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काशी में छिपा है सम्राट चंद्रगुप्त से जुड़ा अनोखा मंदिर... मन्नत पूरी करने के लिए दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु; जानिए इतिहास

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित चंद्रगुप्त महादेव मंदिर वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित एक पौराणिक धाम है, जहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मानसिक शांति मिलती है.

Written ByHarsh Singh
Published: Oct 11, 2026, 01:27 PM IST|Updated: Oct 11, 2026, 01:46 PM IST
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काशी में छिपा है सम्राट चंद्रगुप्त से जुड़ा अनोखा मंदिर...  मन्नत पूरी करने के लिए दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु; जानिए इतिहास

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    Harsh Singh

    Harsh Singh

    हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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    बनारस के कण-कण में महादेव का वास माना जाता है. जब वहां काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम चल रहा था, उस समय कई ऐसे प्राचीन मंदिर दुनिया के सामने आए हैं, जिनके बारे में लोग कम जानते थे.

    इनमें से एक मंदिर जो बेहद खास और प्राचीन है उसका नाम चंद्रगुप्त महादेव मंदिर है. जो बनारस के घनी गलियों में छिपा हुआ था.

    कहा जाता है इस मंदिर का कनेक्शन सीधे तौर पर भारत के महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से है. यहां के पावन शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही लोगों के सारे मानसिक क्लेश और पाप पूरी तरह मिट जाते हैं.

    मौर्य साम्राज्य से जुड़ी है स्थापना की प्राचीन कथा मौर्य वंश के प्रतापी राजा चंद्रगुप्त मौर्य ने वहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना की थी.

    जब वो अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए युद्ध कर रहे थे. उस समय उनसे जाने-अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित के लिए बाबा भोलेनाथ की शरण ली थी.

    उन्होंने बनारस की इस पवित्र भूमि पर अच्छे से तपस्या की और भगवान शिव के रूप में चंद्रगुप्त महादेव को यहां स्थापित किया.

    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परिसर में स्थापित है ये पावन धाम

    चंद्रगुप्त महादेव का ये पवित्र मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के बिल्कुल पास स्थित है.

    कॉरिडोर निर्माण से पहले ये मंदिर आसपास की पुरानी इमारतों और संकरी गलियों के बीच छिपा हुआ था.

    लेकिन विश्वनाथ धाम को अच्छे से बनाने के बाद अब इस मंदिर को एक नया और भव्य रूप मिल चुका है.

    अब यहां आने वाले लोगों के लिए दर्शन-पूजन करना बेहद आसान हो गया है. रोज हजारों की संख्या में भक्त बाबा विश्वनाथ के साथ-साथ इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन करने भी पहुंचते हैं.

    शिवलिंग की महिमा और धार्मिक मान्यताएं

    सनातन परंपरा में चंद्रगुप्त महादेव मंदिर का एक खास धार्मिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि यहां विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजन करने से व्यक्ति को ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है.

    खास रूप से जिन लोगों की कुंडली में चंद्र ग्रह से जुड़े दोष होते हैं, उनके लिए यहां पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है.

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से यहां आकर प्रार्थना करता है, महादेव उसकी हर मनोकामना पूरी कर देते हैं और उसे मानसिक रूप से मजबूत करते हैं.

    काशी के खास शिव मंदिरों में होती है इसकी गिनती

    काशी को प्राचीन काल से शिव की नगरी कहा जाता है. जहां हर गली में एक शिवलिंग स्थापित रहता है.

    काशी के 84 प्रमुख और पवित्र शिव मंदिरों की सूची में चंद्रगुप्त महादेव मंदिर का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है.

    पौराणिक ग्रंथों और काशी खंड में भी इस पावन स्थल का साफ उल्लेख मिलता है. सावन के महीने में और महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.

    लोग दूर-दूर से यहां आकर जल चढ़ाने और बाबा का आशीर्वाद पाने के लिए लाइनों में खड़े रहते हैं.
    ये भी पढ़ें: उम्मीद की नई किरण: 34 साल बाद खुला ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की जगी आस

    (Disclaimer): यह लेख पौराणिक मान्यताओं, काशी के स्थानीय इतिहास और धार्मिक संदर्भों पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों को ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी प्रदान करना है.

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