महाभारत सिर्फ युद्ध और धर्म-अधर्म की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसान के नजरिए, फैसलों से लेकर उसके दुर्गुणों की भी कहानी है. कहा जाता है कि आज भी दुनिया में ऐसा कोई विचार, इमोशन या भावना नहीं है, जो महाभारत काल में नहीं थी, फिर चाहे वह निश्छल प्रेम की भावना हो या द्वेष, जलन, नफरत की भावना. यही वजह है कि कई कारणों से महाभारत हर युग हर काल में प्रासंगिक रही है और आज भी है. लोग आज भी वो गलतियां दोहरा रहे हैं जो महाभारत के पात्रों ने की.
फिर चाहे वह संपत्ति के लिए झगड़ा हो, झूठ-लालच, अनैतिक आचरण (जुआं, क्षीरहरण) , कड़वी बोली, छल-कपट, अत्याचार, अपनों की ही जान लेने की कोशिश (लाक्षागृह कांड) आदि. आज हम महाभारत के 7 पात्रों की उन गलतियों को जानते हैं, जिनसे हमें सीख लेने की जरूरत है.
1- कर्ण: कर्ण को शूद्र पुत्र होने के कारण कई अन्याय सहने पड़े लेकिन उसने दुर्योधन जैसे अधर्मी और दुष्ट का एहसान लिया. जिसके कारण उसे मजबूरन अधर्म का साथ देना पड़ा. जबकि कर्ण का पूरा जीवन देखें तो उसने कभी कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन उसकी एक भूल जिंदगी पर भारी पड़ गई.
सीख: हमेशा अपना सर्कल देखकर चुनें, दोस्त परखकर बनाएं. वरना गलत संगति पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती है.
2- धृतराष्ट्र: अपनी संतान से प्रेम करना माता-पिता के लिए सामान्य बात है लेकिन धृतराष्ट्र पुत्र-मोह में इतने अंधे हो गए कि उन्हें न राजधर्म याद रहा और न मर्यादा. अपनी आंखों के आगे अपने ही कुल की बहु द्रौपदी का अपमान होते देखते रहे, जिसका नतीजा महाभारत युद्ध के रूप में हुआ.
सीख: अपनी संतान को हमेशा सही-गलत का फर्क सिखाएं और खुद कभी भी उनके गलत कामों में उनका साथ न दें, बल्कि उन्हें बर्बादी की ओर जानें से रोकें.
3- द्रौपदी: पांडवों ने जब अपना इंद्रप्रस्थ राज्य बनाया और उसमें दुर्योधन आया. वहां वह पानी के ऊपर बनी कलाकृति को नहीं पहचान पाया और पानी में गिर गया. जिस पर द्रौपदी हंस पड़ी और उसके पिता के अंधे होने पर व्यंग्य किया. जिसे दुर्योधन कभी नहीं भुला पाया और उसके बदले में उसने द्रौपदी का भरी सभा में अपमान किया.
सीख: कड़वा न बोलें, न किसी पर ऐसा व्यंग्य करें जो भारी बर्बादी लाए.
4- दुर्योधन: पांडवों का हक मारना और अहंकार में इतने अंधे हो जाना कि उन्हें 5 गांव तक न देना. यही महाभारत युद्ध की प्रमुख वजह बना.
सीख: कभी जिद और अहंकार में इतना आगे नहीं जाना चाहिए कि किसी का हक भी न दें. वरना जिंदगी में सब कुछ खोना पड़ जाता है.
5- भीष्म: हस्तिानापुर राज्य के प्रति अपनी निष्ठा निभाने में सत्य और धर्म की ही अनदेखी कर बैठे.
सीख: कभी भी ऐसे रूढ़ीवादी सोच में न बंधें कि समय के साथ सही-गलत का फैसला ही न ले पाएं.
6- द्रोणाचार्य: द्रोणाचार्य ने कर्ण को शूद्र पुत्र कहकर शिक्षा नहीं दी. साथ ही पुत्र अश्वत्थामा के मरने का आधा सच जानकर ही हथियार रख दिए.
सीख : बिना पूरा सच जाने कभी आधे सच पर विश्वास मत करो, वरना अधर्म का वार सहना पड़ेगा.
7- दु:शासन: अहंकार में इतना अंधा हो गया कि नारी का भरी सभा में अपमान कर बैठा, जो उसके पूरे कुल के विनाश का कारण बना.
सीख: कभी भी ऐसा गलत काम करने, महिला का अपमान करने की गलती न करें, जो परिवार के लिए बेइज्जती और नुकसान का कारण बने.
(Disclaimer: महाभारत के पात्रों और प्रसंगों से जुड़ी व्याख्याएं धार्मिक ग्रंथों, प्रचलित मान्यताओं और कथाओं पर आधारित हैं. इन्हें आधुनिक जीवन के संदर्भ में सीख के तौर पर प्रस्तुत किया गया है.)