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छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी पर्व 7 नवंबर 2026 यानी कि आज मनाया जा रहा है. कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी, छोटी दिवाली, काली चौदस और भूत चौदस कहते हैं. इस पर्व के इतने सारे नाम होने के पीछे कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं हैं. जिसमें नरकासुर का वध और उसके बाद आतंक मुक्ति मिलने पर दीप जलाकर दिवाली मनाना, मां काली की पूजा आदि शामिल हैं. आइए जानते हैं 5 नाम वाले इस पर्व से जुड़ी अहम घटनाएं और भूतों से कनेक्शन.
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी ऐसी तिथि है, जब 5 पर्व मनाए जाते हैं, जिनके अलग-अलग नाम और अपनी वजहें हैं.
नरक चौदस : मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध करके उसकी कैद से 16 हजार महिलाओं को छुड़ाया था और फिर उन सभी से विवाह किया था.
छोटी दिवाली : नरकासुर के आतंक से मुक्ति मिलने पर द्वारकावासियों ने दीप जलाकर खुशी मनाई थी, इसलिए इस दिन छोटी दिवाली मनाते हैं.
रूप चौदस : इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करते हैं. इससे सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और सुंदरता मिलने की मान्यता है. इस दिन महिलाएं उबटन लगाकर, श्रृंगार करके खुद को संवारती हैं इसलिए इसे रूप चौदस कहते हैं.
भूत चौदस : मान्यता है कि इस रात अतृप्त आत्माओं को रास्ता दिखाने के लिए 14 दीपक जलाए जाते हैं. इसलिए इसे भूत चौदस कहते हैं.
काली चौदस : इस रात पश्चिम बंगाल में मां महाकाली की विशेष पूजा होती है और तांत्रिक विशेष सिद्धियां पाने के लिए तंत्र-मंत्र करते हैं. इसलिए इसे काली चौदस कहा जाता है.
नरक चौदस पर भगवान कृष्ण, मां काली की पूजा करने के साथ-साथ यमराज के लिए भी रात को दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है. इससे घर-परिवार का संकटों से बचाव होता है.
पश्चिम बंगाल समेत कुछ पूर्वी राज्यों में मान्यता है कि इस रात 14 पीढ़ियों के पूर्वज (आत्माएं) अपने परिवार को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आती हैं. लिहाजा उन्हें रास्ता दिखाने के लिए लोग इस रात 14 दीपक जलाते हैं. साथ ही यह भी माना जाता है कि इन दीयों की ताकत और प्रकाश से बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां घर से दूर रहती हैं. पूर्वजों की आत्माओं से संबंध होने के कारण कई ज्योतिषाचार्य इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के उपाय करने की सलाह भी देते हैं.
इसके अलावा इस दिन आयुर्वेद और लोक-परंपरा के अनुसार 14 तरह की हरी पत्तियों का साग भी बनाकर खाया जाता है, इससे बदलते मौसम में शरीर की बीमारियों से रक्षा होती है.
इन 14 दीपकों में एक दीपक तो यम का होता है, इसके अलावा घर के मुख्य द्वार और अंधेरे कोनों में दीपक रखे जाते हैं. ताकि घर का हर कोना रोशनी से जगमगाए और पूर्वजों की आत्माओं को घर का रास्ता दिख सके.
(Disclaimer- यह जानकारी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. इसे किसी वैज्ञानिक प्रमाण या निश्चित परिणाम के दावे के रूप में न लें.)