कैसे प्राप्त हुआ भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र? जानिए शिव भक्ति से जुड़ी ये पौराणिक कथा
भगवान विष्णु ने राक्षसों के संहार के लिए हिमालय पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. एक कमल कम पड़ने पर उन्होंने अपनी आंख अर्पित कर दी. इस भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने श्री हरि को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था.
भगवान विष्णु का सबसे प्रिय शस्त्र सुदर्शन चक्र माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु को ये सुदर्शन चक्र कैसे मिला था.
पौराणिक कथाओं के अनुसार सुदर्शन चक्र खुद देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव ने श्री हरि को दिया था. अब ये अस्त्र कैसे मिला था इसके पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी छिपी हुई है.
जब राक्षसों का अत्याचार सीमा से बाहर हो गया, तब इस दिव्य अस्त्र की एंट्री हुई थी. आज इस खबर में सुदर्शन चक्र मिलने की पूरी पौराणिक कथा के बारे में डिटेल से जानेंगे.
राक्षसों के आतंक से कांप उठे थे सभी देवता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक समय पृथ्वी और स्वर्ग लोक पर असुरों का अत्याचार बहुत अधिक बढ़ गया था. राक्षसों ने सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में बाधा डालना शुरू कर दिया था.
इतना ही नहीं वे स्वर्ग पर अपना अधिकार जमाना चाहते थे. राक्षसों के इस प्रकोप से भयभीत होकर देवराज इंद्र सभी देवताओं के साथ भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे.
देवताओं ने श्री हरि से प्रार्थना की कि वे उन्हें इस संकट से मुक्ति दिलाएं. भगवान विष्णु देवताओं की परेशानी समझ गए और जानते थे कि इसका समाधान केवल शिव जी कर सकते हैं.
हिमालय पर भगवान शिव की कठिन तपस्या
भगवान शिव को भगवान श्री हरि अपना आराध्य मानते हैं और साथ-साथ महादेव भी श्री हरि को अपना अराध्य मानते हैं. अब देवताओं की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु हिमालय जा पहुंचे.
वहां वे महादेव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या में लीन हो गए. श्री हरि ने भगवान शिव के एक हजार नामों का जाप करना शुरू किया.
उन्होंने संकल्प लिया कि वे हर नाम का उच्चारण करने के साथ महादेव को एक कमल का फूल अर्पित करेंगे.
महादेव ने ली श्री हरि विष्णु की भक्ति की परीक्षा
भगवान शिव जानते थे कि देवताओं पर संकट आया है और विष्णु जी उनसे सहायता मांगने आए हैं. ऐसे में महादेव ने अपने भक्त और आराध्य श्री हरि की परीक्षा लेने का विचार किया.
उन्होंने चुपके से पूजा के लिए रखे एक हजार कमल के फूलों में से एक फूल गायब कर दिया. भगवान विष्णु आंखें बंद करके ध्यान में लीन थे, इसलिए उन्हें इस बात का पता नहीं चला. वे मंत्र पढ़ते गए और एक-एक करके कमल का फूल महादेव को अर्पित करते रहे.
कमल कम पड़ने पर विष्णु जी ने चढ़ा दी अपनी आंख
जब जाप का अंतिम नाम आया, तब भगवान विष्णु ने देखा कि चढ़ाने के लिए एक कमल का फूल कम पड़ गया है. विष्णु जी ने सोचा कि अगर वे पूरा फूल नहीं चढ़ाएंगे तो उनका संकल्प अधूरा रह जाएगा और तपस्या भंग हो जाएगी.
तब श्री हरि ने एक बड़ा निर्णय लिया. वे अपनी एक आंख को कमल के समान मानते थे, इसलिए उन्होंने अपनी एक आंख निकालकर भगवान शिव के चरणों में अर्पित कर दी. विष्णु जी की इस अतुलनीय भक्ति को देखकर महादेव बहुत भावुक हो गए.
शिव जी ने प्रसन्न होकर दिया सुदर्शन चक्र का वरदान
भगवान विष्णु का ऐसा प्रेम देखकर शिव जी उनके सामने प्रकट हो गए. उन्होंने श्री हरि की आंख वापस कर दी और उनसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा.
तब विष्णु जी ने प्रार्थना की कि राक्षसों के संहार के लिए उन्हें कोई अजेय शस्त्र प्रदान करें. भगवान शिव ने अपनी शक्ति से निर्मित सुदर्शन चक्र श्री हरि को सौंप दिया.
इस चक्र की मदद से भगवान विष्णु ने सभी दुष्ट राक्षसों का अंत किया. सुदर्शन चक्र को संसार के सभी शस्त्रों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है.
(Disclaimer): यह रिपोर्ट पौराणिक कथाओं, शिव पुराण और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.
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