अगर आपके जीवन में एक ऐसा दोस्त है, जो आपके बुरे-भले में हमेशा खड़ा होता है, तो ये किसी वरदान से कम नहीं है.
सच्चा दोस्त हमेशा आपका साथ देता है. लेकिन ऐसा भी नहीं होता है कि वो आपका गलत में भी साथ दें.
अगर आप कुछ गलत करते हैं, तो वो आपको रोकते हैं और समझाते हैं. वहीं आपके पीछे आपकी तारीफ करते हैं. लेकिन सामने आपकी गलतियां गिनाते हैं.
लेकिन सबकी किस्मत में ऐसा दोस्त होता भी नहीं है. कुछ लोग सिर्फ दोस्ती का मुखौटा पहने रहते हैं, और हम उन्हें अपना दोस्त मान लेते हैं.
वो ऐसे होते हैं कि अगर उनको आपको नुकसान पहुंचाने से फायदा होगा तो, वो थोड़ा सा भी नहीं सोचेंगे.
ऐसे ही लोगों को आस्तीन का सांप कहा जाता है. अगर आपको ऐसे जहरीले लोगों से बचना है, तो आचार्य चाणक्य की नीतियों में ऐसी बातें बताई गई हैं, जिससे आप उनका पहचान आसानी से कर सकते हैं.
आपने कुछ लोगों को देखा होगा, जो आपके सामने तो आपके तारीफों की पुल बांधते होंगे, लेकिन पीठ पीछे आपकी बुराई करते होंगे.
इतना ही नहीं अगर आप कुछ कहते हैं, तो वो उसमे हां में हां मिलाते है. ऐसा लगता है कि उनसे बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं है.
लेकिन अगर आप सामने नहीं रहते हैं तो आपकी बुराइयां सबसे करने लगते हैं. साथ ही आपकी बनी बनाई इज्जत भी खराब करने की कोशिश करते हैं.
इसलिए समय रहते ऐसे इंसानों से दूरी बना लेनी चाहिए, नहीं तो आपको बहुत हानि हो सकती है.
अगर आपका कोई अच्छा दोस्त है तो वो आपके कामयाबी में अपनी खुशी ढूंढता है. लेकिन अगर वहीं मतलबी दोस्त रहेगा तो आपकी सफलता देखकर अंदर ही अंदर जलता है.
वो आपकी मेहनत को कम दिखाने की कोशिश करेगा. आपके कामयाबी में कमियां निकालने लगेगा. अगर कोई आपकी उपलब्धियों को नीचा दिखाने का कोशिश करे, तो समझ जाएं कि वो नकली दोस्त है.
दोस्तों में एक-दूसरे का मजा लेना तो नॉर्मल है. लेकिन जब कोई दोस्त आपके कमजोरियों का मजाक बनाएं और नीचा दिखाए.
तो वो अच्छा इंसान नहीं है. अगर आप उस बात का विरोध करेंगे तो, वो यही कहेगा कि, वो मजाक कर रहा था.
लेकिन वो सच में आपको नीचा दिखाना चाहता था. इसलिए ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए.
आपका अच्छा दोस्त आपको कभी गलत रास्ते पर नहीं जाने देगा. वो आपकी बातों को सुनकर, उसमें क्या सही और क्या गलत है, वो बताता है.
लेकिन जो आपका गलत दोस्त होता है, वो हमेशा आपको गलत रास्ते पर जानें को उकसाता है, जिससे आपका नुकसान हो जाए.
इसलिए ऐसे लोगों से जितनी जल्दी हो सके दूरी बना लें.
अगर सच्चे दोस्त को पहचानना हो तो उसकी पहचान बुरे समय में होता है. अच्छे समय में तो आपके साथ सब खड़े होते हैं.
लेकिन जैसे ही खराब समय आता है कब सब गायब हो जाते हैं, पता तक नहीं चलता है. लेकिन अच्छे दोस्त आपको ऐसे समय में कभी छोड़कर जाते हैं.
वो आपके समस्या को खत्म नहीं कर पातें. लेकिन वो आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य व्यावहारिक जीवन के अनुभवों, मानव व्यवहार विश्लेषण और चाणक्य नीति के सिद्धांतों पर आधारित है.