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Karwa Chauth Vrat Rules 2026: इस साल 29 अक्टूबर, गुरुवार के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. ध्यान दें यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है. महिलाएं इस दिन सौभाग्यवती बने रहने और पति की लंबी आयु के लिए दिनभर का कठिन निर्जला व्रत रखती हैं. इस व्रत को रखने से सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. इस व्रत की शुरुआत सरगी से होती है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण करने पर व्रत का समापन होता है. आइए जानें किन महिलाओं को करवा चौथ का व्रत नहीं रखना चाहिए और इस व्रत पर सरगी का क्या समय है.
अगर आप करवा चौथ का व्रत रख रही हैं तो सरगी खाने का समय सूर्योदय से थोड़ा पहले का होता है. ब्रह्म मुहूर्त में उठें और सास के द्वारा दी गई सरगी को ग्रहण करें. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:48 से लेकर 05:39 बजे तक होगा और उससे पहले सरगी का समय सुबह 3:30 बजे से लेकर सुबह 5:30 बजे के बीच की जाएगी.
गर्भावस्था में मां और शिशु दोनों की पोषण से जुड़ी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. लंबे समय तक भोजन न करना और पानी न पीना गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. उन्हें डिहाइड्रेट कर सकता है और कमजोर कर सकता है. गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए. हालांकि गर्भवती महिलाओं को व्रत रखना मना होता है.
डायबिटीक महिलाओं को ज्यादा देर तक खाली पेट रहना उसके ब्लड शुगर को असंतुलित कर सकता है. ऐसी महिलाएं दवाइयां भी ले रही होती हैं. ऐसी स्थिति में डायबिटीक महिलाओं को करवा चौथ का व्रत करने से बचना चाहिए क्योंकि इस व्रत में पूरा दिन न तो कुछ खाना होता है न तो पीना होता है. डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत न रखें.
ऐसी महिलाएं जिनके पास नवजात बच्चा हो और जो स्तनपान करा रही हों तो उन्हें समय-समय पर दूध, पानी या दाल पीने की जरूरत पड़ती है और पोषक चीजें खाना होता है. लंबे समय तक पानी न पीना या खाना न खाना ऐसी महिलाओं के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. ऐसे में नवजात शिशु की मांओं के लिए करवा चौथ का व्रत रखना मना है.
जिन महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हों जैसे एनीमिया, चक्कर आना, पेट में दर्द होना, लो ब्लड प्रेशर, किडनी की दिक्कत होना. ऐसी महिलाओं को लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहना मना होता है. ऐसे में करवा चौथ के निर्जला व्रत को ऐसी महिलाओं के द्वारा रखना मना है.
पीरियड में महिलाओं की शारीरिक स्थिति सामान्य नहीं होती है. कुछ महिलाओं को तेज पेट दर्द, थकान और कमजोरी महसूस होती है. वहीं, किसी को रक्तस्राव अधिक होने की समस्या होती है. ऐसी स्थिति में करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने से दिक्कतें बढ़ जाएं, ऐसा भी हो सकता है. ऐसे में मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना मना होता है. हालांकि कुछ महिलाएं मासिक धर्म के दौरान भी व्रत रख लेती हैं लेकिन पूजा नहीं करती हैं.
बढ़ती उम्र में कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें समय-समय पर होती रहती हैं. ऐसी महिलाओं को प्यास ज्यादा लगती है और डिहाइड्रेशन जल्दी होता है. बुखार, उल्टी, दस्त जैसी दिक्कतें होती रहती हैं. ऐसे में बूढ़ी महिलाएं अगर करवा चौथ का व्रत न रखें तो उनके लिए अच्छा होगा लेकिन अगर व्रत रखना चाहती हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
अगर पूरा व्रत न रख पाएं तो जलपान और फलाहार कर सकते हैं. दूध पी सकते हैं या हल्का आहार लेकर उपवास रख सकती हैं.
भले ही व्रत न रख रही हों लेकिन करवा चौथ की पूजा में जरूर बैठें और शिव-पार्वती, भगवान गणेश की पूजा करें.
चंद्रोदय हो जाए तो चंद्र दर्शन करें और अर्घ्य भी दें. छलनी से पति का चेहरा देखने की विधि जरूर पूरी करें.
ईश्वर और करवा माता का ध्यान करें व उनको प्रणाम करें. व्रत कथा जरूर सुनें.
(यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है. स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें. व्रत-पूजा के नियम परिवार और पंडित के अनुसार भिन्न हो सकते हैं.)