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हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा में भोग लगाना, पूजा का जरूरी हिस्सा होता है. जिसके लिए नियम भी बताए गए हैं कि किस देवी-देवता को क्या भोग लगाना है, भोग लगाने का तरीका क्या है, भोग कितनी देर बाद हटाना चाहिए, आदि. ताकि भोग की पवित्रता बरकरार रहे. लेकिन कई बार जाने-अनजाने में गलतियां हो जाती हैं, जैसे - रात भर भगवान के सामने भोग रह जाना. ऐसे में सवाल उठता है कि रात भर खुले रखे भोग में चीटी, कीड़े आदि न आ गए हों, ऐसे में इसे ग्रहण करें या न करें, या इसका क्या करें?
आमतौर पर पूजा के बाद भगवान के सामने भोग को 15 से 20 मिनट तक ही रखना चाहिए और उसके बाद उसे हटाकर ससम्मान स्वयं ग्रहण कर लें या लोगों में बांट दें. लेकिन अनजाने में कभी घंटों तक या पूरी रात भगवान के सामने भोग रखा रह जाए तो उसे फेंकें नहीं. उसका अपमान न करें, न ही घबराएं. बल्कि सबसे पहले भगवान से क्षमा मांगें. इसके बाद सम्मान से प्रसाद हटाएं और पूजा स्थल की सफाई करें.
- यदि प्रसाद में केला जैसा बिना कटा हुआ फल है, उसमें चींटी आदि नहीं लगी है तो खा सकते हैं. वरना सारी चीजें गाय को खिला दें.
- खीर, पंचामृत आदि सूंघने में ठीक लगें तो यह सोचकर ग्रहण न करें कि वे ठीक हैं. हो सकता है रात में उसके खुला रहने के दौरान कोई कीड़ा आदि गया है.
- हां साबुत फल या पैक की हुई सूखी मिठाई है तो उसे चैक करने के बाद ग्रहण कर सकते हैं.
वैसे तो भगवान को उतना ही भोग लगाएं जो कुछ देर सभी को बांटने और स्वयं ग्रहण करने में खत्म हो जाए. यदि किसी कारणवश ज्यादा मात्रा में भोग, प्रसाद चढ़ाया गया है और वह बच गया है तो उसे फ्रिज में रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखें.
- प्रसाद ढंक कर रखें.
- ध्यान रखें कि फ्रिज में अन्य कोई तामसिक चीज न हो. वरना प्रसाद की सात्विकता खत्म हो सकती है.
- बेहतर है कि ऐसी चीजें जो लोगों को बांटी जा सकें, समय रहते बांट दें. ताकि प्रसाद खत्म न हो.
इस मामले में घर के मंदिर या पूजा घर की तुलना, मुख्य मंदिरों से न करें. मंदिरों के अपने नियम और परंपराएं होती हैं. वहां शयन भोग भगवान को अर्पित किए जाते हैं. उनके भोग सेवा के समय भी अलग-अलग होते हैं. वहां के प्रशिक्षित पुजारी मंदिर की आगम या संप्रदाय परंपरा के अनुसार भोग लगाते तथा हटाते हैं. घर में भोग लगाते समय यह ध्यान में रखें कि भोग की असली भावना यह नहीं है कि भोग कितनी देर देवी-देवता के सामने रखा गया बल्कि भोग तैयार करने, भगवान से भोग ग्रहण करने की सच्चे मन से की गई प्रार्थना का है. साथ ही भोग की स्वच्छता और सात्विकता का है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित पूजा-पद्धतियों और सामान्य खाद्य सुरक्षा संबंधी मार्गदर्शन पर आधारित है. भोग और प्रसाद से जुड़े नियम अलग-अलग परिवारों एवं परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं. प्रसाद ग्रहण करने से पहले उसकी ताजगी और सुरक्षित रखे जाने की स्थिति का ध्यान जरूर रखें.)