ये है कुष्मांडा माता का मंदिर जहां पिंडी के रूप में दो मुख के साथ विराजती हैं देवी, जानें मां को समर्पित चतुर्थी तिथि का शुभ मुहूर्त
Kushmanda Mata Mandir In Kanpur: कुष्मांडा माता के इकलौते दो-मुखी पिंडी मंदिर जिसके बारे में हम इस लेख में विस्तार से जानेंगे. यह मंदिर उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित है जहां कि कई धार्मिक मान्यताएं हैं.
Kushmanda Mata Mandir Facts and Significance: मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड उत्पत्ति की देवी माना जाता है. यही कारण है कि मां कुष्मांडा को आदि शक्ति और आदि स्वरूप कहा गया है. इस साल शारदीय नवरात्र की चतुर्थी तिथि 14 अक्टूबर को है और इस दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाएगी. हिंदू शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि मां कुष्मांडा का विधि विधान से जिस घर में नवरात्र के चौथे दिन पूजा की जाती है उस घर में किसी भी तरह के रोग-दोष नहीं ठहरते हैं. उत्तर प्रदेश के मां कुष्मांडा देवी मंदिर स्थित है जिसको लेकर कई धार्मिक मान्यताएं हैं. आइए मां कुष्मांडा देवी मंदिर के बारे में विस्तार से जानें साथ ही मां कुष्मांडा की पूजा का शुभ मुहूर्त और भोग के बारे में जान लें.
मालिन करती है माता का शृंगार
उत्तर प्रदेश के कानपूर जिले में घाटमपुर कस्बे में मां कुष्मांडा देवी मंदिर स्थित है जिसको लेकर धार्मिक और लोक मान्यता है अगर कोई व्यक्ति 6 माह तक मां के पिंडी से रिसने वाले जल को अपनी आंखों में लगाएं तो उसकी खोई रोशनी तक मिल सकती है. इस मंदिर में मां कुष्मांडा देवी पिंडी के स्वरूप में दो मुख में विराजती हैं. जिसके कारण पिंडी का छोर समझ नहीं आ पाता है. जिसके कारण मां यहां लेटी हुई सी जान पड़ती हैं. इनकी पिंडी से साल भर तक जल रिसता है. यह जल कहां से रिसता है इस बारे में आज तक किसी को जानकारी नहीं मिल पाई है. मां कुष्मांडा देवी मंदिर की पूजा मलिन यानी फूल बांटने का काम करने वाली महिला करती हैं. मलिन ही मां कुष्मांडा देवी का श्रृंगार आदि करती हैं. यह परंपरा बहुत पुराने समय से ही चला आ रहा है.
कुष्मांडा माता मंदिर
घाटमपुर स्थित मां कुष्मांडा देवी की आकार की बात करें तो दो मुख के साथ माता चतुष्टय आकार में भूमि पर लेटी हुई प्रतिष्ठित हैं. यही कारण है कि नवरात्रि की चतुर्थी को लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं. श्रद्धालु यहां मां को श्रृंगार सामग्री चढ़ाते हैं, कच्चे चने भोग के रूप में अर्पित करते हैं. यहां पर कुम्हड़ा की बलि देने की परंपरा है.
मंदिर दर्शन का समय
कुष्मांडा माता मंदिर जाकर अगर आप भी माता के दर्शन पाना चाहते हैं या पूजा करना चाहते हैं तो आपको जान लेना चाहिए कि मंदिर में दर्शन का समय क्या है. इस दिन सुबह 6 बजे जाएं, रात के 9 बजे तक मंदिर खुला रहता है. ठंड के मौसम में दर्शन का समय बदल सकता है.
आश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि
पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 13 अक्टूबर 2026 की रात को 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 15 अक्टूबर 2026 की रात को 01 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि में 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा की उपासना की जाएगी.
मां कूष्मांडा की पूजा ये शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:54 से लेकर सुबह 05:43 बजे तक.
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक.
अमृत काल: दोपहर 04:14 से लेकर शाम 05:57 बजे तक.
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 से लेकर दोपहर 03:09 बजे तक.
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:17 से लेकर शाम 06:42 बजे तक.
मां कूष्मांडा का भोग
मां कूष्मांडा को नवरात्रि के चौथे दिन पूजा के समय मालपुआ का भोग लगाया जाए तो इसे शुभ माना जाता है. कद्दू से बनी मिठाई या पेठा व दही का भोग भी माता को अति प्रिय है.
(Disclaimer- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं, स्थानीय परंपराओं और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सूचना देना है, किसी मान्यता या दावे की पुष्टि करना नहीं.)