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जहानाबाद की 815 साल पुरानी मजार: कपड़ा फेंकते ही घर लौट आते हैं बिछड़े लोग, जानिए क्या है रहस्य?

बिहार के जहानाबाद स्थित हजरत हैदर शाह शैलानी मजार परिसर में मौजूद बेर के पेड़ पर गायब इंसान का कपड़ा फेंकने से उसके घर लौटने की मान्यता है. 815 साल पुराने इस दरगाह पर हर धर्म के लोग पहुंचते हैं.

Written By Harsh Singh
Published: Sep 28, 2026, 03:24 PM IST | Updated: Sep 28, 2026, 03:26 PM IST
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अगर आपके परिवार का भी कोई सदस्य अचानक गायब हो जाए या घर छोड़कर चला जाए और उसके बारे में आपको कोई जानकारी न हो. आपको बिल्कुल भी पता न हो कि वो शख्स किस हाल में है, जिंदा भी है या नहीं, तो आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको उस गुम हुए व्यक्ति से मिला सकता है.

सुनने में ये आपको अजीब लग रहा होगा. ये बिहार के जहानाबाद जिले में सदर अस्पताल मोड़ के पास एक मजार परिसर में मौजूद है. इस पेड़ को लेकर लोगों में आस्था और चमत्कार का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

मान्यता है कि अगर परिवार का कोई सदस्य अचानक गायब हो जाए या सालों से घर न आया हो, तो उसके पहने हुए कपड़े यहां लाए जाते हैं.

लोग उस कपड़े को बेर के पेड़ पर उछालकर फेंकते हैं. अगर कपड़ा पेड़ की टहनियों में अटक जाता है, तो बिछड़ा हुआ इंसान बहुत जल्द सही-सलामत घर लौट आता है.

कपड़ा अटकते ही जाग उठती है उम्मीद की नई किरण

इस मजार परिसर में बने बेर के पेड़ को आप ध्यान से देखेंगे, तो उसकी डालियों पर अनगिनत कपड़े लटके हुए नजर आएंगे. ये लटके कपड़े किसी एक धर्म के नहीं, बल्कि समाज के हर तबके के लोगों की आस्था को दर्शाते हैं.

जब परेशान परिजन उस गुमशुदा इंसान का कपड़ा पेड़ पर फेंकते हैं, तो टहनी पर कपड़े का अटकना एक शुभ संकेत माना जाता है.

लोग इसे चमत्कार मानते हैं कि इसके बाद बिछड़ा व्यक्ति खुद-ब-खुद घर लौट आता है. वहीं अगर कपड़ा नीचे गिर जाता है, तो लोगों की उम्मीदें थोड़ी कमजोर पड़ जाती हैं.

815 साल पुरानी दरगाह में बसती है हर धर्म की आस्था

ये प्रसिद्ध मजार हजरत हैदर शाह शैलानी बाबा की है. वहां लोगों के अनुसार ये पवित्र दरगाह करीब 815 साल पुरानी है.

बताया जाता है कि हजरत हैदर शाह शैलानी बाबा सदियों पहले श्रीलंका से भारत आए थे और इसी जगह पर बसे थे.

इस ऐतिहासिक स्थान पर केवल एक धर्म के लोग ही नहीं आते, बल्कि हिंदू, मुस्लिम और अन्य सभी धर्मों के श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं. हर साल यहां बहुत बड़े स्तर पर उर्स का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी-बड़ी हस्तियां चादर चढ़ाने आती हैं.

116 साल पुराना इमली का पेड़ है सर्वे रिकॉर्ड में दर्ज

बेर का ये पेड़ कितना पुराना है, इसकी सटीक जानकारी तो किसी के पास मौजूद नहीं है. मजार परिसर में लगा एक पुराना इमली का पेड़ इतिहास की गवाही जरूर देता है.

वहां के मान्यता के मुताबिक ये इमली का पेड़ ब्रिटिश काल के 1916 के पुराने सरकारी सर्वे रिकॉर्ड बुक में बाकायदा दर्ज है.

इससे ये साफ साबित होता है कि ये धार्मिक स्थल सदियों से अस्तित्व में है. इसी परिसर में लगा बेर का पेड़ भी दशकों से लोगों की पीड़ा और मनोकामनाओं का साक्षी बना हुआ है.

कई परिवारों को मिल चुके हैं अपने बिछड़े हुए परिजन

स्थानीय लोगों का दावा है कि इस बेर के पेड़ पर कपड़ा फेंकने के बाद कई चमत्कार देखने को मिले हैं. सालों से गायब चल रहे लोगों का अपने परिजनों से अचानक संपर्क हो गया और वे सकुशल घर लौट आए.

यही वजह है कि जब भी किसी घर का कोई सदस्य भटक जाता है, तो हताश परिवार वाले बिना देरी किए इस मजार पर खिंचे चले आते हैं. लोग पूरी अकीदत और श्रद्धा के साथ अपने प्रियजन का कपड़ा पेड़ पर उछालते हैं और बाबा के दरबार में प्रार्थना करते हैं.

आस्था और भाईचारे की मिसाल पेश करता है ये पवित्र धाम

जहानाबाद का यह मजार परिसर न केवल चमत्कारों के लिए जाना जाता है, बल्कि यह गंगा-जमुनी तहजीब की अद्भुत मिसाल भी है. यहां आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसकी जात-पात या धर्म नहीं पूछा जाता.

हर दुखियारा व्यक्ति अपनी समस्या लेकर बेर के पेड़ के पास पहुंचता है. आधुनिक युग में भी लोगों का इस प्राचीन परंपरा पर अटूट विश्वास बरकरार है.

अगर आप भी जहानाबाद जाएं, तो सदर अस्पताल के पास स्थित इस आस्था केंद्र के दर्शन करके इस अनोखे बेर के पेड़ को जरूर निहारें.

(Disclaimer): यह आलेख स्थानीय जनमान्यताओं, दरगाह के गद्दीनशीन द्वारा साझा की गई जानकारियों और क्षेत्रीय जनश्रुतियों पर आधारित है. इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है.

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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