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Jagannath Mandir: भगवान जगन्नाथ के भूस्वामी होने का क्या है धार्मिक पहलू, कितनी संपत्ति है महाप्रभु के नाम

Jagannath Mandir Ki Sampatti: इस लेख में हम जानेंगे कि भगवान जगन्नाथ के नाम कितनी संपत्ति है, क्यों महाप्रभु को सबसे बड़ा भूमि का स्वामी कहा गया है. इसके पीछे का धार्मिक पहलू क्या है.

Jagannath Mandir: भगवान जगन्नाथ के भूस्वामी होने का क्या है धार्मिक पहलू, कितनी संपत्ति है महाप्रभु के नाम

भगवान जगन्नाथ इस पूरे जगत के स्वामी है. विष्णु जी के पूर्ण अवतार श्री कृष्ण का ही एक स्वरूप भगवान जगन्नाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं. विश्व प्रसिद्ध पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में व्यवस्था, पूजा और महाप्रसाद की परंपरा बहुत पुरानी है जो हर किसी को आकर्षित करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं श्रीजगन्नाथ की संपत्ति को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रहती है. आइए इस लेख में विस्तार से जानें कि आखिर भगवान जगन्नाथ के पास कितनी संपत्ति है, भगवान के भूस्वामी होने का आध्यात्मिक और सामाजिक पहलू क्या है.

भगवान जगन्नाथ के नाम कितनी अचल संपत्ति है?

श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन यानी एसजेटीए के अभिलेख बताते हैं कि महाप्रभु के नाम पर 60,822 एकड़ से अधिक भूमि है जो देश के अलग-अलग 7 राज्यों में दर्ज है. इनमें से ओडिशा में ही 60,426.943 एकड़ की भूमि है जो यहां के खुर्दा और पुरी जिलों में है. वहीं बाकि बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में स्थित है. खास बात यह है कि मंदिर के रत्न भंडार में जो भ भी खजाना सोना, हीरे और अन्य बहुमूल्य आभूषण के रूप में सुरक्षित है उसके आंकड़े इन अचल संपत्तियों में शामिल नहीं है. यहां तक कि हाल के समय में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी महाप्रभु की जमीन के प्राचीन रिकॉर्ड पाए जाने की बात सामने आई है.

भगवान जगन्नाथ के मंदिर का खजाना और धन

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) की मानें तो 31 अगस्त 2026 तक के आंकड़े के अनुसार लगभग 1,911.80 करोड़ रुपये मंदिर के बैंक खातों में जमा थे जिसमें 1,811.10 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट कराए गए थे. वहीं ₹100.71 करोड़ सेविंग, करंट और फ्लेक्सी आकाउंट में जमा थे. रत्न भंडार की बहुमूल्य वस्तुओं की लिस्ट बनाने और उनके सत्यापन का प्रॉसेस बहुत समय बाद हो रहा है, जिसके कारण मौजूदा कुल मूल्य अलग से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

भगवान जगन्नाथ कैसे बन गए इतने बड़े भूमि स्वामी

जानकारों की मानें तो ऐतिहासिक रूप से गजपति राजाओं के साथ ही समय-समय पर अलग-अलग राजवंशों ने भगवान जगन्नाथ को राज्य का वास्तविक अधिपति माना यानी वहीं राजा हैं. इसी सोच के साथ उन्हें राजाओं ने अपने-अपने समय पर भूमि दान की. इस तरह मंदिर की संपत्ति अनेक राज्यों में फैलती गई.

भगवान जगन्नाथ के भूस्वामी होने का धार्मिक पहलू

सर्वशक्तिमान और 'जगत के स्वामी' महाप्रभु'जगन्नाथ' के नाम में ही "जगत के नाथ" आता है यानी वे इस पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं. भगवान के भूस्वामी होने का बहुत ही गहरा धार्मिक पहलू है.  मान्यता के अनुसार, पृथ्वी की समस्त भूमि, धन और संपत्ति सब महाप्रभु का ही है. राजा हो या रंक सभी महाप्रभु के सेवक हैं. धार्मिक मान्यता तो ये भी है कि महाप्रभु अपने भक्तों की रक्षा के लिए अपनी ही भूमि पर वास करते हैं जिसके कारण ही 'भूस्वामी' कहलाए. ध्यान दें, आज भी जब पुरी में जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा निकलती है तो सोने की झाड़ू से उनका साफ किया जाता है. यहां कोई अगर राजा है तो वो भगवान जगन्नाथ जी ही हैं और दूसरा कोई नहीं. इतिहासकारों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में अनंतवर्मन चोडगंग देव ने  जगन्नाथ मंदिर के निर्माण का संकल्प उठाया और अनंगभीम देव तृतीय ने इसे पूरा किया. गंग राजाओं ने अपना पूरा जीवन भगवान की सेवा में लगा दिया. भगवान जगन्नाथ का ‘सेवक’ घोषित करते हुए इन राजाओं ने अपने साम्राज्य को उनके चरणों में समर्पित कर दिया.

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Padma Shree Shubham

Padma Shree Shubham

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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