बनारस के कण-कण में महादेव का वास माना जाता है. जब वहां काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम चल रहा था, उस समय कई ऐसे प्राचीन मंदिर दुनिया के सामने आए हैं, जिनके बारे में लोग कम जानते थे.
इनमें से एक मंदिर जो बेहद खास और प्राचीन है उसका नाम चंद्रगुप्त महादेव मंदिर है. जो बनारस के घनी गलियों में छिपा हुआ था.
कहा जाता है इस मंदिर का कनेक्शन सीधे तौर पर भारत के महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से है. यहां के पावन शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही लोगों के सारे मानसिक क्लेश और पाप पूरी तरह मिट जाते हैं.
मौर्य साम्राज्य से जुड़ी है स्थापना की प्राचीन कथा मौर्य वंश के प्रतापी राजा चंद्रगुप्त मौर्य ने वहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना की थी.
जब वो अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए युद्ध कर रहे थे. उस समय उनसे जाने-अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित के लिए बाबा भोलेनाथ की शरण ली थी.
उन्होंने बनारस की इस पवित्र भूमि पर अच्छे से तपस्या की और भगवान शिव के रूप में चंद्रगुप्त महादेव को यहां स्थापित किया.
चंद्रगुप्त महादेव का ये पवित्र मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के बिल्कुल पास स्थित है.
कॉरिडोर निर्माण से पहले ये मंदिर आसपास की पुरानी इमारतों और संकरी गलियों के बीच छिपा हुआ था.
लेकिन विश्वनाथ धाम को अच्छे से बनाने के बाद अब इस मंदिर को एक नया और भव्य रूप मिल चुका है.
अब यहां आने वाले लोगों के लिए दर्शन-पूजन करना बेहद आसान हो गया है. रोज हजारों की संख्या में भक्त बाबा विश्वनाथ के साथ-साथ इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन करने भी पहुंचते हैं.
सनातन परंपरा में चंद्रगुप्त महादेव मंदिर का एक खास धार्मिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि यहां विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजन करने से व्यक्ति को ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है.
खास रूप से जिन लोगों की कुंडली में चंद्र ग्रह से जुड़े दोष होते हैं, उनके लिए यहां पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है.
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से यहां आकर प्रार्थना करता है, महादेव उसकी हर मनोकामना पूरी कर देते हैं और उसे मानसिक रूप से मजबूत करते हैं.
काशी को प्राचीन काल से शिव की नगरी कहा जाता है. जहां हर गली में एक शिवलिंग स्थापित रहता है.
काशी के 84 प्रमुख और पवित्र शिव मंदिरों की सूची में चंद्रगुप्त महादेव मंदिर का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है.
पौराणिक ग्रंथों और काशी खंड में भी इस पावन स्थल का साफ उल्लेख मिलता है. सावन के महीने में और महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है.
लोग दूर-दूर से यहां आकर जल चढ़ाने और बाबा का आशीर्वाद पाने के लिए लाइनों में खड़े रहते हैं.
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(Disclaimer): यह लेख पौराणिक मान्यताओं, काशी के स्थानीय इतिहास और धार्मिक संदर्भों पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों को ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों की जानकारी प्रदान करना है.