन बनाया जाए कि शाम को भोजन न कम पड़े और न ही बचकर बर्बाद हो.
फिर कृष्ण ने एक लीला की, जिससे उडुपी के राजा को एक दिन पहले ही पता चल जाता था कि अगले दिन कितने हजार योद्धा और सैनिक मरने वाले हैं. तब वे उसके हिसाब से ही बचे हुए लोगों के लिए ही भोजन तैयार करवाते थे. इससे न भोजन कम पड़ता था और न ही बचता था. इस कारण 18 दिन के महाभारत युद्ध के दौरान 1 दाना भी बर्बाद नहीं हुआ और न ही भोजन की कमी हुई.
युधिष्ठिर ने युद्ध समाप्त होने के बाद जब उडुपी नरेश से भोजन की इतनी सटीक व्यवस्था के पीछे का राज पूछा, तब राजा ने बताया कि भगवान कृष्ण को मूंगफलियां बेहद पसंद हैं. मैं हर रोज रात को भगवान कृष्ण को गिनकर उबली हुई मूंगफलियां खाने के लिए देता था. जितनी मूंगफली वो खा लेते थे, अगले दिन उससे 1 हजार गुना योद्धा-सैनिक वीरगति को प्राप्त होते थे. लिहाजा मैं उस संख्या को हटाकर बाकी लोगों के लिए ही भोजन तैयार करवाता था.
(Disclaimer- इस लेख में दी गई कहानी महाभारत से संबंधित प्रचलित लोककथा और मान्यताओं पर आधारित है. इसे महाभारत के मूल ग्रंथ में वर्णित प्रमाणित प्रसंग के रूप में न लें. धार्मिक मान्यताओं और कथाओं की अलग-अलग परंपराओं में अलग व्याख्याएं मिल सकती हैं.)