कपर्दिश विनायक चतुर्थी व्रत पर भगवान गणेश के तपस्वी स्वरूप की करें उपासना, जान लें सही शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
कपर्दिश विनायक चतुर्थी व्रत पर गणेश जी के तपस्वी स्वरूप की उपासना करने का विधान है. भगवान के इस रूप को शिव जी से भी जोड़ा जाता है. आइए जानें इस व्रत पर किस विधि से गणेश जी की पूजा करें और क्या शुभ मुहूर्त है.
Kapardish Vinayak Chaturthi 2026: कपर्दिश विनायक चतुर्थी व्रत पर भगवान गणेश के तपस्वी स्वरूप की पूजा करने का भी विधान है. यह व्रत हर साल आश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है और इस साल यह तिथि 14 अक्टूबर को मान्य है. धार्मिक मान्यता है कि कपर्दिश विनायक चतुर्थी व्रत पर गणेश जी की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और मानसिक शांति मिलती है. कपर्दिश स्वरूप को भगवान शिव के तप से जोड़ा जाता है.
काशी के 56 विनायकों की धार्मिक परंपरा से भी कपर्दिश विनायक को जोड़ा जाता है जिसके हर रूप का अपना धार्मिक महत्व है. इस व्रत को लेकर धार्मिक मान्यता है कि कपर्दिश विनायक की पूजा करने से भक्त को कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की शक्ति मिलती है और विवेक बढ़ता है. मानसिक उलझनें और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
कपर्दिश विनायक चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 13 अक्टूबर को, रात 11:27 बजे से.
चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 अक्टूबर को, रात 1:13 बजे.
गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: 14 अक्टूबर को, सुबह 10:58 बजे से से लेकर दोपहर 1:16 बजे तक
चंद्रदर्शन से बचने का समय: 14 अक्टूबर, सुबह 9:49 बजे से लेकर शाम 7:57 बजे तक
कपर्दिश विनायक चतुर्थी की पूजा कैसे करें?
कपर्दिश विनायक चतुर्थी पर सुबह स्नान आदि कर स्वच्छा वस्त्र पहनें.
भगवान गणेश की पूजा और व्रत का संकल्प करें.
पूजा स्थान को साफ करें और गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें.
अब गणेश जी का जल से अभिषेक करें.
फूल, दूर्वा, फल, मिठाई चढ़ाएं और अन्य पूजन सामग्री भी भगवान को अर्पित करें.
दूर्वा और बेलपत्र अर्पित करें. मंत्र का जाप करें और अंत में आरती कर प्रसाद बांटें.
गणेश जी को चढ़ाएं 21 दूर्वा
भगवान गणेश को पूजा में 21 दूर्वा जरूर अर्पित करें. कपर्दिश चतुर्थी पर किया गया यह एक उपाय जीवन के संकटों का नाश कर सकता है. धार्मिक परंपरा में बेलपत्र भी गणेश जी को अर्पित कर सकते हैं क्योंकि शिव तत्व से ही कपर्दिश स्वरूप जुड़ा हुआ है.
इस मंत्र का करें जाप
पूजा के समय गणेश जी के मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप करें और अंत में भगवान से सुख-शांति, सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करें. इसके साथ ही जीवन के विघ्न बाधाओं को दूर करने की भी भगवान से प्रार्थना करें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)